आइएल एंड एफएस ने सरका दिये तीस हजार करोड़ अधिकारी जान कर भी चुप रहे

आइएलएफएस का शानदार कार्यालय
  • पांच अनुषंगी इकाइयों में हुई गड़बड़ी

  • झारखंड से भी जुड़ रहे हैं इसके तार

  • पूर्व अधिकारियों की भूमिका की होगी जांच

रासबिहारी

नईदिल्लीः आइएल एंड एफएस में धन की गड़बड़ी की सूचना सरकार के अधिकारियों को थी।

इस जानकारी के बाद भी इन कोषों को इधर उधर किये जाने से संबंध में इन लोगों ने चुप्पी साधे रखी।

अब कंपनी के दिवालिया होने के कगार पर होने क बाद एक एक कर सारे सबूत ऊपर आ रहे हैं।

सरकार की जांच एजेंसी इन मामलों की जांच प्रारंभ कर चुकी है।

इस प्रारंभिक जांच में ही इस बात का खुलासा हो चुका है कि आइएलएंडएफएस की पांच अनुषंगी इकाइयों से मुख्य तौर पर यह गड़बड़ी हुई है।

जिन कंपनियों को इस गड़बड़ी में शामिल पाया गया है उनके नाम हैं आइएल एंड एफएस ट्रांसपोर्टेशन नेटवर्कस, फाइनेंसियल सर्विसेज, एनर्जी विकास, तमिलनाडू पावर और इंजीनियरिंग एंड कंसट्रक्शन।

इन पांचों अनुषंगी इकाइयों में ही  कंपनी का पचास फीसद से अधिक का लेनदेन दर्ज है।

सभी को मिलाकर अब तक तीस हजार करोड़ रुपये इधर उधर किये जाने की जानकारी मिली है।

जांच अधिकारी इसके आगे के तथ्यों को भी जांच रहे हैं।

इस क्रम में सरकार के दो अधिकारियों को इस बारे में पुख्ता जानकारी होने तक की पुष्टि हुई है।

जिन्होंने सूचना होने के बाद भी न तो अपने स्तर पर कार्रवाई की और न ही सरकार को इस बारे में सतर्क किया।

बताते चलें कि इस कंपनी को झारखंड में भी कई परियोजनाओं की जिम्मेदारी दी गयी थी।

आइएल एंड एफएस के तार झारखंड के पूर्व अधिकारी से भी जुड़े

इस क्रम में कंपनी के साथ झारखंड कैडर के एक पूर्व अधिकारी का नाम भी बार बार जुड़ रहा है।

वह अधिकारी कई महत्वपूर्ण विभागों में पदस्थापित रहने के बाद अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

प्रारंभिक जांच में इतना तो स्पष्ट हो गया है कि फंड को ट्रांसफर करने के मामले में

इन तमाम अनुषंगी इकाइयों के जिम्मेदार लोग भी उच्च प्रबंधन के साथ मिले हुए थे।

अब इस पैसे का क्या उपयोग हुआ है, इसकी कड़ी तलाशने का काम तेज हो गया है।

इस बीच शेयर बाजार और बैंकों में इस कंपनी के दिवालिया होने की चर्चा से अनेक चेहरों पर हवाई उड़ रही है।

इस कंपनी को सबसे अधिक कर्ज भारतीय स्टेट बैंक ने दिया था।

बैकों के अलावा कई गैर सरकारी वित्तीय कंपनियों ने भी इसमें  निवेश किया था।

समझा जा रहा है कि यदि वाकई कंपनी दिवालिया घोषित होती है,

तो इन निजी कंपनियों को भी बंद होने से कोई रोक नहीं पायेगा।

वैसे जांच में इस कंपनी के साथ प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष तौर पर जुड़े रहे

वरिष्ठ अधिकारियों की पृष्टभूमि की जांच भी रोचक होती जा रही है।

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