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एलएसी पर तैनात की गई 40 से ज्यादा अमेरिका में बनीं एम- 777 तोपें




  • देश के पास पहले से है 145 होवित्जर तोपों

  • चीन को करारा जवाब देने की भारत की तैयारी

  • चीन के साथ बातचीत बेनतीजा : जनरल रावत

  • अरुणाचल प्रदेश में गांव बसा चुकी है चीनी सेना

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी : एलएसी पर अब अमेरिका में बनी एम 777 तोपें भी तैनात कर दी गयी हैं। इससे साफ है कि इस सीमा पर अब चीन की किसी भी गतिविधि को भारत हल्के में नहीं ले रहा है।




वैसे दूसरी तरफ चीन की सेना भी भारतीय तोपखाना को वहां देखकर हैरान हो रही है। इससे पहले प्योगांग झील के पास भी एलएसी के पास भारत ने अपने टैंक पहुंचाकर चीन को चौंका दिया था।

पिछले कुछ दिनों से लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) यानी कि वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास भारत और चीन के सैनिकों के बीच सीमा विवाद को लेकर तनातनी देखने को मिल रही है।

करीब 11 दिन पहले चीनी हेलिकॉप्टर्स, भारतीय वायु सीमा के करीब आ गए थे, लेकिन भारत के फाइटर्स विमानों ने लेह एयर बेस से उड़ान भरकर उन्हें खदेड़ दिया था।

भारत और चीन, 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। ये सीमा अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से होकर गुजरती है।

ये तीन सेक्टरों में बंटी हुई है – पश्चिमी सेक्टर यानी जम्मू-कश्मीर, मिडिल सेक्टर यानी हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड और सिक्किम पूर्वी सेक्टर यानी और मैकमोहन रेखा अरुणाचल प्रदेश।

इस बीच,अरुणाचल में चीन के साथ जारी सीमा विवाद के बीच इंडियन आर्मी एम- 777 अल्ट्रा-लाइट होवित्जर तोपों की संख्या बढ़ा रही है।

भारतीय सेना के कर्नल ने आज कहा कि अरुणाचल प्रदेश के एलएसी पर तैनात की गई 40 से ज्यादा अमेरिका में बनीं एम- 777 तोपें ।

भारतीय सेना की रिपोर्ट के अनुसार भारत ने नवंबर 2016 में अमेरिका को 75 करोड़ डॉलर की लागत वाली 145 होवित्जर तोपों का ऑर्डर दिया था।

जून 2022 तक आर्मी को 56 और एम- 777 तोप मिलेंगी। अब तक 89 की डिलीवरी हो चुकी है।

एलएसी में पिछले 18 महीने के तनाव की स्थिति है

लद्दाख में एलएसी भारत और चीन के बीच 18 महीने से अधिक समय से तनाव चल रहा है। अरुणाचल प्रदेश में भी चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी गतिविधियां तेज कर रही है।




भारतीय सेना के कर्नल ने आज कहा कि एम- 777 को बनाने वाली कंपनी बीएई सिस्टम्स ने 25 हॉवित्जर तोपों की डिलीवरी कर दी है।

बाकी तोपें सरकार की मेक इन इंडिया पॉलिसी के तहत महिंद्रा डिफेंस के साथ भारत में बनाई जा रही हैं। इन तोपों की रेंज 30 किलोमीटर तक है।

लेकिन, अनुकूल परिस्थिति में रेंज 40 किमी से ज्यादा भी हो सकती है। हॉवित्जर को जरुरत के मुताबिक, एक जगह से दूसरे जगह ले जाया जा सकता है।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल एसएल नरसिम्हन (रिटायर्ड) ने कहा- बाकी एम- 777 के शामिल होने से सेना को बड़ी बढ़त मिलेगी।

टाइटेनियम और एल्यूमीनियम से बनी हॉवित्जर का वजन करीब 4 हजार किलोग्राम है, लेकिन चिनूक हेलीकॉप्टर इसे ऊंचाई वाले इलाकों में ले जाने में सक्षम है।

अरुणाचल प्रदेश में एक आर्टिलरी ब्रिगेड के कमांडर ब्रिगेडियर संजीव कुमार ने पहले कहा कि ऐसे कई इलाके हैं, जहां भारी तोपों को तैनात नहीं किया जा सकता है।

लेकिन एम- 777 को चिनूक में स्लिंग-लोड कर तेजी से तैनात किया जा सकता है। एम- 777 इन तोपों को मैदानी इलाकों में तैनात किया जाना था, लेकिन सेना ने इन्हें ऊंचाई पर तैनात करने के लिए कुछ मामूली बदलाव किए हैं।

भारत और चीन ने लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में एलएसी पर सीमा के दोनों ओर सैन्य गतिविधियों में इजाफा हुआ है।

दोनों तरफ से सैनिक संरचना तैयार हो रहे हैं

दोनों तरफ बड़ी संख्या में इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण हो रहा है।जनरल रावत ने पिछले दिनों कहा कि परमाणु हथियार संपन्नु दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को सुलझाने में विश्वानस की कमी और संदेह आड़े आ रहा है।

पिछले महीने भारत और चीन के मिलिट्री कमांडर्स के बीच 13वें राउंड की बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई थी।

दोनों पक्षों के बीच सीमा से पीछे हटने के मसले पर सहमति नहीं बन पाई है। इस कारण पिछले साल सीमा की सुरक्षा के लिए भेजे गए हजारों सैनिक अब बेस पर लंबे समय तक वापस नहीं लौटेंगे।



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