Press "Enter" to skip to content

भारतीय वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में बनायी नई धातु




  • काला सोना विज्ञान के क्षेत्र में कमाल करेगा

  • असली सोना से तैयार हुआ है यह नया धातु

  • आणविक संरचना में संशोधन से बदल गये कई गुण

  • सौर ऊर्जा सोखने से समुद्री पानी साफ करने में होगा इस्तेमाल


प्रतिनिधि

नयीदिल्लीः भारतीय वैज्ञानिकों ने दुनिया में अपनी ज्ञान का डंका फिर से बजाया है।

इस बार उनलोगों ने कई संशोधनों की मदद से एक नई धातु ही बना दी है।

यह धातु सिर्फ नाम का नहीं है बल्कि इसके कई गुण विज्ञान की दुनिया में क्रांतिकारी बदलाव ला सकते हैं।

मजेदार और रोचक बात यह है कि इस धातु का निर्माण भारतीय महिलाओं में लोकप्रिय बेशकीमती धातु सोना से किया गया है।

लेकिन विज्ञान के लिहाज से सोना में वह गुण नहीं हैं तो इस काला सोना में पाये गये हैं।

इस अद्धुत सफलता की वैज्ञानिक चर्चा इसलिए हो रही है क्योंकि इसका इस्तेमाल सौर ऊर्जा से लेकर समुद्र के खारे पानी को साफ पानी बनाने तक में किया जा सकता है।


इन्हें भी पढ़ें


भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा इस धातु के प्रारंभिक परीक्षण में यह पाया गया है कि यह रोशनी के अलावा कार्बन डाईऑक्साइड भी सोख सकता है।

प्रचलित सोने में ऐसे कोई गुण नहीं होते बल्कि वह सिर्फ आभूषणों और कंप्यूटर सहित कुछ वैज्ञानिक उपकरणों को तैयार करने के काम ही आता है।

इस काला सोना के इन नये गुणों की वजह से ही दुनिया भर के वैज्ञानिकों का ध्यान भारतीय वैज्ञानिकों की इस उपलब्धि की तरफ गया है।

मुंबई स्थित टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च के वैज्ञानिकों ने यह प्रयोग सफल कर दिखाया है।

इसके बारे में आम लोगो की समझ के लिए ऐसा परिभाषित किया गया है

ताकि प्रचलित सोना से यह काला सोना कैसे बना, यह लोगों की समझ में आ सके।

वैज्ञानिकों ने बताया है कि दरअसल उनलोगों ने बड़ी सावधानी से सोने के आणविक कणों को एक क्रम से आकार के मुताबिक सजाया है।

भारतीय वैज्ञानिकों ने सोना के आणविक कणों की दूरी में भी सुधार किया

इसके साथ ही उनके बीच की दूरी को ठीक किया है।

इस बदलाव की वजह से यह काला सोना तैयार किया गया है।

आम लोगों की समझ के लिए यह छोटा सा वाक्य भले हो लेकिन इसे करने में वैज्ञानिकों को काफी परिश्रम करना पड़ा है।

चूंकि बदलाव के बाद इसका रंग काला हो गया है इसी वजह से अब वैज्ञानिक इसे काला सोना के नाम से भी पुकार रहे हैं।

रॉयल सोसायटी ऑफ केमिस्ट्री में इसके बारे में एक शोध प्रबंध प्रकाशित किया गया है।

जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि इसे बनाने में किसी अन्य पदार्थ का सहयोग नहीं लिया गया है

अथवा सोना के नैनो पार्टिकल्स में तब्दीली भी नहीं की गयी है।

यानी यह अब भी अंदर से सोने के गुणों को भी रखे हुए हैं। सिर्फ उनकी संरचना बदली गयी है।

जिसकी वजह से पीला धातु अब काले रंग का बन गया है।

आणविक स्तर पर इन नैनो पार्टिकल्स ( अति सुक्ष्म कण) की संरचना और उनके बीच की दूरी को एक एक कर सुधारा गया है।

इससे यह नया धातु तैयार हो सका है।

इस शोध दल के नेता विवेक पोलशेट्टियार ने कहा है कि जांच में यह पाया गया है कि

यह काला सोना अपने ऊपर पड़ने वाले सामान्य रोशनी के अलावा इंफ्रा रेड किरणों तक को सोख सकता है।

दरअसल इसकी आंतरिक संरचना की वजह से इसके सुक्ष्म कण इस ऊर्जा को अपने अंदर समाहित करने में सक्षम हो गये हैं।

साथ ही परीक्षण में देखा गया है कि यह काला सोना सौर ऊर्जा की मदद से

कार्बन डाईऑक्साइड को मिथेन में बदलने में उत्प्रेरक (कैटेलिस्ट) की भूमिका अदा करता है।

काला सोना का पेड़ भी कई तरीके से एक साथ काम करेगा

वैज्ञानिक यह मान रहे हैं कि अगर इस काला सोना से तैयार पेड़ लगाये गये तो कमाल हो सकता है।

एक तरफ यह कृत्रिम तरीके से फोटो संश्लेषण (फोटो सिंथेसिस) कर सकता है।

यह वातावरण से कार्बन डाई ऑक्साइड सोखकर उसे मिथेन एवं अन्य उपयोगी रसायन में बदल सकता है।

दूसरी तरफ इससे तैयार ईंधन का उपयोग भी किया जा सकता है।

सौर ऊर्जा सोखने के इसके गुणों की जांच करने में सामान्य पानी के अंदर काला सोना डाल दिया गया था।

सूरज की रोशनी में इसके होने की जांच की गयी।

एक घंटे के बाद सामान्य बालू वाले जल का तापमान 38 डिग्री तक रहा

जबकि काला सोना वाले जल का तापमान बढ़कर 67 से 88 डिग्री तक पहुंच गया।

इस शोध से जुड़े वैज्ञानिक यह मान रहे हैं कि इसी गुण की वजह से

इसका इस्तेमाल समुद्र के खारे पानी को पीने के साफ पानी में बदलने में भी किया जा सकता है।

इस शोध दल में महक धीमान, आयन मैती, अनिर्वान दास, राजेश्वर बेलगामवर, भाग्यश्री चल्के के अलावा

सिओल राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के योनही ली, क्यूजोंग सिम और ज्वा मिन नाम शामिल थे।

इस शोध को आणविक ऊर्जा विभाग औऐर विज्ञान एवं तकनीकी विभाग ने प्रायोजित किया था।

शोध के परिणामों से सभी प्रसन्न हैं।

सभी को ऐसा लगता है कि इस शोध को अभी और आगे बढ़ाया जाना चाहिए

क्योंकि नई उपलब्धि के आधार पर इसके बहुआयामी इस्तेमाल को और बेहतर बनाया जा सके।


विज्ञान की कुछ रोचक खबरें यहां पढ़ें

कंप्यूटर के काम काज को तेज बनाने के प्रयास में एक कदम और

वैज्ञानिकों ने खोजा क्वांटम के आणविक कण दरअसल अमर हैं

चांद के अंधेरे छोर पर अचानक से चमकती है अजीब रोशनी

प्रकाश की गति से चल पाना क्या वाकई संभव होगा

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •   
  •  
  •