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शारदा पीठ में पूजा की अनुमति नहीं मिली भारतीय दंपती को

नई दिल्लीः शारदा पीठ पाक अधिकृत कश्मीर का एक विश्व प्रसिद्ध मंदिर है।

हांगकांग से भारतीय मूल के दंपती वहां पूजा करने आये थे।

लेकिन पाकिस्तान सरकार ने उन्हें वहां पूजा करने की अनुमति नहीं दी।

वहां पूजा की अनुमति नहीं मिलने की वजह से यह दंपती शारदा पीठ से

एक सौ किलोमीटर की दूरी पर नदी के किनारे इस मंदिर की पूजा तस्वीरों

पर पूजन के माध्यम से की।

पाक अधिकृत कश्मीर के नीलम घाटी में स्थित शारदा पीठ स्थित है।

शारदा पीठ में 237 ईसा पूर्व सम्राट अशोक के शासनकाल के दौरान स्थापित

की गई थी।

यहां पर करीब 5,000 साल पुराना मंदिर है।

यह भारत के सबसे पुराने मंदिरों में एक है, जो फिलहाल खंडहर हालत में है।

यह मंदिर कश्मीरी पंडितों के तीन प्रसिद्ध पवित्र स्थलों में से एक है।

उनके दो अन्य पवित्र स्थल अमरनाथ मंदिर और अनंतनाग का मांर्तड सूर्य मंदिर है।

बता दें कि कश्मीरी पंडितों से जुड़े संगठन कई सालों से यह कॉरिडोर खोलने की मांग कर रहे हैं।

बीच-बीच में पाकिस्तान और जम्मू-कश्मीर के नेता इस कॉरिडोर को खोलने की मांग करते रहते हैं

लेकिन ऐसा होने के लिए दोनों देशों के बीच शांति पूर्ण माहौल होना जरूरी है।

शारदा पीठ अन्यतम प्राचीन मंदिरों में एक है

हांगकांग से गये भारतीय मूल के दंपती पीटी वेंकटरमण और सुजाता को पीठ से 100 किमी दूर तस्वीरों की पूजा करने की अनुमति जरूर प्रदान कर दी गयी।

एक वीडियो में वेंकटरमण ने कहा, हम लोग 30 सितंबर को माता शारदा देवी के दर्शन के लिए मुजफ्फराबाद पहुंचे थे।

हमने अधिकारियों से दर्शन के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र देने का अनुरोध किया था, लेकिन हमें इसकी अनुमति नहीं दी गई।

गुलाम कश्मीर में इस तरह की पूजा 72 साल बाद हुई है।

दंपती वैध वीजा पर गुलाम कश्मीर के नीलम घाटी आया था।

इस दौरान दो स्थानीय निवासियों ने दंपती की मदद की।

दंपति को पीओके जाने के लिए एनओसी की जरूरत थी।

दंपति ने यात्रा दस्तावेजों के साथ मुजफ्फराबाद में सरकार को दलील दी कि वह हांगकांग निवासी हैं और वहां से आए हैं।

दस्तावेजों की पुष्टि होने के बाद पीओके के पीएम ने दखल दिया और दंपति को एनओसी जारी हुई।

वेंकटरमण ने कहा कि वे लोग मंदिर से 100 किमी दूर शारदा माता और स्वामी नंदलाल जी जोग की तस्वीर अपने साथ ले गए और किशनगंगा नदी के किनारे 4 अक्टूबर को पूजा की।

उन्होंने बताया कि नियंत्रण रेखा पर फायरिंग और तनाव के बाद उन्होंने शारदा पीठ में स्थापित करने के लिए फोटो वहां की सिविल सोसाइटी सदस्यों को दे दी।

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