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संक्रमण की अवधि घटी है पर पूरे देश में इसका खतरा कायम है




संक्रमण की अवधि कोरोना की इस तीसरी लहर में कम हो गयी है। इसके बाद भी देश में कोरोना संक्रमण की जो वर्तमान स्थिति है, वह अच्छी नहीं है। दरअसल कुछ दिन पहले, यूएस सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल ऐंड प्रिवेंशन ने कोविड-19 से संक्रमित लोगों के आइसोलेशन की अवधि 10 दिन से कम कर पांच दिन कर दी।




भारत में भी आइसोलेशन को लेकर संशोधित दिशानिर्देश जारी किए गए हैं और होम आइसोलेशन में रह रहे लोगों को निर्देश दिए गए हैं कि जांच संक्रमित आने के बाद कम से कम एक हफ्ते तक इंतजार करें और लगातार तीन दिन तक बुखार खत्म होने के बाद ही होम आइसोलेशन खत्म करें।

कोरोनावायरस के नए स्वरूप ओमीक्रोन से संक्रमित होने के बाद ठीक होने में आमतौर पर सात दिन का समय लगता है। हालांकि बिज़नेस स्टैंडर्ड ने देश भर का जायजा लिया जिसके मुताबिक ओमीक्रोन संक्रमण ठीक होने में पांच दिन लगता है।

यह निश्चित तौर पर राहत की बात है क्योंकि कोरोना की दूसरी लहर में पूरे देश का क्या हाल हुआ था, वह सभी ने देखा और झेला है। कोरोना वायरस के वैश्विक महामारी बनने के बाद पिछले वर्ष के अप्रैल माह में मरीज को ठीक होने में नौ दिन लगते थे।

पहली लहर के चरण के दौरान देश में 10 दिन का रिकवरी समय लग रहा था। अब अधिकांश मरीजो की परेशानी तीन दिन में कम हो रही है। लेकिन संक्रमण के तेजी से फैलने के बीच यह समझा जाना चाहिए कि लगातार वायरस अपना स्वरुप भी बदल रहा है।

संक्रमण की अवधि कम होने के बाद स्वरुप भी बदल रहा है

इसलिए कभी भी इस बढ़ते संक्रमण के बीच कोई नया वेरियंट अगर आ गया तो दूसरे किस्म की परेशानी खड़ी हो सकती है। गत पांच जनवरी को देश में संक्रमण के 285,401 सक्रिय मामले थे और पांच दिन के भीतर करीब 229,122 लोगों की रिकवरी हो गई।

चुनावी राज्य उत्तर प्रदेश में कोरोना के मामलों में हर रोज इजाफा हो रहा है। बीते दस दिन में कोरोना के नए मामलों की तादाद 20 गुने से भी ज्यादा हो चुकी है। दिल्ली में जल्द कोरोना मामलों के बढऩे की रफ्तार थमने की उम्मीद जताई जा रही है। संक्रमण दर में ठहराव अगले एक दो दिन में दिल्ली में कोरोना का पीक आने की ओर संकेत दे रहा है।




इसके बाद कोरोना मामले घटने लगेंगे जिससे कोरोना नियंत्रित करने के लिए लगे प्रतिबंधों में भी ढील मिलने की संभावना है। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने बताया कि दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से 20 हजार के करीब मामले रोजाना आ रहे हैं और संक्रमण दर लगातार 25 फीसदी के आस-पास बनी हुई है।

इसके अलावा अस्पतालों में भर्ती होने वाले लोगों की संख्या दर भी अभी बढ़ती हुई नजर नहीं आ रही है, जो कि एक अच्छा संकेत है। कोरोना के लिए मौजूदा कुल 14,802 आरक्षित बेड में से अभी केवल 2,363 बेड पर ही मरीज हैं।

जाहिर है 84 फीसदी बेड अभी भी उपलब्ध हैं। जरूरत पड़ने पर दिल्ली सरकार इन्हें बढ़ाने के लिए पूरी तरह से तैयार है। जैन कहते हैं कि पिछले कुछ दिनों से संक्रमण दर 25 फीसदी के आस-पास बनी हुई है।

नये वायरस वेरियंट का खतरा बना हुआ है

यह एक संकेत हो सकता है कि कोरोना का पीक अब आ चुका है। इसका मतलब यह नहीं है कि अभी कोरोना खत्म हो गया है। कोरोना अभी चरम पर है। मैं उम्मीद करता हूं कि कोरोना का यह पीक जल्द से जल्द आकर खत्म हो, ताकि दिल्ली और देश में कोरोना के मामले कम हों।

अगर 2-3 दिनों में मामले कम होने लगते हैं तो प्रतिबंधों में ढील देने पर भी विचार किया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि अस्पतालों में आईसीयू बेड पर भर्ती मरीजों में बहुत कम ऐसे मामले हैं जो सिर्फ कोरोना के कारण आईसीयू में भर्ती हुए हों।

इसलिए आंकड़े, अस्पतालों की स्थिति और मरीजों के ठीक होने के आधार पर संक्रमण की अवधि का कम होना अच्छी बात है। लेकिन इस बात पर भी ध्यान देना होगा कि अगर लोगों के बीच संक्रमण इसी तेजी से फैलता गया तो भारत की जनसंख्या ही इसमें एक बहुत बड़ी चुनौती बन सकती है।

इसलिए हर किसी को फिलहाल कोरोना से बचाव के जो गाइड लाइन तय किये गये हैं, उनका अक्षरशः पालन करना चाहिए। विशेषज्ञ भी बार बार यह बता रहे हैं कि भारत के लिए कोरोना महामारी में उसकी सबसे बड़ी चुनौती जनसंख्या ही है। देश में इस जनसंख्या की अधिकता की वजह से ही संक्रमण की अवधि कम होने के बाद भी स्थिति को बहुत बेहतर तो कतई नहीं माना जा सकता है।



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