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देश के 91 जिलों में फिर से बढ़ रहा है संक्रमण खतरे की बात है

  • संक्रमित जिलों में टीकाकरण तेज हो

  • सरकारी और निजी कंपनियों को जिम्मेदारी मिले

  • टीकाकरण को लेकर फैले भ्रम को दूर करना जरूरी

  • ऐसे इलाकों मे एक डोज का टीका ज्यादा फायदा देगा

डॉ एच डी शरण

रांचीः देश के 91 जिलों में फिर से कोरोना संक्रमण बढ़ रहा

है। इसकी खास वजह लोगों की लापरवाही ही है। दरअसल

टीकाकरण का काम प्रारंभ होने के बाद से ही कोरोना जांच

की गति भी धीमी हो गयी थी। लोगों ने अपनी परेशानियों को नजरअंदाज कर उन्हीं

गलतियों को दोहराया है, जिसके लिए मनाही है। नतीजा है कि सब कुछ सुधरने की तरफ

बढ़ने के बाद अचानक से फिर से हालात बिगड़ रहे हैं। वर्तमान में जिन 91 जिलों से

कोरोना संक्रमण के बढ़ने का आंकड़े मिले हैं, उनमें से 36 अकेले महाराष्ट्र से हैं। इसके

अलावा कर्नाटक के 16 तथा पंजाब, हरियाणा, गुजरात, बिहार, बंगाल और छत्तीसगढ़ के

चार चार एवं केरल के दो जिला हैं। दूसरी तरफ यह बात भी सामने आ रही है कि

टीकाकरण को लेकर आम लोगों में कहीं न कहीं कोई दुविधा है। इसी वजह से टीकाकरण

केंद्रों तक लोग निर्धारित समय पर नहीं पहुंच रहे हैं। नतीजा है कि कोरोना टीकाकरण के

डोज नष्ट हो रहे हैं। इस टीकाकरण के लिए खास प्रावधान यह भी है कि एक बार शीशी

खोले जाने के चार घंटे के भीतर उन्हें खर्च करना यानी टीका लगा देना होता है। ऐसा नहीं

हो पा रहा है। लेकिन फिलहाल तक इसके किसी विकल्प की व्यवस्था नहीं की गयी है।

जिन जिलों में कोरोना संक्रमण बढ़ने की सूचना है, वहां कमसे कम फिलहाल टीकाकरण

का पहला दौर जल्द पूरा करने का काम किया जा सकता है। एक बार कोविशील्ड का टीका

लगने के बाद व्यक्ति को अगला डोस तो 12 सप्ताह के बाद ही लगना चाहिए।

देश के इन 91 जिलों के लिए अलग टीकाकरण नीति बने

फिलहाल सरकार की नीति है कि कोविशील्ड का दूसरा डोज चार सप्ताह बाद दिया जा रहा

है। हालांकि विभिन्न वैज्ञानिक शोध से यह साबित हो गया है कि कोविशील्ड सबसे

अधिक कारगर तब होता है जब दूसरा डोस बारह सप्ताह बाद दिया जाये। इसके बावजूद

भारतीय सरकार ने नीति को बदलने की कोई पहल नहीं की है। अगर जल्द इस नीति को

तुरन्त बदला जाये तो इन जिलों में टीकाकरण के लिये अतिरिक्त वैक्सीन भी उपलब्ध हो

सकेगा और वैक्सीन ज्यादा कारगर भी सिद्ध होगा।

सरकारी और निजी क्षेत्र की कंपनियों ने भी देश के इस टीकाकरण अभियान में खुद को

जोड़ने की इच्छा जतायी है। ऐसी स्थिति में ऐसे सभी संगठनों को एक एक जिले की

जिम्मेदारी भी सौंपी जा सकती है। हर ऐसे संगठन के पास टीकाकरण संचालित करने की

कितनी क्षमता है, उसके आधार पर उन्हें इलाका बांटा जा सकता है। खास तौर पर ऐसे

मामलों में उन छात्रावासों पर भी अधिक ध्यान देने की जरूरत है, जहां से संक्रमण औसत

से अधिक गति से फैलने के अनेक मामले प्रकाश में आये हैं।

मेरी समझ से भारत में जॉनसन एंड जॉनसन की एक डोज वाली वैक्सीन पर अधिक

ध्यान दिया जाना चाहिए। भारत जैसी अधिक आबादी वाले देश में एक डोज का वैक्सिन

अधिक कारगर साबित हो सकता है। यूएस में यह 72 प्रतिशत और यूरोप में 66 प्रतिशत

कारगर पाया गया है। इस टीके की खास विशेषता यह है कि यह मरीज के अस्पताल में

भर्ती होने तथा मौत के खतरे को टाल देता है। इस वैक्सिन के तीसरे चरण के क्लीनिकल

ट्रायल में यह पता चल चुका है। इससे अस्पतालों पर पडऩे वाले कोरोना का दबाव कम

होगा। इससे रोग के फैलने को रोका जा सकेगा जबकि अन्य वैक्सिनों का इस्तेमाल देश

के अन्य भागों मे यथावत किया जा सकेगा।

समय की मांग है कि कम समय में अधिक वैक्सिन लगे

फिलहाल , समय की यही मांग है कि हम अधिकाधिक लोगों को कमसे कम समय में

वैक्सिन लगा दें। इसके लिए हमें लोगों के बीच फैली भ्रांतियों को दूर करना होगा। इसी

वजह से लोग टीकाकरण के लिए निर्धारित केंद्रों तक नहीं पहुंच रहे हैं जबकि स्थिति यह

होनी चाहिए कि लोग अपनी बारी आने की पूरी तैयारी पहले से कर लें। एक स्वास्थ्यकर्मी

होने की वजह से टीकाकरण का अपना अनुभव भी बता देना आवश्यक है। चूंकि पेशे से

डाक्टर हूं तो मुझे भी यह वैक्सिन लगायी गयी है। यह अन्य टीकों के जैसा ही अनुभव देता

है। टीका लगने के बाद कुछ देर तक हाथ भारी लगता है। यह भारीपन भी कुछ घंटों में खुद

ब खुद चला जाता है। लेकिन अपने टीकाकरण के दौरान टीकाकरण केंद्र में कम लोगों की

मौजूदगी देखकर यह बात समझ में आयी कि लोगों को टीकाकरण के लिए अधिक

जागरुक किये जाने की सख्त आवश्यकता है। अपने अनुभव से बता सकता हूं कि ऐसे

टीकाकरण केंद्रों का इंतजाम भी पर्याप्त हैं। जहां मैंने टीका लिया, वहां पर एक प्रतीक्षालय,

एक टीकाकरण का कमरा, एक पर्यवेक्षण का कमरा और तीन सेमी आइसीयू बेड लगे हुए

थे। यह ऐसे किसी भी टीकाकरण अभियान के लिए पर्याप्त से बेहतर ही हैं। हां निजता

यानी प्राइवेसी का ख्याल अगर रखना हो तो कुछ और इंतजाम किये जा सकते हैं।

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