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भारत और चीन के बीच अंतर्राष्ट्रीय सीमा के पार चीन के तीस से अधिक फाइटर जेट

  • धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है चीन,

  • टक्कर देने को तैयार हैं

  • भारत के राफेल भी सीमा पर 

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी : भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख वास्तविक नियंत्रण रेखा लद्दाख, 

सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश कें चीन-भारत अंतरराष्ट्रीय सीमा मैकमोहन लाइन के

सीमा पर पिछले एक साल से तनातनी अभी खत्म भी नहीं हुई कि चीन की पीपुल्स

लिबरेशन आर्मी कें ड्रैगन फिर चालबाजियां करता नजर आ रहा है। चीनी वायुसेना पूर्वी

लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश कें चीन-भारत अंतरराष्ट्रीय सीमा मैकमोहन लाइन में अपने

क्षेत्र में बड़ा अभ्यास करते हुए नजर आई है। इस अभ्यास में चीन के लगभग 3 दर्जन

लड़ाकू विमान शामिल हुए। चीन के लड़ाकू विमानों के अभ्यास पर भारतीय सेना भी

करीब से नजर बनाए हुए है। यह जानकारी देते हुए भारतीय सेना के गजराज कोर

(तेजपुर) के वरिष्ठ अधिकारी ने आज कहा कि अभ्यास करने वाले लड़ाकू विमानों में 30-

35 फाइटर जेट शामिल रहे। इस अभ्यास में चीन का जे-17, जो कि सुखोई-27 लड़ाकू

विमान का चीनी अवतार है। इसके अलावा अभ्यास में जे-16 विमान भी उड़ान भरते हुए

नजर आए। सूत्रों ने कहा कि चीन के इस अभ्यास पर भारतीय पक्ष भी करीब से नजर रख

रहा है। भारतीय सेना के सूत्रों के मुताबिक, जिन हवाई अड्डों से चीनी लड़ाकू विमानों ने

अभ्यास किया उसमें होटन, गार गुंसा और काशनगर समेत कई हवाई ठिकाने शामिल

रहे। इनमें से कुछ को चीन ने हाल ही में अपडेट किया है ताकि सभी प्रकार के लड़ाकू

विमान यहां से उड़ान भर सकें। इसके साथ-साथ हवाई अड्डे की संरचनाओं में भी बदलाव

किया है ताकि लड़ाकू विमानों को छिपाया जा सके। भारतीय सेना के सूत्रों ने बताया कि

चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के अभ्यास के दौरान चीन के लड़ाकू विमान अपने क्षेत्र

में ही रहे।

भारत और चीन के बीच सैन्य तनातनी नहीं पर सतर्कता जारी

लद्दाख क्षेत्र में पिछले साल से जारी तनाव के बीच भारतीय लड़ाकू विमानों की गश्त कर

रहे हैं। भारतीय सेना के अधिकारी ने बताया भारतीय वायु सेना नियमित रूप से अपने

सबसे सक्षम राफेल लड़ाकू विमानों को लद्दाख के आसमान पर उड़ाती है। राफेल की

तैनाती के बाद वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत और मजबूत हुआ है। सूत्रों ने बताया कि

भले ही चीन ने पैंगोंग झील क्षेत्र से सैनिकों को हटा लिया है, लेकिन उन्होंने एचक्यू-9 और

एचक्यू-16 समेत अपनी वायु रक्षा प्रणालियों को स्थानांतरित नहीं किया है, जो लंबी दूरी

के विमानों को निशाना बना सकते हैं। हाल ही में अरुणाचल प्रदेश में बुम ला दर्रे से 5

किलोमीटर की दूरी पर चीन द्वारा 1500 गाँवों का निर्माण किये हैं। बुम ला दर्रा भारतीय

सेना और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के बीच आधिकारिक सहमति वाले बार्डर

पर्सनल मीटिंग के चार पॉइंट्स में से एक है। इससे पहले वर्ष 2020 में चीन ने रणनीतिक

रूप से महत्त्वपूर्ण एक रेलवे लाइन पर काम शुरू किया था जो सिचुआन प्रांत को तिब्बत

में निंगची से जोड़ेगा, यह रेलवे लाइन भारत के अरुणाचल प्रदेश की सीमा के पास है।सीमा

के निकट गाँव की स्थापना करना काफी हद तक चीन के लिये सैन्यकर्मियों और सैन्य

सामग्री के परिवहन की क्षमता तथा सीमा क्षेत्र में रसद आपूर्ति की सुविधा को बढ़ाएगा।

अरुणाचल प्रदेश की सीमा के आस-पास प्रत्यक्ष गतिरोध की स्थिति में चीन लाभप्रद

स्थिति में हो सकता है, जैसा कि डोकलाम या हाल ही में लद्दाख में गतिरोध के दौरान देखा

गया था। भारतीय सेना गजराज कोर (तेजपुर) के वरिष्ठ अधिकारी ने आज बताया कि

पीएलए के 30 से अधिक लड़ाकू विमान लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश कें चीन-भारत

अंतरराष्ट्रीय सीमा मैकमोहन लाइन पर गरजते हैं।

मैकमोहन लाइन पर लगातार दिखते हैं चीन के लड़ाकू विमान

भारतीय रक्षा मंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि चीन की सरकार अंतरराष्ट्रीय कानूनी

व्यवस्था को नकारकर जो करने की कोशिश कर रही है, वह सरासर गलत है। उन्होंने सभी

भारतीय सेना को सतर्क रहने को कहा है। उन्होंने कहा है कि जरूरत पड़ने पर भारत पीछे

नहीं हटेगा। भारतीय सेना चीन को सबक सिखाने के लिए हमेशा तैयार है।

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