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भारत ने एलएसी पर निगरानी प्रणाली में बड़े बदलाव की योजना बनाई

  • ड्रोन से लेकर इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के साधनों पर होगा जोर

  • सेना ने भारतीय कंपनी के साथ 140 करोड़ रुपये के सौदे पर हस्ताक्षर किए

  • सेना के शीर्ष अधिकारी ने अरुणाचल सीमा का दौरा किया

उत्तर पूर्व संवाददाता

गुवाहाटी: भारत ने एलएसी पर अपनी निगरानी प्रणाली को और बेहतर बनाने की योजना

पर काम प्रारंभ कर दिया है। सेना के पूर्वी कमान प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान

ने मंगलवार को कहा कि भारत-चीन सीमा पर अरुणाचल प्रदेश के अग्रेषण स्थानों में

तैनात इकाइयों का दौरा किया है। लेफ्टिनेंट जनरल चौहान ने रविवार और सोमवार को

अरुणाचल की अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान सैनिकों के साथ बातचीत की और उनसे

आग्रह किया कि वे सीमाओं पर शांति और सौहार्द बनाए रखने के दौरान अपने आचरण में

व्यावसायिकता का प्रदर्शन करें, जबकि सभी घटनाओं के लिए एक साथ अच्छी तरह से

तैयार हैं। एक रक्षा अधिकारी ने कहा, चौहान ने उच्च स्तर की परिचालन तैयारियों को

बनाए रखने के लिए इकाइयों की उपलब्धियों की सराहना की और अरुणाचल प्रदेश के दूर-

दराज और दूरदराज के क्षेत्रों के विकास में स्थानीय आबादी और नागरिक प्रशासन की

सहायता करने की दिशा में उनके अथक प्रयासों की सराहना की । हालांकि, भारतीय सेना

के तेजपुर गजराज कोर डिवीजन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस संवाददाता से कहा कि

भारत अपने पड़ोसी चीन के साथ लगने वाली उत्तरी सीमा की निगरान की व्यवस्था को

चुस्त-दुरुस्त करने की दिशा में बढ़ा कदम उठाने जा रहा है। अब ड्रोनों, सेंसरों, टोही

विमानों और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के औजारों के जरिए चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी की

हरकतों पर चौबीसों घंटे नजर रखी जाएगी। निगरानी क्षमता को इतना बड़ा बूस्ट देने के

पीछे का मकसद घुसपैठ की हर कोशिश पर हर पल गहरी नजर रखना है।इस दौरान चीन

अपनी सीमा में तेजी से इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में जुटा है। यही कारण है कि भारत ने

भी एलएससी पर निगरानी और खुफिया जानकारियां एकत्र करने के तंत्र को उच्च कोटि

का बनाने का फैसला किया है।

भारत ने एलएसी पर अत्याधुनिक उपकरण लगाये हैं

 

रक्षा मंत्रालय के एक सूत्र ने बताया, “पाकिस्तान के साथ लगने वाली 778 किमी लंबी

नियंत्रण रेखा की तरह ही एलएसी पर भी लगातार सैनिक तैनात नहीं किए जा सकते। इस

कारण मौजूदा निगरानी क्षमता को इतना अपग्रेड करने की दरकार है कि वहां पल-पल की

गतिविधियों की खबर मिलती रहे।इधर, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने

बॉर्डर ऑब्जर्वेशन ऐंड सर्विलांस सिस्टम (BOSS) को करीब-करीब विकसित कर लिया है।

इसमें कई सेंसर सिस्टम लगे हैं। वहीं, आर्मी ने पिछले महीने एक भारतीय कंपनी के साथ

140 करोड़ रुपये की डील पर दस्तखत किया है। डील के तहत अडवांस वर्जन के स्विच

ड्रोन खरीदे जाएंगे। एक सूत्र ने कहा, “ऐसे ड्रोनों के आने से रणनीतिक स्तर पर हमारी

निगारानी प्रणाली में बड़ा बदलाव आएगा। एलएसी पर बटालियन कमांडरों और सैन्य

टुकड़ियों को पल-पल की स्पष्ट तस्वीरें मिलेंगी।अधिकारियों का कहना है कि चीन ने

जिस तरह मिलिट्री इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार किया है और पूर्वी लद्दाख से लेकर अरुणाचल

प्रदेश तक उसने जिस तरह अपनी सेना को तैनात कर रखा है, उससे इस बार गर्मियों में

तनाव और बढ़ने की आशंका है।

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