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भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने प्रारंभ कर दी है मामले की जांच







  • इंटरनेट की दुनिया में भारत में विश्वास की जबर्दस्त कमी है 

  • एकाधिकार की वजह से उपभोक्ताओं को हो रहा है नुकसान

  • अनेक देश मिलकर भी भारतीय बाजार के मुकाबले छोटे 

  • भारत फिलहाल दुनिया का सबसे बड़ा बाजार

प्रतिनिधि

नयीदिल्लीः भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने इंटरनेट के बाजार पर एकाधिकार के मामलों की जांच प्रारंभ कर दी है।

दरअसल इंटरनेट एक ऐसा बाजार है जो पूरी दुनिया से कहीं बहुत अधिक गति से भारत में फैल रहा है।

भारत की भौगोलिक सीमा और जनसंख्या की वजह से यह एक ऐसा बाजार है,

जिसके मुकाबले अनेक देशों का सम्मिलित बाजार छोटा पड़ चुका है।

ऐसे में इंटरनेट की दुनिया में क्या एकाधिकार के लिए गलत हथकंडे आजमाये जा रहे हैं,

यह बड़ा सवाल इंटरनेट का नियमित इस्तेमाल करने वालों के मन में कौंधता ही रहता है।


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इसके कई उदाहरण भी हैं, जिनमें यह पाया गया है कि स्मार्ट फोन अथवा कंप्यूटर से

इंटरनेट का इस्तेमाल करने वालों के निजी विवरणों का इस्तेमाला सामान बेचने के लिए किया जाता है।

अनेक अवसरों पर बिना उपभोक्ता की सहमति से ही उनके विवरण किसी अन्य पक्षकार को बेच दिये जाते हैं।

इससे साइबर सुरक्षा का बड़ा सवाल खड़ा होता है।

जैसे जैसे भारतीय सीमा का यह बाजार विकसित हो रहा है,

इस किस्म के एकाधिकार का सवाल और मुखर हो रहा है।

तकनीकी पहलुओं को समझे बिना भी यह कोई भी मोबाइल उपभोक्ता खुद जांच सकता है कि

वह अगर कुछ खास किस्म के एप्स को अपने आप ही काम करने से रोक दे

तो उनका मोबाइल किस तरीके बेचैन होने लगता है।

उदाहरण के तौर पर आप गूगल को ही ले सकते हैं।

अगर आपने अपने स्मार्ट फोन पर गूगल की सेवा के अनेक ऑटोमैटिक अवसरों को बंद कर दिया

तो हर पल गूगल आपको इस परेशानी की याद दिलाता रहता है।

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने सभी पक्षकारों से जानकारी मांगी है

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने सभी पक्षकारों से इस बारे में जानकारी हासिल करने का काम प्रारंभ कर दिया है।

हमारे बाजार की वर्तमान स्थिति के मुताबिक इस प्रतिस्पर्धा में मुख्य तौर पर

गूगल और फेसबुक के अलावा सोशल मीडिया के अन्य प्लेटफॉर्म के अलावा

ऑनलाइन कारोबार करने वाली कंपनियां शामिल हैं।

दरअसल यह ई-कॉमर्स का क्षेत्र ही ग्राहकों को सिर्फ एक इस्तेमाल की वस्तु बना देता है,

जहां कंपनियों को दिली इच्छा यही होती है कि उसके यहां आने वाले कोई सामान खरीदे

और नियमित तौर पर आता रहे।

साथ ही इस सामान खरीद के माध्यम से वह उपभोक्ता की निजी जानकारी भी

दूसरी कंपनी तक बेचता है ताकि दूसरी कंपनियां उसके स्मार्ट फोन के जरिए

उस तक अपने उत्पादों को पहुंचा सकें।

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की पहल से पहले ही चरण में कमसे कम इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि

देश के वर्तमान कानून इस बाजारवाद को रोकने के लिए शायद पर्याप्त नहीं हैं।

लेकिन केंद्र सरकार के एक फैसले से इन तमाम बहुराष्ट्रीय कंपनियों की गतिविधियों पर एक लगाम लगा है।

केंद्र सरकार ने ऐसी कंपनियों के लिए यह अनिवार्य कर दिया है कि

भारत में कारोबार का विवरण उन्हें भारत में ही उपलब्ध रखना होगा

ताकि आवश्यकतानुसार उनकी जांच तुरंत की जा सके।

याद रखें कि अमेरिका और यूरोप दोनों ही इलाकों में खास तौर पर ऐसी कंपनियों के एकाधिकार के कारोबार की जांच चल रही है।

गूगल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को तो अमेरिकी सिनेट के समक्ष हाजिर तक होना पड़ा था।

आसन्न अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव में एक दावेदार एलिजाबेथ वारेन ने साफ तौर पर कहा है कि

इन तमाम कंपनियों के एकाधिकार से लोगों को बचाने के लिए

इन कंपनियों को ही कई हिस्सों में बांट दिया जाना चाहिए।

यूरोप में गूगल और फेसबुक पर लाखों डॉलर के अर्थदंड लगाये गये हैं।

सभी बड़ी कंपनियों पर कमोबेशी एक जैसे एकाधिकार वादी आचरण के आरोप




भारत में जांच प्रारंभ होने के बाद गूगल के खिलाफ फरवरी 2018 में दर्ज एक शिकायत को

गंभीर माना गया है।

दरअसल यह कंपनियां अपने वर्चस्व का बेजा इस्तेमाल करते हुए प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के

कारोबार को आगे बढ़ने से रोक रही हैं।

अब खास तौर पर एंड्रायड फोनों पर एकाधिकार की शिकायतें सामने आने लगी हैं।

इस बारे में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग यह जांच रही है कि

क्या गूगल भी अपने एंड्रायड फोन की वजह से अन्य कंपनियों के कारोबार को नुकसान तो नहीं पहुंचा रही है।

वैसे इस क्रम में इतनी बात समझ में आ जाती है कि इन कंपनियों का कारोबार कमसे कम

भारत में तो पूरी तरह पाक साफ नहीं है।

इसके अलावा उपभोक्ताओं के इंटरनेट के पैसे से अपने कारोबार का विस्तार करना भी

व्यापार के सामान्य सिद्धांतों के खिलाफ है।

लेकिन ऐसा हो रहा है। मोबाइल उपभोक्ता अपने इंटरनेट के लिए पैसे खर्च करता है

लेकिन इस पैसे के लाभ सेवा प्रदाता कंपनियों और इंटरनेट कंपनियां मुफ्त में उठाती हैं।

लिहाजा भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की जांच में इन मुद्दों पर भी विचार होने का वक्त आ गया है।


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