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रुस में अमेरिकी जासूस के हवाले से सूचना की फिर से पुष्टि हुई




  • अमरिकी चुनाव में रुस का सीधा हाथ था
  • डोनाल्ड ट्रंप के मुकाबले क्लींटन हार जाये, यही तैयारी थी
  • ट्रंप की हरकतों से डरे हुए थे सीआईए अधिकारी
  • खुद पुतिन देख रहे थे यह सारा काम काज

एस राय

वाशिंगटनः रुस में सक्रिय एक अमेरिकी जासूस ने फिर से इस बात की पुष्टि की है कि

अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान रुस का इसमें जबर्दस्त हस्तक्षेप था।

जासूस के मुताबिक खुद रुस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन इसमें हस्तक्षेप कर रहे थे।

यह सारा खेल सूचना तकनीक के माध्यम से चल रहा था। साथ ही यह भी स्पष्ट हो गया है कि

फेसबुक के जरिए कैम्ब्रिज एनालिटीका पर लगे आरोप भी सही थे।

इस कंपनी ने फेसबुक की मदद से अमेरिकी मतदाताओं की सोच को जबरन प्रभावित करने के लिए

कई साजिशों को अंजाम दिया था।

पहले भी यह आरोप लगते रहे थे लेकिन अब इस बात की गंभीरता इसलिए

अधिक है क्योंकि अमेरिकी अधिकारियों ने उक्त जासूस को कुशलतापूर्वक

रुस से बाहर निकालन में कामयाबी हासिल की है।

बीच के दौर में सीआईए के अधिकारी इस बात से डरे हुए थे कि

जिस तरीके से ट्रंप इन संवेदनशील विषयों में हस्तक्षेप करते हैं,

उससे कहीं उस जासूस की पहचान ही सार्वजनिक न हो जाए।

दरअसल सीआईए अधिकारियों का यह भय इसलिए भी था क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति होने के नाते डोनाल्ड ट्रंप इन दस्तावेजों को देख सकते थे।

अमेरिका में इस बात की पुष्टि होने के बाद अमेरिका का भारतीय समुदाय फिर से भारतीय चुनाव के बारे में नये सिरे से विचार करने लगा है।

ऐसा इसलिए भी है क्योंकि इन्हीं दो कंपनियों पर भारत के संसदीय चुनाव में भी हस्तक्षेप करने का आरोप लगा था।

जिसके बाद एक एक कर कई खुलासे हो चुके थे।

यहां अमेरिका में इस किस्म की कार्रवाइयों का जोरदार विरोध होता है क्योंकि जनता इन्हें लोकतंत्र के खिलाफ मानती है।

अंदरखाने से छनकर आने वाली सूचनाओं के मुताबिक इस जासूस की पहुंच रुस के राष्ट्रपति पुतिन तक थी।

वहां रहते हुए उसने पुतिन के पास मौजूद कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों की फोटो भी अमेरिकी अधिकारियों को उपलब्ध करायी थी।

चुनाव के बाद ट्रंप की हरकतों से डरे हुए अमेरिकी अधिकारियों ने सुरक्षित तौर पर उस जासूस को वहां से निकल आने की सलाह दी थी।

उस वक्त उस व्यक्ति ने रुस छोड़ने से इंकार कर दिया था और पारिवारिक समस्या का हवाला दिया था।

उसके इंकार से अमेरिकी अधिकारियों को यह संदेह लगा था कि शायद बदले माहौल पर वह अब रुस के लिए भी जासूसी करने लगा है।

लेकिन एक वर्ष बाद खुद ही उसने बाहर ले जाने की गुहार लगायी। तब जाकर उसे सुरक्षित वहां से निकाल लिया गया है।

फिलहाल वह किसी गुप्त ठिकाने पर हैं और अन्य देश में होने की वजह से अमेरिकी अधिकारी उसके पकड़े जाने के भय से अब मुक्त हैं।

उसने रुस से सुरक्षित रुप से बाहर निकल आने के बाद अमेरिकी अधिकारियों को फिर से बताया है कि

पिछले राष्ट्रपति चुनाव के दौरान खुद रुस के राष्ट्रपति पुतिन इसमें दखल दे रहे थे।

वह चाहते थे कि हर कीमत पर डोनाल्ड ट्रंप चुनाव जीतें और उसकी विरोधी यानी हिलेरी क्लींटन चुनाव हार जाएं।

अब अमेरिका में अगला चुनाव करीब आता जा रहा है।

इस वजह से भी रुस में अमेरिका के लिए काम करने वाले इस जासूस के बयान को फिर से गंभीरता से लिया जा रहा है।

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