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धरती के अंदर भी बढ़ रही है हलचल वैज्ञानिक हो रहे हैं परेशान

  • ऊपर की करफ उठ रहे हैं पर्वत

  • गहरे हो रहे हैं पहले से बने खाई

  • घूमने की गति की भी जांच हो रही

  • वायरस संकट में पृथ्वी के अंदर हलचल

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः धरती के अंदर हलचल बढ़ रही है। इस घटनाक्रम ने वैज्ञानिकों को इस पर

लगातार नजर बनाये रखने के लिए मजबूर कर दिया है। अब धरती के सबसे आंतरिक

सतह तक झांकने की कोई तकनीक उपलब्ध नहीं होने की वजह से अन्य वैज्ञानिक

आंकड़ों के विश्लेषण की गति तेज कर दी गयी है। वैज्ञानिक इन्हीं विश्लेषणों के जरिए यह

समझना चाहते हैं कि आखिर धरती के सबसे गहरे सतह के भीतर अथवा ठीक उसके ऊपर

क्या कुछ घटित होने लगा है। पृथ्वी की संरचना के बारे में जो वैज्ञानिक सोच है कि इस

गोलाकार आकृति के सबसे केंद्र में अब भी उबलता हुआ लावा ही है। यही स्थिति पृथ्वी के

सूर्य से टूटकर अलग होने के वक्त की थी। समय के साथ साथ उसका ऊपरी हिस्सा

वायुमंडल के प्रभाव से ठंडा होता गया है। इस बाहरी पर्त के ऊपर ही हम सभी रहते हैं। सारे

समुद्र और पर्वत भी इसी बाहरी पर्त पर हैं। उसके अंदर गहराई में कई परतों में पृथ्वी की

सतह बंटी हुई है। सबसे अंदर उबलते हुए लावा के ठीक बाहर सख्त खोल है जो लावा को

बाहर आने से रोके हुए है। जब कभी यह खोल किसी वजह से टूटता है तो यह लावा उबलता

हुआ बाहर आ जाता है। इसे लावा को बाहर आते हुए हम तब देख पाते हैं जब कोई

ज्वालामुखी विस्फोट होता है।

धरती के अंदर कुछ होता है तो भूकंप आते हैं

इस बाहरी खोल के ऊपर ही पृथ्वी के वे सारे टेक्टोनिक प्लेट हैं जो अंदर से आपस में जुड़े

होने के बाद भी ऊपरी सतह प अलग अलग हो गये हैं। इन्हीं टेक्टोनिक प्लेटों के नीचे कुछ

न कुछ घटित हो रहा है। जिसकी वजह से पृथ्वी के ऊपर भी उसके असर लगातार नजर

आ रहे हैं। लगातार भूकंप आने के साथ साथ पर्वत श्रृंखलाओं का ऊपर उठना भी इसी

गतिविधि का प्रभाव माना जा रहा है। भूकंप संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण यह बता रहा है

कि पृथ्वी का यह आंतरिक सतह घूम रहा है। इसी वजह से छोटे छोटे भूकंप पैदा हो रहे हैं।

लेकिन यह अचानक क्यों घूम रहा है, इसके बारे में अब तक कोई जानकारी नहीं मिल

पायी है। बीजिंग विश्वविद्यालय के भूगोल के प्रोफसर जियाओडोंग सॉंग ने कहा कि इस

बारे में वर्ष 1996 में पहली बार कुछ आंकड़े मिले थे। इस वक्त पृथ्वी के इस आंतरिक छोर

में हो रही हलचल के बारे में वैज्ञानिकों को पहली बार पता चला था। दरअसल वैज्ञानिक

मानते हैं कि इस अंदरूनी खोल के अंदर उबलते लावा की वजह से भूकंप के जैसी लहरें

उत्पन्न होती हैं। अब इस आंतरिक सतह के घूमने की जानकारी से वैज्ञानिक खुद भी

चकराये हुए हैं। वे इसका कारण नहीं समझ पा रहे हैं। दूसरी तरफ अंतरिक्ष वैज्ञानिक भी

इसकी वजह अंतरिक्ष में खोज रहे हैं ताकि यह पता चल सके कि पृथ्वी पर किसी अन्य

खगोलीय घटनाक्रम का कोई प्रभाव तो नहीं पड़ रहा है।

अंदर की दीवार टूटने से बाहर आता है खौलता लावा

इस बीच दुनिया भर के आंकड़ों से इतना पता चला है कि इन आंतरिक गतिविधियों की

वजह से ऊपरी सतह पर बहुत कुछ बदलता हुआ दिखने लगा है। कई पर्वतों की ऊंचाई

बढ़ने के साथ साथ खाई और गहरे होते पाये गये हैं। समुद्र के अंदर इसका क्या कुछ प्रभाव

पड़ा है, उस बारे में अब तक कोई जानकारी नहीं मिल पायी है। इस क्रम में किसी खास

इलाके में लगातार आ रहे भूकंप के झटकों को भी वैज्ञानिक समझऩा चाहते हैं। ताकि यह

पता चल सके कि पृथ्वी के आंतरिक सतह पर इस घूमने की वजह से क्या कुछ और असर

पड़ सकता है अथवा क्या इसके घूमने की गति तेज हो रही है। इससे भविष्य में पृथ्वी पर

पड़ने वाले प्रभाव के साथ साथ उत्तरी ध्रुव के अपने स्थान से साइबेरिया की तरफ

खिसकने के कारणों को जोड़कर देखा जा रहा है


 

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