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भारतीय सेना ने हिमालय की काफी ऊंचाई पर किया युद्धाभ्यास

  • चीन का रेल लाइन निर्माण को तेज करने का आदेश

  • अरुणाचल में भारतीय सेना ने किया युद्धाभ्यास
  • 14 हजार फीट की ऊंचाई पर भारतीय फौज
  • शी जिनपिंग तक पहुंची है अभ्यास की खबर
  • सेना ने कहा अब चीन से कुछ नहीं बिगड़ेगा
भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: भारतीय सेना ने अरुणाचल प्रदेश में अपना सबसे बड़ा पहाड़ी युद्धाभ्यास

आयोजित किया है।पूर्वोत्तर राज्य में इस तरह की यह पहली कवायद है। वास्तविक

नियंत्रण रेखा (एलएसी) से 100 किलोमीटर दूर तीन युद्ध समूह (प्रत्येक में 4 हजार सैनिक

शामिल हैं) 14 हजार फुट की ऊंचाई पर हो रहे अभ्यास में भाग ले रहे हैं। 5 नवंबर को

समाप्त हो रहा यह युद्धाभ्यास तवांग के पास अरुणाचल प्रदेश में कई चरणों में किया जा

रहा है। भारतीय सेना ने अरुणाचल प्रदेश में यह युद्धाभ्यास ऐसे समय में किया जा रहा है

। जब चीन ने सिचुआन-तिब्बत रेलवे, छिनघाई-तिब्बत रेल परियोजन के बाद दूसरी

रेलवे लाइन तेजी से बनाया जा रहा है । भारतीय सेना के यह युद्धाभ्यास का रिपोर्ट मिलने

के बाद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रविवार को अधिकारियों को निर्देश दिया कि देश

के दक्षिण पश्चिम सिचुआन प्रांत को तिब्बत में लिंझी तक जोड़ने वाली 47.8 अरब डॉलर

की रेल परियोजना के निर्माण में तेजी लाएं। उन्होंने कहा कि यह सीमावर्ती क्षेत्रों में

स्थिरता की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। लिंझी अरुणाचल प्रदेश में भारतीय

सीमा के नजदीक है। पूरे सिचुआन-तिब्बत रेल परियोजना की लागत 47.8 अरब डॉलर है।

भारतीय सेना को अब चीन के रेल लाइन की चिंता नहीं

इस रेल प्रोजेक्ट के जरिये चीन लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश, दोनों के ही और करीब

पहुंचना चाह रहा है। भारतीय सेना के आधिकारिक स्रोत ने तेजपुर स्थित 4 कोर

मुख्यालय में आज कहा कि चीन इसे कई रेलवे लाइनों या हवाई अड्डों का निर्माण कर

सकता है। यह भारत के लिए कोई समस्या नहीं है। ऐसा इसलिए है क्योंकि भारत में

इसका कोई असर नहीं होगा। क्योंकि भारतीय सेना ने अभी भी सभी तैयारियां पूरी कर ली

हैं।

भारतीय सेना के आधिकारिक स्रोत ने कहा कि गृह मंत्रालय के साथ, सेना प्रमुख पूर्वोत्तर

विद्रोही समूहों के नेतृत्व पर कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है, जो चीन से मदद ले रहे हैं,

जो पिछले कई वर्षों से चीन के साथ सीमाओं का लाभ उठाकर कामयाब रहे हैं। ।

भारतीय सेना के लिए वास्तविक नियंत्रण रेखा तक पहुंचने में अब 15 – 40 मिनट से

ज़्यादा वक्त नहीं लगेगा। क्योंकि तारकोल से बनी हर मौसम में काम करने वाली सड़क

और हवाई अड्डों तैयार है। जिस सड़क पर कितना भी वज़न ले जाने पर भी कोई पाबंदी

नहीं है। बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइज़ेशन (BRO) के मुताबिक, नई तैयार हुई भीम बेस-डोकला

रोड को ‘युद्धस्तर पर पक्का किया गया। जिससे ‘दुश्मन की ओर से हमला किए जाने की

स्थिति के लिए देश की रक्षा तैयारी हो सके।


 

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