fbpx Press "Enter" to skip to content

आयकर विभाग ने असम में 29 जगहों पर छापा मारा

  • छापामारी में 7.54 करोड़ रुपये जब्त

  • गुवाहाटी, नालबारी और डिब्रूगढ़ में छापा

  • पैसे का संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाये हैं

  • 200 करोड़ से अधिकका काला धन का पता चला

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: आयकर विभाग ने असम के गुवाहाटी, नालबारी और डिब्रूगढ़ में 29 स्थानों पर

छापेमारी की है।असम में कुछ बड़े डॉक्टरों और चिकित्साकर्मियों पर छापे की कार्रवाई में

आयकर विभाग ने 200 करोड़ से अधिक रुपये का काला धन का कर चोरी का पता लगाया

है। केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने आज बताया कि तलाशी और सर्वे अभियान

राज्य के मुख्य शहरों गुवाहाटी, नलबाड़ी और डिब्रूगढ़ में 29 जगहों पर आठ जनवरी को

चलाया गया और इस दौरान विभिन्न परिसरों की तलाशी से 7.54 करोड़ रुपये नकद जब्त

किए गए। इसमें नलबाड़ी से बरामद 1.76 करोड़ रुपये नकद भी शामिल है। बोर्ड ने कहा

कि ‘‘विभिन्न अस्पतालों और चिकित्सा पेशेवरों के पास से जब्त की गई नकद राशि के

संबंध में कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला है।’’ उसका कहना है कि विभाग ने पाया कि

इन अस्पतालों/क्लिनिकों की आय को बहुत कम करके दिखाया गया है। बोर्ड ने यहां जारी

एक बयान में कहा, ‘‘इन समूहों के खिलाफ मुख्य आरोप यह है उन्होंने निजी तौर पर और

अपने अस्पतालों, नर्सिंग होम, पैथ लैब आदि की आय को भी बहुत कम करके दिखाया

है।’’ उसने कहा, ‘‘तलाशी और जब्ती अभियान के दौरान संदिग्ध निवेश, रसीदें और खर्च

से जुड़े 200 करोड़ रुपये का ब्योरा मिला है।’’ गौरतलब है कि केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड

(सीबीडीटी) कर विभाग के लिए नीति निर्धारण करता है।मंत्रालय ने बताया कि नकद

भुगतान कर खरीदी गईं जमीन या अचल संपत्तियों के दस्तावेज भी जब्त कर लिए गए।

लगभग 50 करोड़ रुपये की नकदी में अचल संपत्ति में किए गए निवेश के हस्तलिखित

नोट भी जब्त किए गए। सभी बिना स्पष्टीकरण के निवेशों, प्राप्ति की रसीदों और व्यय

मिलाकर 200 करोड़ से अधिक है।

आयकर विभाग ने कार्रवाई के बारे में औपचारिक जानकारी दी

आयकर के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आज कहा कि उत्पन्न नकदी को नए अस्पतालों के

निर्माण, नर्सिंग होम के पुनर्निर्माण और अघोषित संपत्ति के अधिग्रहण में मोड़ दिया

गया था। बड़ी मात्रा में काचा नकद प्राप्तियां और लेनदेन खातों की नियमित पुस्तकों के

बाहर किए गए थे। इसके अलावा, दैनिक प्राप्तियों को मेडिकल क्लीनिकों में एक्सेल / हार्ड

डिस्क में डिजिटल रूप से बनाए रखा गया था जो कि खातों की पुस्तकों में दर्ज नहीं किया

गया था। एक मेडिकल प्रैक्टिशनर के मामले में, वार्षिक प्राप्तियां लगभग 15-20 करोड़

रुपये थीं, जबकि ऑडिट की गई पुस्तकों में, उन्होंने केवल लगभग 5 करोड़ रुपये की

सकल रसीद दिखाई थी। अधिकारियों ने कहा कि इस मामले की जांच जारी है

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from HomeMore posts in Home »
More from अपराधMore posts in अपराध »
More from असमMore posts in असम »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from राज काजMore posts in राज काज »
More from व्यापारMore posts in व्यापार »

Be First to Comment

... ... ...
%d bloggers like this: