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नागरिकता के सवाल पर कई राज्यों में फिर से सुलगी आग

नागरिकता के सवाल पर फिर से देश के कई हिस्सों के लिए विवाद की स्थिति बन गयी है।

खास कर पूर्वोत्तर भारत में जिस तरीके से माहौल बदला है, वह देश को प्रभावित करने

वाला भी साबित हो सकता है। ऐसा इसलिए माना जा सकता है क्योंकि इससे पूर्व असम

आंदोलन के दौरान भी देश ने इस आंदोलन को नजरअंदाज करन के बाद एक राज्य में

चलने वाले भाषाई और सांस्कृतिक आंदोलन का खामियजा भुगता है। असम और उत्तर

पूर्व के अन्य राज्यों में जारी आंदोलनों के बीच यह विधेयक राज्यसभा से पारित हो चुका

है। राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद अब नागरिकता संशोधन विधेयक कानून बन

जाएगा। संसद ने बुधवार को नागरिकता संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी जिसमें

अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना के कारण भारत आए

हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के लोगों को भारतीय नागरिकता

प्रदान करने का प्रावधान है। राज्यसभा ने बुधवार को विस्तृत चर्चा के बाद इस विधेयक

को पारित कर दिया। सदन ने विधेयक को प्रवर समिति में भेजे जाने के विपक्ष के प्रस्ताव

और संशोधनों को खारिज कर दिया। विधेयक के पक्ष में 125 मत पड़े जबकि 105 सदस्यों

ने इसके खिलाफ मतदान किया।

नागरिकता का बिल संसद के दोनों सदनों में पारित हुआ है

बता दें कि लोकसभा इस विधेयक को पहले ही पारित कर चुकी है। इस नागरिक संशोधन

बिल के कानून का रूप लेने से पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक

उत्पीड़न के कारण वहां से भागकर आए हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म को

मानने वाले लोगों को सीएबी के तहत भारत की नागरिकता दी जाएगी। ऐसे अवैध

प्रवासियों को जिन्होंने 31 दिसंबर 2014 की निर्णायक तारीख तक भारत में प्रवेश कर

लिया है, वे भारतीय नागरिकता के लिए सरकार के पास आवेदन कर सकेंगे।

अभी भारतीय नागरिकता लेने के लिए 11 साल भारत में रहना अनिवार्य है। नए बिल में

प्रावधान है कि पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यक अगर पांच साल भी भारत में रहे हों तो उन्हें

नागरिकता दी जा सकती है। यह भी व्यवस्था की गयी है कि उनके विस्थापन या देश में

अवैध निवास को लेकर उन पर पहले से चल रही कोई भी कानूनी कार्रवाई स्थायी

नागरिकता के लिए उनकी पात्रता को प्रभावित नहीं करेगी।

अमित शाह का आश्वान अब तक असरकारक नहीं

ओसीआई कार्डधारक यदि शर्तों का उल्लंघन करते हैं तो उनका कार्ड रद्द करने का

अधिकार केंद्र को मिलेगा पर उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त मौका भी दिया जाएगा।

नागरिकता संशोधन बिल के चलते जो विरोध की आवाज उठी उसकी वजह ये है कि इस

बिल के प्रावधान के मुताबिक पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले

मुसलमानों को भारत की नागरिकता नहीं दी जाएगी। कांग्रेस समेत कई पार्टियां इसी

आधार पर बिल का विरोध कर रही हैं। देश के पूर्वोत्तर राज्यों में इस विधेयक का विरोध

किया जा रहा है, और उनकी चिंता है कि पिछले कुछ दशकों में बांग्लादेश से बड़ी तादाद

में आए हिन्दुओं को नागरिकता प्रदान की जा सकती है। इस मुद्दे पर विरोध अधिक होने

की वजह से कल रात से गुवाहाटी में कर्फ्यू लगाया गया है।

इंटरनेट सेवा बंद करने जैसे हालत ही खतरनाक हैं

इस राज्य के दस जिलों में चौबीस घंटे के लिए इंटरनेट सेवा बंद कर दी गयी है। इस मुद्दे

पर विपक्ष के आरोपों के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत के मुसलमान

भारतीय नागरिक थे, हैं और बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि उन तीनों देशों में अल्पसंख्यकों

की आबादी में खासी कमी आयी है। शाह ने कहा कि विधेयक में उत्पीड़न का शिकार हुए

अल्पसंख्यकों को नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है। शाह ने इस विधेयक के

मकसदों को लेकर वोट बैंक की राजनीति के विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए देश

को आश्वस्त किया कि यह प्रस्तावित कानून बंगाल सहित पूरे देश में लागू होगा। उन्होंने

इस विधेयक के संविधान विरूद्ध होने के विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि

संसद को इस प्रकार का कानून बनाने का अधिकार स्वयं संविधान में दिया गया है।

उन्होंने यह भी उम्मीद जतायी कि यह प्रस्तावित कानून न्यायालय में न्यायिक समीक्षा

में सही ठहराया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुस्लिमों को चिंता करने की कोई आवश्यकता

नहीं है क्योंकि वे भारत के नागरिक हैं और बने रहेंगे।

लेकिन इस सफाई के बाद भी भाषा और संस्कृति के मुद्दे पर काफी संवेदनशील इलाके

इस आश्वासन पर संतुष्ट नहीं हैं। इसी वजह से कई हिस्सों में आंदोलन की आग भड़क

उठी है। दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल सहित कई अन्य राज्य राजनीतिक कारणों से इसका

विरोध कर रहे हैं क्योंकि इन राज्यों के प्रमुख राजनीतिक दलों को यह भय है कि दरअसल

भाजपा इस कानून के माध्यम से सिर्फ हिंदू वोट एकत्रित करने की चाल चल रही है।

दूसरी तरफ इसी कानूनी हथियार के जरिए बांग्लादेश से आये मुसलमानों को अलग करने

की साजिश रची जा रही है। इसी वजह से नागरिकता के सवाल पर कई इलाकों में

अशांत स्थिति है।

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