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भारत को अपना वैक्सिन तैयार करने पर ध्यान देना चाहिए

  • दस प्रतिशत जांच हो तो असली तस्वीर सामने आयेगी
  • संक्रमित लोगों के करीब होनी चाहिए यह जांच
  • जांच की विधि को और तेज भी करना होगा
डॉ एचडी शरण
(लेखक रांची के जाने वाले चिकित्सक हैं)

रांचीः भारत को दूसरों के वैक्सिन अथवा दवा का इंतजार करने के बदले अपने यहां की

वैक्सिन अथवा दवा विकसित करने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। विश्व में इस पर

लगातार काम चल रहा है लेकिन भारत की असली परेशानी यह है कि यहां की जरूरतें

अन्य देशों की तुलना में कई सौ गुणा अधिक है। यूं तो भारत में भी इस दिशा में काम चल

रहा है और यही भारत के लिए सही फैसला भी साबित होगा। वरना किसी अन्य देश अथवा

कंपनी द्वारा विकसित वैक्सिन अथवा दवा को भारत तक पहुंचने में काफी समय लग

जाएगा।

वाट्स ऐप और फेसबुक विश्व विद्यालय और हिन्दी समाचार चैनलों की बात तो जाने ही

दीजिए, अब तो हमारे प्रमुख अखबार भी आपको भ्रमित करने में लगे हैं। हो यह रहा है कि

वैज्ञानिक तथ्यों को समझ पाना सब के लिए संभव नहीं होता। आज मुखपृष्ठ पर पढ़ा कि

जांच के मामले में भारत टाप 10 में। अगर पूरा समाचार पढ़ा तो पता चला कि कुछ और ही

तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया गया। यह याद रखना आवश्यक है कि यह वाईरस

नया है और इसके बारे में हमारी जानकारी सीमित है। यह संभव है कि आज हम जो जानते

हैं, वह कल गलत साबित हो जाये। जितना हम जान सके हैं, उसके मुताबिक हमें इस

वाईरस से जल्द मुक्ति नहीं मिलने वाली है। और अगर खत्म हो भी जाये तो यह दोबारा

आयेगी। हां, ,हम यह अपेक्षा कर सकते हैं कि जब यह दोबारा आयेगी,तब तक हमारे शरीर

में उसके खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता आ चुकी होगी। संक्रमण के जरिए या फिर वैक्सीन के

जरिये।

भारत को दूसरों के भरोसे नहीं रहना चाहिए

वैक्सीन की चर्चा हुई तो एक बात और बता दूं। हमें अपने लिए स्वयं वैक्सीन बनानी

होगी। दूसरे जो वैक्सीन बना रहे हैं, उन्हें हम तक पहुंचने में बरसों लग जायेंगे।

विश्व में अब तक 31 लाख से अधिक लोगों को कोरोना का संक्रमण हुआ है। करीब साढ़े नौ

लाख लोग इस बीमारी से निजात पा चुके हैं और दो लाख से कुछ अधिक लोगों ने अपनी

जान गंवायी है। इस तरह से इस समय सारे विश्व में इस समय कोरोना के

1,966,641मरीज़ हैं। ये आंकड़े हैं और इंटरनेट पर हर किसी के लिए उपलब्ध हैं। इनका

विश्लेषण अलग अलग तरीकों से किया जा सकता है। इस वक्त विश्व भर में इस रोग की

मृत्यु दर 6.9% है जो हमारी अपेक्षा से अधिक है।

इस मृत्यु दर में प्रमुख योगदान छः देशों का है

इटली, फ्रांस और ब्रिटेन (13 से 14%), स्पेन(10 से 11%), अमेरिका और ईरान(6 से 

7%)। चीन द्वारा जारी किये गये आंकड़े विश्वसनीय प्रतीत नहीं होते। हमें उम्मीद है कि

जैसे जैसे इन देशों में यह रोग नियंत्रण में आयेगा, औसत मृत्यु दर भी कुछ कम हो

जायेगी। इटली, स्पेन में अब संक्रमण नियंत्रण में आता दिख रहा है। सबसे अधिक खराब

हालात अभी अमेरिका में हैं। यहां 10 लाख से अधिक लोग संक्रमण का शिकार हो चुके हैं।

जब तक जांच प्रतिशत नहीं सुधरता असलियता का पता नहीं चलेगा

भारत में आज तक 31 हजार से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं और मृत्यु दर तीन

प्रतिशत से कुछ अधिक है। यह संख्या अभी बढेगी । यह मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि

हमने अभी तक प्रति दस लाख जनसंख्या के लिए मात्र 519 जांच की हैं। और इसका यह

अर्थ भी नहीं है कि हमने प्रति दस लाख में इतने व्यक्तियों की जांच की है क्योंकि एक

व्यक्ति यदि संक्रमित पाया जाता है तो उसकी तीन से चार बार जांच होती है।अगर हमें

संक्रमण की सही स्थिति का पता लगाना है तो इस औसत को कम से कम 10 हजार जांच

प्रति दस लाख तक पहुंचाना होगा। अर्थात हमें करीब 1.3 करोड़ जांच और करनी होगी।

आज हम प्रतिदिन 50 हजार जांच कर हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा है कि जल्द ही हम रोज 1

लाख जांच करेंगे। यदि हम कल से ही 1 लाख जांच रोज़ करें तो इस लक्ष्य तक पहुंचने में

हमें 130 दिन और लगेंगे। 10 सितम्बर तक। तब तक बिना लक्षण वाले संक्रमित और

कितने लोगों को संक्रमित कर चुके होंगे, यह कहना कठिन है।


 

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