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भारतीय एजेंसी ने स्वीकारा कि उसकी जानकारी मे थी जासूसी







  • सीईआरटी ने कहा सरकार को सतर्क किया गया था
  • साइबर विशेषज्ञ पहले ही संकेत दे चुके थे इस बात का
  • सफाई दी गयी कि सतर्कता के आदेश जारी हुए थे
विशेष प्रतिनिधि

नईदिल्लीः भारतीय एजेंसी ने परोक्ष तौर पर इसे स्वीकार कर लिया है कि

इजरायल के जासूसी स्पाईवेयर के बारे में उसे जानकारी थी। यह भारत

सरकार की एजेंसी है। इस एजेंसी के स्वीकार करने पहले ही साइबर विशेषज्ञों

ने इस एजेंसी के साथ स्पाईवेयर के तार जुड़े होने की बात जगजाहिर कर दी

थी। भारतीय एजेंसी सीईआरटी ने पहली बार सार्वजनिक तौर पर इसकी

जानकारी दी है। यह भारत सरकार की एजेंसी है, जिसके जिम्मे साइबर

हमलों को विफल करना है। कंप्यूटर एमरजेंसी रेस्पांस टीम (सीईआरटी)

के जिम्मे सरकार पर होने वाले साइबर हमलों की निरंतर निगरानी करना है।

अब इसी सरकारी एजेंसी ने कहा है कि गत 17 मई के हमले के पहले ही उसकी

तरफ से सरकार को सतर्क कर दिया गया था।

इस कंपनी पर भी आरोप है कि अमेरिकी अदालत में मामला दर्ज होने के

बाद पिगासूस के साथ साथ उसने भी अपने कई दस्तावेज गायब कर दिये हैं।

विवाद बढ़ने के बाद इस सरकारी एजेंसी की तरफ से पहली बार सफाई दी

गयी है। इसके पहले ही केंद्रीय गृहमंत्रालय यह साफ कर चुका है कि इस

जासूसी से उसका कोई लेना देना नहीं है। एजेंसी ने दावा किया है कि

व्हाट्सएप के वॉयस कॉल के जरिए फोन हैक किये जाने के बारे में यह

सतर्कता जारी की गयी थी। साइबर विशेषज्ञ दावा कर रहे हैं कि इस टीम ने

सतर्कता आदेश जारी करने के कुछ दिन बाद ही उसे हटा भी दिया था।

इसे हटाने के पहले ही सिविल सोसायटी और अन्य जांच कर्ता इस गड़बड़ी

को दर्ज कर चुके थे। इसलिए अपनी तरफ से इसे मिटा दिये जाने के बाद

भी अमेरिकी अदालत में इसका सबूत दाखिल कर दिये गये हैं।

सरकारी एजेंसी सूचना तकनीक मंत्रालय के अधीन है

इस विवाद के बीच भारतीय इलेक्ट्रानिक्स एवं सूचना तकनीक मंत्रालय

की तरफ से अब तक चुप्पी साधे रहने की वजह से भी विवाद और बढ़ गया है।

पिछले मई और सितंबर माह में सरकार विरोधियों की हुई जासूसी का मामला

सामने आने के बाद अब भी सरकार ने स्पाईवेयर बनाने वाली कंपनी से

कोई जानकारी नहीं मांगी है।



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