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ढाका सहित पूरे बांग्लादेश में दीपावली की धूम

  • रात के अंधेरे में चारों तरफ दीप

  • काली पूजा के आयोजन में जुटे श्रद्धालु

  • रमना काली मंदिर में मध्यरात्रि में पूजा

  • यह बांग्लादेश की आजादी का 50वां वर्ष है

अमीनूल हक

ढाकाः ढाका सहित पूरे बांग्लादेश में अब भी त्योहारों का अवसर बीता नहीं है। दुर्गापूजा के

आयोजन के बाद अब पूरे देश में कालीपूजा और साथ में दीपावली की धूम मची है। कोरोना

आंतक और मास्क पहनने की कड़ाई के बीच ही सारे आयोजन चले हैं। दूसरे शब्दों में कहें

तो बांग्लादेश के हर तरफ रात के अंधेरे में हजारों दीपक आपको बुलाते नजर आ रहे हैं।

वैसे भी प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इन तमाम आयोजनों को त्योहारों के तौर पर जोड़ने में

कामयाबी हासिल की है। उनकी दलील है कि – धर्मो जार जार उत्सव सबार यानी हरेक का

धर्म अपना अपना है लेकिन उत्सव सभी का है। इसी वजह से अब दीपक की रोशनी का

त्योहार भी पूरे बांग्लादेश में सर चढ़कर बोल रहा है। कोरोना और आर्थिक मंदी का पूरा

असर होने के बाद भी बंगाली को किसी भी आनंद में शामिल होने से नहीं रोका जा सका है।

वह सीमित संसाधनों में भी अपने त्योहार का आनंद मना लेता है। यही फिलहाल पूरे

बांग्लादेश की स्थिति है।

दीपावली की धूम के बीच ही ढाका के प्राचीन सिद्धेश्वरी काली मंदिर में भी काली पूजा के

आयोजन की तैयारियां युद्ध सतर पर हैं। इस आयोजन समिति की उपाध्यक्ष प्रणीता

सरकार ने कहा कि दुर्गा पूजा बीतने के बाद अब उसी दीप की रोशनी में लोगों के जीवन में

व्याप्त अंधेरे को दूर करने की कवायद है। इस बार कोरोना के बचाव के प्रावधानों के बीच

ही काली पूजा का आयोजन हो रहा है। इस मंदिर में पिछले साढ़े चार सौ वर्षों से नियमित

तौर पर पूजा का आयोजन होता आया है। वैसे भी बांग्लादेश हिंदू कल्याण ट्रस्ट के द्वारा

करीब ढाई करोड़ रुपये खर्च कर इस मंदिर के सुधार का काम भी किया गया है।

ढाका सहित पूरे देश के लिए यह साल महत्वपूर्ण

ढाका के ऐतिहासिक सोहरावर्दी मैदान के दक्षिण हिस्से में स्थित रमना कालीबाड़ी और मां

आनंदमयी आश्रम के बगल में बांग्ला एकाडमी का प्रवेश द्वार। इस पूरे इलाके में चारों

तरफ रोशनी ही रोशनी नजर आ रही है। आयोजकों ने बताया कि यहां के बीच में बने

तालाब के मध्य में नारायण की मूर्ति के चारो तरफ रोशनी का फब्बारा भी चालू हो

जाएगा। रमना के पूजा के आयोजन के संबंध में आयोजन समिति के अध्यक्ष उत्पल साहा

ने कहा कि दुर्गा पूजा के तरह ही इस आयोजन में भी कोई कमी नहीं रहेगी। अलबत्ता

कोरोना गाइड लाइन का इस बार भी सख्ती से पालन किया जाएगा। वैसे यह बता दूं कि

इस बार देश के सारे आयोजनों का अलग ही महत्व है। ऐसा इसलिए है क्योंकि बांग्लादेश

की आजादी के पचास साल पूरे होने जा रहे हैं । इसी वजह से हर आयोजन को अब

देशवासी देश की आजादी से जोड़कर ही देख रहे हैं। उत्पल साहा ने बताया कि मंदिर में

रात के बारह बजे से पूजा प्रारंभ होगी और सुबह के चार बजे चल चलेगी। इस दौरान तो

कुल विधि विधान होते हैं, सभी का पालन किया जाएगा। पूजा का एक मकसद पूरे विश्व

का कल्याण और कोरोना से मुक्ति भी है। अगले दिन के भाई फोंटा की तैयारियां भी घरों

में प्रारंभ हो चुकी है।


 

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