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देश की अर्थव्यवस्था की हालत मार्च तक सुधरने की उम्मीद

देश की अर्थव्यवस्था की गाड़ी फिलहाल तो पटरी से उतर चुकी है। लेकिन अच्छी बात यह

है कि देश में इस बार अनाज की पैदावार बहुत अच्छी होने की उम्मीद है। इसलिए तमाम

प्रतिकूल परिस्थितियों में देश के होने के बाद भी स्थिति में सुधार की पूरी उम्मीद है। इस

बीच अच्छी खबर यह भी आ सकती है कि जनवरी माह तक शायद कोरोना का वैक्सिन भी

दुनिया को उपलब्ध हो जाएगा। वैस इस बीच वित्त मंत्रालय ने कहा है कि अर्थव्यवस्था

तेजी से गति पकड़ रही है और चालू वित्त वर्ष के अंत तक यह कोविड-19 से पूर्व के स्तर

पर पहुंच सकती है। हालांकि मंत्रालय ने यह कहने से भी गुरेज नहीं किया कि महामारी की

दूसरी लहर सारे किए कराए पर पानी फेर सकती है। मंत्रालय के अनुसार लोग अब

कोविड-19 से बचाव को लेकर पहले जितने गंभीर नहीं लग रहे हैं। यह एक खतरनाक

स्थिति है जो पूरे आकलन का गणित बिगाड़ भी सकती है। इसके प्रति लोगों को नये सिरे

से जागरुक और सतर्क करने की आवश्यकता है वरना दिल्ली जैसे हालत दूसरे शहरों में

भी हो सकते हैं। वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए) ने अक्टूबर की

अपनी मासिक समीक्षा में कहा है कि उपभोग पर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से

मिलने वाले सकारात्मक संकेत और अगले वर्ष कारोबारी उत्साह बेहतर रहने के अनुमानों

से आर्थिक सुधार में और तेजी आने की उम्मीद काफी बढ़ गई है। रिपोर्ट में कहा गया कि

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के अनुमान भी इसी तरफ इशारा कर रहे हैं।

देश की अर्थव्यवस्था का आईएमएफ अनुमान भी ऐसा ही

इस वैश्विक संस्था ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए भारत के वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद

(जीडीपी) की वृद्धि 8.8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, जो दुनिया के अन्य देशों की

तुलना में अधिक कही जा सकती है। मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में महामारी की दूसरी लहर

को लेकर आगाह किया है। रिपोर्ट के अनुसार कोविड के सक्रिय मामले कम होने और मृत्यु

दर में कमी से हालात तो सुधरे हैं, लेकिन यूरोपीय देशों और अमेरिका में कोविड-19

संक्रमण के मामले फिर बढऩे से चिंताएं पैदा हो गई हैं। डीईए ने अपनी रिपोर्ट में कहा है

कि अगर संक्रमण से बचने में पूरी मुस्तैदी नहीं दिखाई गई तो परिस्थितियां फिर बिगड़

सकती हैं। रिपोर्ट में आगे आगे कहा गया है कि ज्यादातर लोग अब घरों से बाहर निकलने

लगे हैं और ऐसे में सावधानी बरतना ही एकमात्र रास्ता है। रिपोर्ट के अनुसार सावधानी

बरतते हुए ही आर्थिक गतिविधियां जारी रखी जा सकती हैं। वित्त मंत्रालय ने उम्मीद

जताई कि त्योहार के दौरान देश की आर्थिक वृद्धि को गति मिलेगी। मंत्रालय के अनुसार

आने वाले महीनों में खपत और बढऩे की संभावना है, जिससे अर्थव्यवस्था सामान्य होने

में मदद मिलेगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि अक्टूबर में अर्थव्यवस्था की सेहत का अंदाजा

देने वाले सभी संकेतकों में सुधार हुआ है। इसमें कहा गया है, ‘उदाहरण के लिए खरीफ

फसलों की अच्छी पैदावार, बिजली उपभोग में तेजी सहित वाहनों की बिक्री सभी से सुधार

के संकेत मिल रहे हैं।

फिलहाल को कोरोना पर होने वाले खर्च को कम करना भी जरूरी

चालू वित्त वर्ष में देश की वृद्धि दर अनुमान से बेहतर रहने से संकेत मिल रहे हैं, जिससे

दूसरे जरूरी विषयों पर ध्यान देने के लिए सरकार के पास विकल्प बढ़ जाएंगे। लिहाजा

कोरोना से बचाव के लिए जनता को सतर्क करते हुए किसी भी विषम परिस्थिति को

टालने का उपाय ही देश को फिर से विकास की पटरी पर ला सकता है।

जब तक कोरोना जैसे संकट की वजह से राष्ट्रीय आमदनी का व्यय नहीं रोका जाएगा, हम

विकास योजनाओं के लिए अतिरिक्त धन का प्रबंध होना कठिन है। यह भी बेहतर संकेत

है कि जीएसटी संग्रह में भी क्रमशः बढ़ोत्तरी होने लगी है। इससे कमसे कम सरकार के

खजाने में धन की उपलब्धता भी धीरे धीरे बढ़ती जाएगी। दूसरी तरफ खेतों से फसल जब

मंडियों तक पहुंचेगी तो वहां से भी ग्रामीण इलाकों में नकदी का प्रवाह बढ़ेगा। इससे एक

साथ दोनों ही मोर्चों पर आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। लेकिन इन दोनों आकलनों का

सच साबित होना इस बात पर निर्भर है कि हम कोरोना से बचाव के प्रावधानों के प्रति

असावधान न रहें और कोरोना के ग्राफ को फिर से ऊपर जाने तक रोक लगें। यह अभ्यास

तब तक जारी रहना चाहिए जब तक कि देश में कोरोना वैक्सिन की उपलब्धता सुनिश्चित

ना हो। वैक्सिन के आने के बाद टीकाकरण के लिए भारत के पास तुलनात्मक तौर पर

संतोषजनक संसाधन हैं। इसलिए वैक्सिन लगने का पूरा इंतजाम होने तक हमारी पूरी

शक्ति इस पर लगनी चाहिए को दोबारा से संक्रमण को फन काढ़ने का कोई अवसर हम

अपनी गलतियों की वजह से नहीं दें।

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