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फ्रांस की मीडियापॉर्ट ने फिर नया राफेल डील का बम फोड़ा




  • कोई भारतीय एजेंसी अब जांच करना नहीं चाहती
  • मॉरिशस की फर्जी कंपनी में भेजा गया था पैसा
  • 7.5 मिलियन यूरो का भुगतान भेज गया था
  • सीबीआई को 2018 में मिल गये थे दस्तावेज

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः फ्रांस की मीडियापॉर्ट ने फिर राफेल डील पर एक और रिपोर्ट प्रकाशित की है। जिसमें सबसे बड़ी बात यह कही गयी है कि अनेक भारतीय एजेंसियों के पास इस सौदे में घूसखोरी के सबूत होने के बाद भी अब वे जांच की गाड़ी को आगे नहीं बढ़ाना चाहते हैं।




इनमें केंद्रीय जांच ब्यूरो और ईडी भी शामिल है। इस डील में सुशेन गुप्ता को पैसा दिये जाने की सूचना तो पहले ही सार्वजनिक हो चुकी थी।

अब फ्रांस की मीडियापॉर्ट ने इसे कितने पैसे दिये गये थे तथा उसके पास भारतीय रक्षा मंत्रालय के कौन से दस्तावेज थे, उसका भी खुलासा कर दिया है।

बता दें कि फ्रांस की मीडियापॉर्ट लगातार राफेल डील पर अपनी जांच को जारी रखे हुए हैं और अब तक चार बार ऐसी रिपोर्ट प्रकाशि कर चुका है जो केंद्र सरकार के बयानो को गलत बताती है।

इस बार बताया गया है कि सुशेन गुप्ता नामक इस व्यक्ति को दसाल्ट कंपनी ने फर्जी इनवॉयसों के आधार पर कमसे कम 7.5 मिलियन यूरो का भुगतान किया है।

फ्रांस की मीडियापॉर्ट का दावा है कि भारतीय एजेंसियों के पास भी इस भुगतान के दस्तावेज मौजूद हैं। बावजूद इसके भारत की तरफ से मामले की जांच की कोई पहल नहीं की जा रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक सुशेन गुप्ता को यह पैसे दिये गये हैं, इसकी रिपोर्ट केंद्रीय जांच ब्यूरो और इडी के पास वर्ष 2018 से ही है।

फ्रांस की मीडियापॉर्ट ने दलाल को दिये पैसे की बात कही है

रिपोर्ट में बताया गया है कि सुशेन गुप्ता को मॉरिशस की एक फर्जी कंपनी के जरिए यह भुगतान किया गया है, जिसका उल्लेख अगस्टा वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर डील में हुआ था।




मॉरिशस के अधिकारियों ने भारत को जांच में मदद क लिए इससे संबंधित सारे दस्तावेज उपलब्ध करा दिये थे।

गत 11 अक्टूबर 2018 को सीबीआई के निदेशक के पास यह दस्तावेज पहुंचे थे। उसके एक सप्ताह बाद सीबीआई को इस भ्रष्टाचार के बारे में अधिकृत तौर पर शिकायत भी मिली थी। लेकिन इसके बाद भी सीबीआई ने जांच नहीं करने का फैसला किया।

फ्रांस की मीडियापॉर्ट के मुताबिक सुशेन गुप्ता ने दसाल्ट की डील में बिचौलिये का काम किया।

इस बीच सिंगापुर की एक अन्य कंपनी के जरिए पैसों के लेनदेन का काम किया गया। सिंगापुर की इस कंपनी का नाम इंटरडेव है।

जिसे दसाल्ट के लिए एशिया में सिस्टम इंट्रीगेटर के तौर पर दर्शाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक दरअसल यह एक फर्जी कंपनी है जो कोई काम काज नही करती है।

कंपनी के दफ्तर में सुशेन गुप्ता परिवार का ही एक व्यक्ति बैठता है।

फ्रांस की मीडियापॉर्ट ने यह भी लिखा है कि जब डील की बात चीत चल रही थी तभी सुशेन गुप्ता को रक्षा मंत्रालय के गोपनीय दस्तावेज हाथ लग गये थे।

इन दस्तावेजों के आधार पर ही दसाल्ट कंपनी ने राफेल विमानों की कीमत कितनी रखनी चाहिए, यह तय किया क्योंकि इन गोपनीय रक्षा दस्तावेजों में वे दस्तावेज भी थे, जिनसे यह पता चलता था कि भारतीय पक्ष इनकी कीमतों को किस आधार पर तय करने जा रहा है।



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