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कोरोना संक्रमण और ईलाज में भारत को और सतर्क रहना होगा

  • जांच नहीं हुआ तो हालत बेहतर नजर आ रहे हैं
  • अनेक स्थानों पर अब भी छिपा हो सकता है संक्रमण
  • हमारे भारत में सबसे कम जांच का आंकड़ा खतरनाक
  • यूरोप और अमेरिका की तुलना में एशिया की स्थिति बेहतर
  • डॉ एच डी शरण
  • (लेखक रांची के जाने वाले चिकित्सक हैं)

रांचीः कोरोना संक्रमण का तुलनात्मक अध्ययन यही दर्शाता है कि यूरोप और अमेरिका

के मुकाबले एशियाई देश अभी बेहतर स्थिति में हैं।

भारत की स्थिति भी अपेक्षाकृत बेहतर है

लेकिन यह कोई निश्चिंत अथवा संतुष्ट होने लायक बात तो कतई नहीं है।

एशिया के आंकड़ों में चीन को शामिल नहीं किया गया है क्योंकि चीन में क्या कुछ हुआ है

और उसके बारे में क्या कुछ बताया गया है, यह पूरी तरह अस्पष्ट है। हम सभी को सिर्फ

इतना भर पता है कि चीन के वुहान शहर के एक समुद्री मछली के बाजार से यह वायरस

फैला था। चीन में कितने लोग संक्रमित हुए और कितनों की मौत हुई, इस बारे में जो

आंकड़ा उपलब्ध है, वह भरोसेमंद नहीं माना गया है। वैसे भी खुद चीन ने वुहान शहर के

मौत के आंकड़ों को हाल ही में संशोधित किया है।

इस किस्म की महामारी के फैलने और उसके अन्य आचार व्यवहार का विश्व व्यापी

अध्ययन चल रहा है। साथ ही वैज्ञानिक भी इससे मुक्ति का मार्ग तलाश रहे हैं। इन सभी

के बीच मौत के आंकड़ों का अगर विश्लेषण करें तो भारत और एशिया की स्थिति

तुलनात्मक तौर पर बेहतर नजर आती है।

यह तुलनात्मक अध्ययन इसलिए भी महत्वपूर्ण प्रतीत होता है क्योंकि अमेरिका में

पिछले दस दिनों में कोरोना के मरीजों की संख्या लगभग दोगुनी हो गयी है। पौने नौ लाख

लोग वहां कोरोना के गंभीर संक्रमण के दौर में पहुंच चुके हैं। इस महीने की बात करें तो

औसतन हर रोज वहां दो हजार लोगों की मौत हो रही है।

कोरोना संक्रमण से जूझ रहे हैं तमाम डाक्टर और स्वास्थ्यकर्मी

हो सकता है कि वहां मौत का आंकड़ा इससे भी अधिक हो क्योंकि अभी वहां के स्वास्थ्य

कर्मी और प्रशिक्षित लोग मरीजों की देखभाल पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। अमेरिका के लिए

यह चिंताजनक स्थिति है क्योंकि वर्ष 1950 से लेकर 1953 तक चले कोरिया युद्ध में

अमेरिका के 36516 सैनिक मारे गये थे। वैसे वर्ष 2011-12 में फ्लू से 12 हजार और 2017-

18 में 61 हजार लोगों की मौत हुई है।

लेकिन जब प्रति दस लाख में संक्रमण की जांच के आंकड़ों को हम देखते हैं तो हमें भारत

की कमजोर स्थिति का पता चल जाता है। दरअसल यही वह वजह है जिसकी वजह से हमें

कतई असतर्क नहीं होना चाहिए। इस बात को हमेशा ध्यान में रखना चाहिए कि भारत

एक घनी आबादी वाला देश है। जाने अनजाने में कहां कितने संक्रमण लिये रोगी घूम रहे

हैं, इसका आंकड़ा तो जांच से ही सामने आ सकता है।


 

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