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हाल के महीनों में सरकारी फेसबुक पेज पर दर्शक हुए काफी कम

  • सरकारी कार्यक्रमों में घट रही है जनता की दिलचस्पी

राष्ट्रीय खबर

पटना : हाल के महीनों में देखा जा रहा है कि सरकारी कार्यक्रमों खासकर सरकारी

योजनाओं के उद्घाटन, शिलान्यास आदि कार्यक्रमों में आम जनता की दिलचस्पी घट

रही है । उसके प्रति उसकी सोच भी कमजोर पड़ रही है। सरकारी तामझाम , सुरक्षा की

व्यवस्था भी इतनी चाक-चौबंद होती है कि आम लोग वहां पहुंच नहीं पाते हैं। लेकिन अगर

उस योजनाओं का सोशल मीडिया , फेसबुक लाइव, यूट्यूब वीडियो लाइव आदि प्रसारित

किया जाता है तो उसकी भी दर्शक नाम मात्र के होते हैं।

आए दिन इस बात को सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन के संबंध में जांचा भी जा सकता

है। सोशल मीडिया में बिहार सरकार के कामों के प्रति लोग कितने आकर्षित हैं और

मुख्यमंत्री एवं मंत्रियों को सोशल मीडिया में चाहने वाले कितने लोग हैं इसकी बानगी

आज मिली। रविवार को स्वास्थ्य विभाग की तरफ से आयोजित कार्यक्रम जिसमें खुद

मुख्यमंत्री शामिल थे। बिहार सरकार के आईपीआरडी के सोशल मीडिया प्लेटफार्म से उस

कार्यक्रम का प्रसारण किया जा रहा था। लेकिन सरकारी सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर

बिहार या बिहार के बाहर के लोग मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और मंत्रियों को देखना-सुनना

पसंद नहीं कर रहे थे। स्थिति यह थी कि आईपीआरडी के फेसबुक पेज पर 100 लोग भी

कार्यक्रम नहीं देख रहे थे। पूरे कार्यक्रम के दौरान एक साथ 40-60 लोग ही अपने

मुख्यमंत्री का कार्यक्रम देखने जुड़ रहे थे। स्वास्थ्य विभाग के मंत्री मंगल पांडेय जब

भाषण दे रहे थे उस समय उन्हें पचास लोग भी नहीं देख रहे थे। वहीं डिप्टी सीएम

तारकिशोर प्रसाद और रेणू देवी को भी सरकारी फेसबुक पेज पर बड़ी मुश्किल से पचास

व्यूअर मिल रहे थे।

हाल के महीनों के कार्यक्रमों में पचास लोग भी नहीं जुड़ रहे

मुख्यमंत्री की बात करें तो वे जब भाषण कर रहे थे तब 50-60 लोग उनका भाषण

आईपीआरडी के पेज पर सुन रहे थे। अब आप इसी से समझ सकते हैं कि बिहार के लोग

सीएम नीतीश और उनके मंत्रियों का भाषण सुनना कितना पसंद करते हैं। वहीं सरकारी

यूट्यूब पर 100 से अधिक लोग एक साथ कार्यक्रम देख रहे थे। वहीं,अगर विपक्षी नेताओं

की बात करें तो नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव अगर फेसबुक लाइव करते हैं तो एक साथ

हजारो लोग लाइव जुड़ते हैं। मंगल पांडे को 41और सीएम को 61लोग ही लाइव देख रहे थे।

बताया जाता है कि खुद मुख्यमंत्री ने इस स्थिति पर चिंता प्रकट की है और कार्यक्रमों को

इतना जीवंत बनाने का निर्देश दिया है जिससे अधिक से अधिक लोग लाइव उनके

कार्यक्रम को देख सकें।

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