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भारतीय सेना प्रमुख ने चीन को दी भयंकर परिणाम की खुली चेतावनी

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  • चीन ने माना कि सीमा क्षेत्र में बनाए 150 आधुनिक गांव

  • 30 मई को मोदी के अध्यक्षता में सीमा सुरक्षा की बैठक

  • अरुणाचल सीमा के पास खतरे की घंटी

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी : भारतीय सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने पूर्वोत्तर क्षेत्र की दो दिवसीय




यात्रा के तहत आज दूसरा दिन अरुणाचल प्रदेश सेक्टर पहुंचे। यहां पर आर्मी चीफ ने चीन

के साथ सीमा पर भारत की ऑपरेशनल तैयारियों की समीक्षा की। आर्मी चीफ का ये दौरा

जिस समय हुआ है उसी दौरान चीन की एक और चालबाजी का पता चला है।अधिकारियों

ने बताया कि आर्मी चीफ नरवणे नागालैंड के दीमापुर में कोर मुख्यालय पहुंचे और

अरुणाचल प्रदेश की उत्तरी सीमाओं पर तैयारियों और पूर्वोत्तर में सुरक्षा स्थिति की

समीक्षा की। सेना ने बयान में कहा “सेना प्रमुख को स्पीयर कोर के जनरल ऑफिसर

कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल जॉनसन मैथ्यू और डिवीजन कमांडरों ने मौजूदा स्थिति और

उत्तरी सीमाओं पर तैयारी की जानकारी दी।भारतीय सेना और चीनी सेना के बीच पिछले

एक साल से ज्यादा समय से पूर्वी लद्दाख के कई क्षेत्रों में तनाव बना हुआ है। फरवरी में

दोनों सेनाओं के बीच सहमति के बाद पैंगोंग त्सो झील के पास डिसएंगेजमेंट को लेकर

प्रक्रिया पूरी हुई थी लेकिन उसके बाद से कोई प्रगति नहीं हुई है। सेनाध्यक्ष ने कहा था कि

भारतीय सेना लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश तक पूरे उत्तरी मोर्चे पर डी-एस्कलेशन होने तक

बढ़ी हुई उपस्थिति बनाए रखेगी। हालांकि, चीन भारत से लगी सीमा पर सिर्फ रोड बनाने

तक ही सीमित नहीं है बल्कि उसने आगे की तैयारियां शुरू कर दी हैं। चीन लगभग एक

दशक से तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र से लगी 6000 किमी लंबी सीमा पर आधुनिक गांव बसाने

के लिए पैसा लगा रहा है।

भारतीय सेना प्रमुख के दौरे के बीच ही चीन का खुलासा

चीन ने दावा किया है कि बॉर्डर पर स्थित उसके अधिकांश गांवों को हाईवे से जोड़ दिया

गया है और यहां पर मोबाइल सेवा भी उपलब्ध है। चीन के स्टेट काउंसिल इनफॉर्मेशल

ऑफिस ने तिब्बत स्वायत्तशासी क्षेत्र पर नीति को लेकर श्वेत पत्र जारी किया है जिसमें

कहा गया है कि 2020 के अंत तक सुदूर प्रांत के सीमा पर स्थिति कई गांवों को हाईवे से

जोड़ दिया गया था और इन क्षेत्रों में स्थित सभी गांव में मोबाइल संपर्क की सुविधा हासिल

हो चुकी है। जिस तिब्बत के बॉर्डर एरिया में इन गांवों को तैयार किया गया है उसकी




अधिकांश विवादित सीमा भारत से लगती है जबकि इसका छोटा हिस्सा नेपाल और

भूटान से भी लगता है। भारत के साथ ही भूटान के साथ भी चीन का सीमा विवाद है।आज

चीन को चेतावनी देते हुए भारतीय सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने कहा है कि अगर

चीन की सरकार भारत की जमीन पर कब्जा लेने के लिए कोई कदम उठाती है तो परिणाम

सख्त होगा। भारत किसी से डरने वाला नहीं है और जरूरत पड़ने पर भारत युद्ध के लिए

पूरी तरह तैयार है। सीमा पर तनाव के बीच सेना प्रमुख ने अरुणाचल में चीन की चुनौती

से निपटने के लिए तैयारियों का जायजा लिया।आज अरुणाचल में सेना के वरिष्ठ

अधिकारियों की बैठक को संबोधित करते हुए सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने कहा

कि भारत और चीन के बीच जो भी समस्या आ रही है, वह भारत-चीन सीमा विवाद की

स्थिति को राजनीतिक चर्चाओं से सुलझा सकती है। लेकिन चीन की सरकार अंतरराष्ट्रीय

कानूनी व्यवस्था को नकारकर जो करने की कोशिश कर रही है, वह सरासर गलत है।

भारतीय सेना को पूर्ण सतर्क रहने को कहा गया

उन्होंने सभी भारतीय सेना को सतर्क रहने को कहा है। उन्होंने कहा है कि जरूरत पड़ने पर

भारत पीछे नहीं हटेगा। भारतीय सेना चीन को सबक सिखाने के लिए हमेशा तैयार है।

सेना प्रमुख ने आज तवांग, अरुणाचल में एक वरिष्ठ अधिकारी और भारत-चीन सीमा

नियंत्रण रेखा पर बातचीत के दौरान चीन को बेबाक चेतावनी जारी की है।भारतीय सेना के

अधिकारी ने बताया कि आगामी 30 मई के महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता

में भारत-चीन सीमा में व्यवस्थाओं पर रक्षा मंत्रालय और गृह मंत्रालय के साथ गंभीरता से

चर्चा होने की संभावना है। भारतीय सेना के आर्मी चीफ और खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक,

इस बैठक में गंभीर चर्चाएं होंगी। इसके बाद भारत-चीन सीमा सुरक्षा पर फैसला लिया

जाएगा। भारतीय सेना के सूत्रों ने बताया कि आगामी महीने में जरूरी चर्चा होनी है।

भारत-चीन सीमा सुरक्षा पर अहम फैसला जरूरी बैठक में लिया जाएगा। बैठक में रक्षा

मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत

डोभाल, सेना के सभी उच्च स्तरीय अधिकारी भी मौजूद रहेंगे।



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