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भारत का चुनौतियों से जीतने का बहुत पुराना इतिहास: मोदी

  • सैकड़ों वर्षों के हमले से भी कुछ नहीं बिगड़ा हमारा

  • साल में एक या पचास चुनौती आये सामना करना है

  • वीर जवानों की शहादत पर पूरा देश नतमस्तक है

  • भारत की पहचान मुश्किल घड़ी में ही हुआ करती है

नयी दिल्ली : भारत का चुनौतियों से जीतने का इतिहास काफी पुराना है। अपने मासिक

संबोधन मन की बात में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि भारत का इतिहास

आपदाओं और चुनौतियों पर जीत हासिल कर और ज्यादा निखरकर निकलने का रहा है।

श्री मोदी ने कहा, स्वाभाविक है कि जो वैश्विक महामारी आयी, मानव जाति पर जो संकट

आया, उस पर, हमारी बातचीत कुछ ज्यादा ही रही, लेकिन इन दिनों मैं देख रहा हूं,

लगातार लोगों में, एक विषय पर चर्चा हो रही है, कि, आखिर ये साल कब बीतेगा। कोई

किसी को फोन भी कर रहा है तो बातचीत इसी विषय से शुरू हो रही है कि ये साल जल्दी

क्यों नहीं बीत रहा है। कोई लिख रहा है, दोस्तों से बात कर रहा है, कह रहा है, कि, ये साल

अच्छा नहीं है, कोई कह रहा है 2020 शुभ नहीं है। बस, लोग यही चाहते हैं कि किसी भी

तरह से ये साल जल्द-से-जल्द बीत जाए। उन्होंने कहा कि 6-7 महीना पहले हम कहां

जानते थे कि कोरोना जैसा संकट आएगा और इसके खिलाफ ये लड़ाई इतनी लम्बी चलेगी

। ये संकट तो बना ही हुआ है, ऊपर से, देश में नित नयी चुनौतियाँ सामने आती जा रही हैं।

अभी, कुछ दिन पहले, देश के पूर्वी छोर पर अम्फान तूफान आया, तो, पश्चिमी छोर पर

निसर्ग तूफान आया। कई राज्यों में हमारे किसान भाई-बहन टिड्डी दल के हमले से

परेशान हैं, और कुछ नहीं, तो, देश के कई हिस्सों में छोटे-छोटे भूकंप रुकने का ही नाम

नहीं ले रहे, और इन सबके बीच, हमारे कुछ पड़ोसियों द्वारा जो हो रहा है, देश उन

चुनौतियों से भी निपट रहा है।

अभी देश एक साथ कई चुनौतियों से जूझ रहा है

वाकई, एक-साथ इतनी आपदाएं, इस स्तर की आपदाएं, बहुत कम ही देखने-सुनने को

मिलती हैं । हालत तो ये हो गयी है कि कोई छोटी घटना भी हो रही है, तो लोग उन्हें भी इन

चुनौतियों के साथ जोड़कर के देख रहे हैं । प्रधानमंत्री ने कहा कि मुश्किलें आती हैं, संकट

आते हैं, लेकिन सवाल यही है, कि, क्या इन आपदाओं की वजह से हमें साल 2020 को

खराब मान लेना चाहिए? क्या पहले के छह महीने जैसे बीते, उसकी वजह से, ये, मान

लेना कि पूरा साल ही ऐसा है, क्या ये सोचना सही है ? जी नहीं। बिल्कुल नहीं। एक साल में

एक चुनौती आए, या, पचास चुनौतियां आएं, नंबर कम-ज्यादा होने से, वो साल, खराब

नहीं हो जाता। भारत का इतिहास ही आपदाओं और चुनौतियों पर जीत हासिल कर, और

ज्यादा निखरकर निकलने का रहा है। सैकड़ों वर्षों तक अलग- अलग आक्रांताओं ने भारत

पर हमला किया, उसे संकटों में डाला, लोगों को लगता था कि भारत की संरचना ही नष्ट

हो जाएगी, भारत की संस्कृति ही समाप्त हो जाएगी, लेकिन इन संकटों से भारत और भी

भव्य होकर सामने आया। उन्होंने कहा कि भारत में भी, जहां, एक तरफ बड़े-बड़े संकट

आते गए, वहीं सभी बाधाओं को दूर करते हुए अनेकों-अनेक सृजन भी हुए।

भारत का चुनौतियों का इतिहास भी नये इतिहास गढ़ता है

नए साहित्य रचे गए, नए अनुसंधान हुए, नए सिद्धांत गढ़े गए यानी, संकट के दौरान भी,

हर क्षेत्र में, सृजन की प्रक्रिया जारी रही और हमारी संस्कृति पुष्पित-पल्लवित होती रही,

देश आगे बढ़ता ही रहा। भारत ने हमेशा, संकटों को, सफलता की सीढियों में परिवर्तित

किया है। इसी भावना के साथ, हमें, आज भी, इन सारे संकटों के बीच आगे बढ़ते ही रहना

है। आप भी इसी विचार से आगे बढ़ेंगे, 130 करोड़ देशवासी आगे बढ़ेंगे, तो, यही साल, देश

के लिये नए कीर्तिमान बनाने वाला साल साबित होगा। इसी साल में, देश, नये लक्ष्य प्राप्त

करेगा, नयी उड़ान भरेगा, नयी ऊँचाइयों को छुएगा । मुझे 130 करोड़ देशवासियों की

शक्ति पर , आप सब पर, इस देश की महान परम्परा पर पूरा विश्वास है। श्री मोदी ने कहा

कि संकट चाहे जितना भी बड़ा हो, भारत के संस्कार, निस्वार्थ भाव से सेवा की प्रेरणा देते

हैं। भारत ने जिस तरह मुश्किल समय में दुनिया की मदद की, उसने आज, शांति और

विकास में भारत की भूमिका को और मज़बूत किया है। दुनिया ने इस दौरान भारत की

विश्व बंधुत्व की भावना को भी महसूस किया है, और इसके साथ ही, दुनिया ने अपनी

संप्रभुता और सीमाओं की रक्षा करने के लिए भारत की ताकत और भारत की प्रतिबद्धता

को भी देखा है। लद्दाख में भारत की भूमि पर, आंख उठाकर देखने वालों को, करारा जवाब

मिला है। भारत, मित्रता निभाना जानता है, तो, आंख-में-आँख डालकर देखना और उचित

जवाब देना भी जानता है। हमारे वीर सैनिकों ने दिखा दिया है, कि, वो, कभी भी माँ भारती

के गौरव पर आँच नहीं आने देंगे।

हमने दिखा दिया है कि अब भारत पहले जैसा कमजोर नहीं रहा

प्रधानमंत्री ने कहा कि लद्दाख में हमारे जो वीर जवान शहीद हुए हैं, उनके शौर्य को पूरा देश

नमन कर रहा है, श्रद्धांजलि दे रहा है। पूरा देश उनका कृतज्ञ है, उनके सामने नत-मस्तक

है । इन साथियों के परिवारों की तरह ही, हर भारतीय, इन्हें खोने का दर्द भी अनुभव कर

रहा है । अपने वीर-सपूतों के बलिदान पर, उनके परिजनों में गर्व की जो भावना है, देश के

लिए जो ज़ज्बा है – यही तो देश की ताकत है। उन्होंने कहा, आपने देखा होगा, जिनके बेटे

शहीद हुए, वो माता-पिता, अपने दूसरे बेटों को भी, घर के दूसरे बच्चों को भी, सेना में

भेजने की बात कर रहे हैं। बिहार के रहने वाले शहीद कुंदन कुमार के पिताजी के शब्द तो

कानों में गूंज रहे हैं । वह कह रहे थे, अपने पोतों को भी, देश की रक्षा के लिए, सेना में

भेजूंगा। यही हौसला हर शहीद के परिवार का है । वास्तव में, इन परिजनों का त्याग

पूजनीय है। भारत-माता की रक्षा के जिस संकल्प से हमारे जवानों ने बलिदान दिया है,

उसी संकल्प को हमें भी जीवन का ध्येय बनाना है, हर देशवासी को बनाना है । हमारा हर

प्रयास इसी दिशा में होना चाहिए, जिससे, सीमाओं की रक्षा के लिए देश की ताकत बढ़े,

देश और अधिक सक्षम बने, देश आत्मनिर्भर बने – यही हमारे शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि

भी होगी।


 

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