भारत और जापान संबंधों की धुरी रक्षा क्षेत्र में सहयोग

भारत और जापान संबंधों की धुरी रक्षा क्षेत्र में सहयोग
Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  • रक्षा संबंधी वार्षिक सम्मेलन संपन्न

  • एक्ट ईस्ट के तहत जापान को प्राथमिकता

  • टोक्यों में अगले साल होगी वार्ता

नयी दिल्ली: भारत और जापान ने रक्षा क्षेत्र में सहयोग को दोनों देशों के

संबंधों की धुरी करार देते हुए इसका दायरा निरंतर बढ़ाते रहने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है।

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और जापान के रक्षा मंत्री सुनोरी ओनोडेरा ने

सोमवार को यहां रक्षा मंत्री स्तरीय वार्षिक संवाद के बाद जारी संयुक्त वक्तव्य में

कहा कि दोनों देशों के बीच सामरिक भागीदारी को मजबूत बनाने के लिए

रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है।

बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि समान लक्ष्यों को हासिल करने के लिए

भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ को जापान की ‘फ्री एंड ओपन इंडो पेसिफिक स्ट्रेटजी’

के साथ जोड़ने वाली ‘जापान-भारत विशेष सामरिक एंड ग्लोबल पार्टनशिप’ को और अधिक मजबूत करने की जरूरत है।

संयुक्त वक्तव्य में कहा गया है कि भारतीय रक्षा मंत्री अगले वर्ष जापान जायेंगी

और दोनों देशों के बीच अगले साल टोक्यो में टू प्लस टू डॉयलाग भी होगा।

भारत और जापान प्रशांत महासार पर शांति के पक्ष में

दोनों मंत्रियों ने इस बात पर जोर दिया कि हिन्द प्रशांत क्षेत्र में शांति और समृद्धि के लिए हिन्द महासागर और प्रशांत महासागर में शांति और स्थिरता जरूरी है।

बैठक में कोरियाई प्रायद्वीप के घटनाक्रम सहित हिन्द प्रशांत क्षेत्र में मौजूदा सुरक्षा स्थिति पर खुलकर बातचीत हुई।

दोनों पक्षों ने माना कि समुद्री सुरक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना उनके परस्पर हित में है

और इस बात का विशेष रूप से उल्लेख किया कि भारत और जापान की नौसेना

व्यापक सहयोग के एक समझौते पर हस्ताक्षर करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

इसके बाद हिन्द प्रशांत क्षेत्र के अन्य देशों को भी इसमें शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।

दोनों पक्षों ने रक्षा मंत्री सहित विभिन्न स्तरों पर नियमित संपर्क पर जोर देते हुए

संस्थागत संवाद व्यवस्था, परस्पर यात्राओं और रक्षा मंत्री स्तरीय वार्षिक बैठक को

जारी रखने पर सहमति व्यक्त की।

इसके तहत भारतीय रक्षा मंत्री अगले वर्ष जापान जायेंगी।

जापानी नौसेना के प्रमुख आगामी नवम्बर में भारत आयेंगे तथा भारतीय वायु सेना प्रमुख इस साल के अंत में जापान जायेंगे।

दोनों ने अगले साल होने वाले रक्षा सचिव स्तर के सातवें संवाद और टोक्यो में अगले वर्ष होने वाले टू प्लस टू डॉयलाग के प्रति भी सकारात्मक मंशा व्यक्त की।

भारतीय सेना और जापान की सेना के बीच भी कार्यक्रमों का आदान प्रदान होगा।

संयुक्त वक्तव्य में कहा गया है कि दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच संयुक्त अभ्यास और विभिन्न आदान- प्रदान कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किये जायेंगे।

भारत और जापान ने मानव रहित यान पर करार किया

उन्होंने अमेरिका के साथ तीनों देशों की नौसेनाओं के संयुक्त अभ्यास मालाबार के आयोजन पर भी संतोष व्यक्त किया और अगले अभ्यास के बारे में बातचीत की।

भारत और जापान की वायु सेनाओं के बीच आदान प्रदान कार्यक्रमों तथा संयुक्त अभ्यास जारी रखने पर भी चर्चा हुई।

दोनों मंत्रियों ने इस बात की सराहना की कि जापान की खरीद और प्रौद्योगिकी

एजेन्सी तथा भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के बीच सकारात्मक

वार्ता के आधार पर दोनों देशों के रक्षा मंत्रालयों के बीच मानव रहित यानों के विकास

और अनुसंधान के लिए संयुक्त परियोजना शुरू करने के एक करार पर हस्ताक्षर किये गये।

श्रीमती सीतारमण ने जापानी रक्षा मंत्री को देश में दो रक्षा गलियारे बनाये जाने की जानकारी दी और जापानी कंपनियों को निवेश का निमंत्रण दिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.