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भारत का शेयर बाजार धड़ाम से फिर गिरा




भारत का शेयर बाजार लगातार काफी उतार चढ़ाव के दौर से गुजर रहा है। जब आम निवेशकों को इस भारत का शेयर बाजार उत्साहित करता है, उसके ठीक बाद अचानक से इसमें गिरावट आती है।




इसके बीच निवेशकों का कितना करोड़ डूब जाता है, इसका वास्तविक मूल्यांकन तो कभी नहीं हो पाता लेकिन यह स्पष्ट है कि इससे अधिक आर्थिक नुकसान सिर्फ उनलोगों को होता है, जो शेयर बाजार के छोटे निवेशक होते हैं।

वैसे भारत का शेयर बाजार का यह हाल कई अन्य कारणों से भी हो सकता है। मुद्रास्फीति, शेयरों के मूल्यांकन और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा नीतिगत रुख सामान्य किए जाने की चिंता के बीच बेंचमार्क सेंसेक्स में आज छह महीने में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई।

विदेशी ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टैनली द्वारा घरेलू बाजार के प्रति सतर्क रहने के बयान से भी निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है। सेंसेक्स 1,158 अंक लुढ़ककर 59,984 पर बंद हुआ।

30 अप्रैल के बाद सेंसेक्स में आई यह सबसे बड़ी गिरावट है। 13 कारोबारी सत्र के बाद सेंसेक्स 60,000 अंक के नीचे आया है। निफ्टी 50 भी 353 अंक फिसलकर 17,857 पर बंद हुआ।

डेरिवेटिव अनुबंधों के निपटान के मद्देनजर बाजार में उतार-चढ़ाव का अंदाजा लगाने वाला इंडिया वीआईएक्स सूचकांक 6.5 फीसदी बढ़कर 17.9 पर पहुंच गया। अधिकतर एशियाई बाजारों में गिरावट देखी गई मगर भारत का बाजार सबसे ज्यादा टूटा।

बेंचमार्क सूचकांक में सबसे अधिक भारांश वाले बैंकिंग शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई। बैंक निफ्टी 3.34 फीसदी गिरा। आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और ऐक्सिस बैंक तकरीबन 4-4 फीसदी की गिरावट पर बंद हुए।

बाजार के विशेषज्ञों ने कहा कि बैंकिंग तंत्र से नकदी खींचने की आरबीआई की योजना से निवेशक घबरा गए, जिससे बैंकिंग शेयरों में बिकवाली हुई है।

भारत का शेयर बाजार अक्सर ऐसा आचरण करता है

केंद्रीय बैंक ने बुधवार को घोषणा की थी कि 50,000 करोड़ रुपये के 28 दिन के वेरिएबल रिवर्स रीपो (वीआरआर) की पहली नीलामी 2 नवंबर को होगी।

विश्लेषकों ने आरबीआई की घोषणा को बैंकिंग तंत्र से अतिरिक्त नकदी खींचने का उपाय माना है। अभी वीआरआर नीलामी 14 दिन के लिए होती है।

इस साल शेयर बाजार में जोरदार तेजी से शेयरों का मूल्यांकन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने से भी बाजार में चिंता है।




मॉर्गन स्टैनली ने भारतीय बाजार को ओवरवेट से घटाकर बराबर भारांश देने के साथ ही कहा कि भारतीय शेयरों का मूल्यांकन देखते हुए अगले 3 से 6 महीनों में प्रतिफल पर दबाव रह सकता है।

बेंचमार्क निफ्टी इस समय 12 महीने के आय के अनुमान से 24 गुना मूल्यांकन पर कारोबार कर रहा है जबकि इसका ऐतिहासिक औसत 17 गुना का है।

अवेंडस कैपिटल पब्लिक मार्केट्स अल्टरनेट स्ट्रैटजीज के मुख्य कार्याधिकारी एंड्रयू हॉलैंड ने कहा, उभरते बाजारों की तुलना में भारत का प्रदर्शन अप्रत्याशित रहा है।

ताजा गिरावट कुछ और नहीं बल्कि मुनाफावसूली है। फेडरल रिजर्व द्वारा नीतियों में सख्ती के बाद थोड़ी और बिकवाली और उतार-चढ़ाव देखा जा सकता है।

भारत के लिए जोखिम-पुरस्कार का अनुपात जोखिम की तरफ झुका हुआ है। विशेषज्ञों ने कहा कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा लगातार बिकवाली और नायिका तथा पेटीएम जैसे बड़े सार्वजनिक निर्गम से भी तरलता पर असर पड़ा है।

विदेशी निवेशकों ने 3,819 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की और घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 837 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। इन तकनीकी मुद्दों से अलग आम निवेशक की रूचि महज पूंजी निवेश और मुनाफा कमाने की होती है।

इस समस्या के सामाजिक ऑडिट की अब जरूरत है

हर चंद महीनों के बाद अचानक से ऐसा क्यों होता है, इसके बारे में वैसी कोई दलील नहीं कभी सामने नहीं आती है जो आम आदमी के दिमाग में आसानी से आता हो।

इसलिए अब इस बात पर सामाजिक बहस की आवश्यकता है कि भारत का शेयर बाजार आम और छोटे निवेशकों के लिए कितना फायदेमंद है। हर बार शेयर बाजार के घोटालों और अप्रत्याशित उलटफेर में पैसे गंवाने वाले कम पूंजी वाले लोगों के हितों की रक्षा के लिए अब तक सामाजिक स्तर पर कोई बहस नहीं चली है।

तकनीकी शब्दों के मकड़जाल में जो तथ्य परोसे जाते हैं, वे आम आदमी की समझ से बाहर के होते हैं। लेकिन दूसरी तरफ यह शंका भी बढ़ती चली जा रही है कि शेयर बाजार के कुछ बड़े खिलाड़ी ही अपने फायदे के लिए इसे उठाते और गिराते रहते हैं।

चूंकि ऐसी चर्चा अब सार्वजनिक हो चुकी है, इसलिए अब सार्वजनिक तौर पर इन तमाम मुद्दों पर गहन विचार की आवश्यकता है।

इसका असली मकसद छोटे निवेशकों के हितों की रक्षा के साथ साथ भारतीय शेयर बाजार का विश्वास ज्यादा मजबूत बनाना है। जिस अर्थव्यवस्था पर देश और सरकार का लक्ष्य है, उसे हासिल करने के लिए इस विश्वसनीयता का होना बहुत जरूरी है।



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