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सुधरती अर्थव्यवस्था पर फिर से कोरोना लहर का आतंक




सुधरती अर्थव्यवस्था को लेकर बाजार काफी उत्साहित हो चला था। बड़े से लेकर छोटे कारोबारियों की आर्थिक गतिविधियां सामान्य के करीब पहुंच चुकी थी। इसी वजह से यह माना जा रहा था कि देश की अर्थव्यवस्था सुधरती हुई अब पुरानी स्थिति तक जा पहुंचेगी।




अचानक से कोरोना का प्रभाव तेजी से बढ़ने की वजह से इस पर पानी फिरता नजर आ रहा है। यूं तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह तत्काल लॉकडाउन जैसा नियम लागू करने के पक्ष में नहीं है। हर स्तर पर लोगों से सावधानी बरतने तथा भीड़ से बचने की अपील बार बार की जा रही है।

लेकिन यह भी सच है कि लोगों पर इन अपीलों का पहले से कितना असर होता है, यह हम दूसरी लहर में भी देख चुके हैं। जिन कंपनियों ने सुधरती अर्थव्यवस्था को देखकर क्षमता बढ़ाने और नियुक्तियां तेज करने की भी योजना बनाई है, वे चिंता में हैं। दिसंबर में 40 सीईओ का सर्वेक्षण किया गया, जो दर्शाता है कि कंपनियां वर्ष के दौरान अर्थव्यवस्था में उछाल आने की उम्मीद कर रही हैं।

पोल में शामिल 90 फीसदी सीईओ का अनुमान है कि उपभोक्ता खर्च, खास तौर पर ग्रामीण इलाकों में वर्ष 2022 में बढ़ेगा। वर्ष 2021 में कारों और दोपहिया वाहनों की बिक्री में गिरावट रही। भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर अपनी उम्मीद जताते हुए 53 फीसदी सीईओ ने कहा कि यह 8.5 फीसदी से अधिक बढ़ेगी, जबकि 30 फीसदी का मानना है कि इसमें उस स्तर की वृद्धि नहीं होगी। शेष ने कोई अनुमान नहीं जताया। एक विशेषज्ञ ने कहा, जीडीपी 8 फीसदी वृद्धि दिखा सकता है क्योंकि कोविड-19 की वजह से आधार घट गया था।

सुधरती अर्थव्यवस्था पर लग रहा है कोरोना का ब्रेक

लेकिन वास्तविक वृद्धि महज 3.5 या 4 फीसदी है। जब कोविड से पहले के जीडीपी के स्तर में वृद्धि होगी, तब वह वास्तविक वृद्धि होगी। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने दिसंबर की शुरुआत में भारतीय अर्थव्यवस्था की उजली तस्वीर पेश की थी। इसने कहा कि 2020-21 की पहली तिमाही में बड़े संकुचन के बाद यह उस स्थिति में आ गई है, जिसमें 2021-22 की पहली तिमाही में देश का जीडीपी 13.7 फीसदी बढ़ा है।

ज्यादातर सीईओ ने अर्थव्यवस्था के सकारात्मक परिदृश्य का अनुमान जताया। उनमें से 83 फीसदी ने कहा कि उन्होंने नए साल में नई नियुक्तियां करने की योजना बनाई है। करीब 88 फीसदी ने भी कहा कि उन्होंने 2021 में कर्मचारियों की कोई छंटनी नहीं की। सीईओ ने कहा कि हालांकि श्रमबल की मांग अभी महामारी से पहले के स्तर पर नहीं पहुंची है।




लेकिन 2021 में तिमाही दर तिमाही बढ़ोतरी से पता चलता है कि कंपनियां, खास तौर पर खुदरा बिक्री एवं इन्फोटेक जैसे क्षेत्रों की कंपनियां नियुक्तियां जारी रखेंगी। कोरोना वायरस के ओमीक्रोन स्वरूप से कुछ सप्ताह से इन योजनाओं में कुछ सप्ताह की देरी हो सकती है।

करीब 73 फीसदी सीईओ ने कहा कि वे भारत सरकार द्वारा महामारी से निपटने के लिए उठाए गए कदमों से संतुष्ट हैं। ज्यादातर लोगों का ग्रामीण भारत को लेकर सकारात्मक रुख है। उनमें से 65 फीसदी का कहना है कि नए वर्ष में ग्रामीण क्षेत्र वृद्धि में अहम योगदान देंगे। इससे दोपहिया और ट्रैक्टर विनिर्माताओं की उम्मीद बढ़ेगी।

वाहन उद्योग में तेजी से बढ़ोत्तरी की उम्मीद थी

वाहन क्षेत्र के बहुत से सीईओ ने कहा कि भारत को मांग बढ़ाने की खातिर निर्यात और आयात के अवरोध हटाने के लिए व्यापार समझौतों पर ध्यान देना चाहिए और वाहनों पर जीएसटी कर प्रणाली की समीक्षा करनी चाहिए। हालांकि कुछ चिंताएं भी हैं। 65 फीसदी सीईओ ने कहा कि कंपनियों के लिए बढ़ती लागत सबसे बड़ी मुश्किल रहेगी।

रोचक बात यह है कि कैलेंडर वर्ष 2021 में बीएसई सेंसेक्स में 20 फीसदी बढ़ोतरी के बावजूद 80 फीसदी सीईओ का मानना है कि सेंसेक्स अगले साल के अंत तक सेंसेक्स 75,000 से नीचे रहेगा, जबकि 15 फीसदी को इसके 75,000 के पार निकलने की उम्मीद है।

महामारी के सबसे बड़े सबकों के बारे में पूछे जाने पर सीईओ ने कहा कि अब कर्मचारियों की सहानुभूति एवं सेहत सबसे महत्त्वपूर्ण हैं। वे भविष्य के अपने सभी कारोबारी फैसलों में ताजा तकनीक को अपनाएंगे। सीईओ ने कहा कि 1 फरवरी को घोषित होने वाले केंद्रीय बजट से उद्योग जगत को मदद मिल सकती है।

उन्होंने कहा कि कोविड के बाद विश्व स्तरीय स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे का विकास अच्छी चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराने के लिए अहम है। सीईओ ने कहा कि सुधार के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में खपत बढ़ाने की खातिर अधिक आवंटन और प्रोत्साहन जरूरी हैं। ज्यादातर सीईओ ने कहा कि वे जलवायु परिवर्तन से संबंधित जोखिमों के कारण अगले कुछ वर्षों में शुद्ध शून्य उत्सर्जन संगठन बनने के लिए कदम उठा रहे हैं।



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