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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा चीन की योजनाओं को हमने कर दिया नाकाम

  • अरुणाचल प्रदेश के तवांग में सुरंग का काम शुरू किया

  •  चीन की सीमा पर 43 पुलों का किया उद्घाटन

  •  अब सीधे चीन के करीब पहुंचेगे सैन्य वाहन

  •  पूर्वोत्तर भारत के लिए आज का दिन ऐतिहासिक

  •  सीमा सड़क संगठन द्वारा किया गया निर्माण

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए

सात सीमावर्ती राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 43 पुलों का उद्घाटन किया और

अरुणाचल प्रदेश में एक महत्वपूर्ण सुरंग की नींव रखी। रक्षा प्रवक्ता, लेफ्टिनेंट

कर्नल हर्ष वर्धन पांडे ने बताया कि इस कड़ी में, आज भारतीय सेना और भारत

सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है। क्योंकि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज

चीन के साथ सीमाओं पर कुल 43 पुलों का उद्घाटन किया है। रक्षा प्रवक्ता पांडे ने

कहा कि इसमें से 7 पुलों का उद्घाटन लद्दाख में, 10 का जम्मू और कश्मीर में, 2

हिमाचल प्रदेश में, 4 पंजाब में, अरुणाचल प्रदेश में 8, उत्तराखंड में 8 और

सिक्किम में 4 पुलों का उद्घाटन किया गया है। बता दें कि इन सभी पुलों का

निर्माण सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा किया गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ

सिंह ने आज अरुणाचल प्रदेश के तवांग में नेचिफू सुरंग की नींव रखी है।

रक्षा मंत्री राज नाथ सिंह ने किया इनका उदघाटन 

इस सुरंग ने राज्य की राजधानी ईटानगर से 448 किमी उत्तर-पश्चिम और

तवांग की सीमा चीन तक बढ़ा दी। इसका निर्माण भी बीआरओ द्वारा किया गया

। यह सुरंग सेना के लिए सीमा पर जाना आसान बनाती है। पांडे ने कहा कि कुल

43 पुलों में से लगभग 22 पुल चीन सीमा से सीधे जुड़े हुए हैं। सैन्य आंदोलनों,

वाहनों और हथियारों के संदर्भ में उनका महत्व बहुत अधिक है। बता दें, पिछले

पांच महीनों से चीन के साथ अरुणाचल प्रदेश और भारत-चीन लद्दाख सीमा पर

तनाव चल रहा है। ऐसे में भारत अपनी सीमाओं को मजबूत करने में जुटा है। इस

कड़ी में आज का दिन बहुत महत्वपूर्ण है।भारतीय सेना की रसद या तैनाती भी

सुनिश्चित की गई है। यहां उल्लेख करें कि आज जो 43 पुलों का उद्घाटन रक्षा

मंत्री द्वारा किया गया है, उनमें से 22 पुलों का भारतीय सेना से सीधा संबंध है

इन मार्गों से होकर भारतीय सेना के जवान, तोपखाने, रसद उनके लिए भेजे जाते

हैं। अगर चीन जैसा पड़ोसी देश भारत का है और दूसरी तरफ पाकिस्तान की

नापाक सरकार है, तो भारतीय सेना और सरकार के लिए इन बुनियादी बातों पर

ध्यान देना बहुत जरूरी है।दूसरी ओर, चीन ने 2017 के डोकलाम गतिरोध के बाद

वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के साथ कम से कम 13 पूरी तरह से नए सैन्य

ठिकानों का निर्माण शुरू कर दिया है, जिसमें तीन हवाई प्रतिष्ठान, पांच स्थायी

वायु रक्षा ठिकाने और पांच हेलीपोर्ट शामिल हैं।

लद्दाख के गतिरोध के बाद भारत भी अपनी योजनाओं पर गंभीर

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पूर्वी लद्दाख में हालिया गतिरोध के बाद मई में चार नए

हेलिपोर्ट्स का निर्माण शुरू हुआ।भारतीय सेना के अधिकारी ने कहा कि, “2017 के

डोकलाम गतिरोध ने चीन के रणनीतिक उद्देश्यों को बदल दिया है और पिछले तीन वर्षों से

भारतीय सीमा के साथ इसके हवाई प्रतिष्ठानों, वायु रक्षा ठिकानों और हेलीपोर्टों की

संख्या दोगुनी हो गई है।” सुरक्षा विशेषज्ञ सिम टैक द्वारा लिखित यह रिपोर्ट मंगलवार

को जारी की गई। इसमें कहा गया है कि भविष्य में सैन्य क्षमता वाले चीन के निर्माण

अभियान से भारत के साथ दीर्घकालिक क्षेत्रीय तनाव पैदा होगा। यह बताना जरूरी है कि

पिछले कई महीनों से भारत-चीन सीमा पर लगातार तनाव बना हुआ है। चीन लगातार

भारतीय सीमा में घुसपैठ करने और भारतीय सैनिकों को भड़काने की कोशिश कर रहा है।

लेकिन भारतीय सेना के जवान भी शांतिपूर्ण तरीके और यथास्थिति में स्थिति से निपटने

में माहिर हैं। वैसे, चीन सीमा के पास बुनियादी ढांचे के निर्माण के साथ जाग रहा है।

चीन नहीं चाहता कि भारत-चीन सीमा के पास भारत सरकार सड़क, पुल या हवाई

पट्टी का निर्माण करे। क्योंकि चीन को डर है कि अगर चीन ने भारत के खिलाफ

फिर से कोई सैन्य कार्रवाई करने की योजना बनाई, तो भारतीय सेना आसानी से

एक जगह से दूसरी जगह जाएगी और चीनी योजनाओं को नाकाम कर देगी।


 

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