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इस छोटे से डायनासोर को देखकर किसी को भी डर नहीं लगेगा

  • आकार में चार ईंच की ऊंचाई थी उसकी

  • कोंगानाफोन केली नाम है इस शिकारी का

  • शायद छोटे आकार से बड़ा हुआ था डायनासोर

  • यह जीव आपकी हथेली पर भी टिक सकता था

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः इस छोटे से डायनासोर को यदि हम जीवित देख पाते तो किसी खिलौने की

तरह या फिर किसी पालतू जानवर की तरह अपनी हथेली पर उठाने की कोशिश करते।

दरअसल यह अब तक का सबसे छोटे आकार का डायनासोर है लेकिन वैज्ञानिक मानते हैं

कि आकार में छोटा होने के बाद भी उसकी क्षमता अन्य डायनासोर के जैसी ही थी।

इसलिए इस छोटे से आकार के डायनासोर का नाम कोंगोनाफोन केली रखा है, इस शब्द

का अर्थ होता है छोटे आकार का शिकारी। इस छोटे आकार के डायनासोर की फॉसिल

मैडागेस्कर के दक्षिण पश्चिमी इलाके में पाया गया है। प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक यह

पृथ्वी पर करीब 237 मिलियन वर्ष पूर्व रहता था। लंबे टांगों वाले इस प्राणी का आकार

छोटा होने के बाद भी यह दरअसल में डायनासोर ही था और हमलावर प्रजाति का ही था।

प्राचीन काल के जानवरों में डायनासोर और उड़ने वाले सरीसृपों को पेट्रोसोरस प्रजाति के

जानवरों में रखा गया है। इनके आकार के बारे में पता था कि वे विशालाकार ही हुआ करते

थे। अब इस छोटे से आकार के डायनासोर का पता चला है जो छोटे आकार के प्राणियों का

शिकार किया करता था। जो अवशेष पाया गया है उसके आधार पर वैज्ञानिक यह अनुमान

लगा रहे हैं कि यह करीब सोलह ईंच यानी चालीस सेंटीमीटर लंबा था। उसकी ऊंचाई चार

ईंच हुआ करती थी। लिहाजा यह वाकई किसी आम इंसान की हथेली में समा सकता था

यानी आज के दौर में मिलने वाले आम स्मार्ट फोन के आकार का ही था।

इस छोटे से डायनासोर के भोजन भी छोटे प्राणी थे

इस छोटे से आकार के डायनासोर के भोजन भी छोटे आकार के प्राणी ही थे। लेकिन यह

उस दौर में पृथ्वी पर था जबकि अधिकांश जीव दैत्याकार थे। यहां तक कि पानी में रहने

वाले विशालकाय मगरमच्छ भी अपने आकार की वजह से डायनासोर का शिकार किया

करते थे। इस काल में विशाल आकार के कछुए भी थे, जिनका आकार आज के किसी

सामान्य कार के जितना था। लेकिन वैज्ञानिक शोध यह बताता है कि यह सभी एक ही

प्रजाति से निकले हुए थे। इस फॉसिल के पाये जाने के बाद यह धारणा विकसित हो रही है

कि दरअसर एमिबा से पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति होने के बाद डायनासोर जैसे

विशालकाय प्राणी भी छोटे जानवरों के क्रमिक बदलाव की प्रक्रिया से पैदा हुए थे।

वैज्ञानिक शोध में इस प्राणी समूह को ओरनिथ्रोडिरा कहा जाता है। इस बारे में नार्थ

कैरोलिना म्युजियम ऑफ नेचुरल साइसेंज एंड शोध वैज्ञानिक क्रिस्टियन कैमरर करहते

हैं कि यह जीवन के क्रमिक विकास पर नई रोशनी डालने जैसी खोज है। हो सकता है कि

इसी क्षुद्राकार के जीव से ही विवर्तन की प्रक्रिया में विशाल आकार के डायनासोरों का

विकास हुआ हो। इस बार में न्यूयार्क के अमेरिकन म्युजियम के वैज्ञानिक जॉन फ्लाइन

कहते हैं कि डायनासोर प्रजाति के यहां होने के बारे में जो तथ्य मौजूद है, उसके मुताबिक

वे करीब 230 मिलियन वर्ष पूर्व पृथ्वी पर मौजूद थे। उनकी पहली प्रजाति के जो साक्ष्य

मिले हैं, वे बताते हैं कि प्रारंभिक प्रजाति के डायनासोर की लंबाई बीस फीट थी।

बाद में पैतीस फीट पंखों वाले जीव भी विकसित हुए

इसी तरह पेट्रोसॉरस प्रजाति में भी छोटे आकार के फॉसिल मिले हैं। बाद में इन दोनों

प्रजातियों में दैत्याकार जानवरों का विकास होने के प्रमाण भी मिले हैं। इनमें से एक पक्षी

के पंखों का विस्तार 35 फीट के करीब था जो आज के एक एफ 16 युद्धक विमान के जैसा

है। बाद के कालखंड में 35 मीटर लंबाई वाले डायनासोर के होने की भी पुष्टि हो चुकी है।

इसलिए यह माना जा सकता है कि अगर छोटे आकार से किसी खास वजह से बड़े आकार

के जानवर बने हों तो यह इस छोटे से डायनासोर से ही भीमाकार डायनासोर बनते चले

गये जो वाकई डरावने थे और अपने समय में पृथ्वी पर राज करते थे। यह अलग बात है

कि बाद में उल्कापिंड की बारिश की वजह से पूरी दुनिया में आग लगने की वजह से

डायनासोर सहित अनेक प्राणियों की प्रजातियों इस आग में चलकर एक ही झटके में

समाप्त हो गयी। इसी दौरान जल के अंदर के जीवन का भी ढेर सारा हिस्सा उल्कापिंड की

बारिश की वजह से खत्म हो गया। उल्कापिंड के नीचे गिरने के पहले ही रसायनिक

प्रतिक्रिया की वजह से आसमान पर बने शीशे के छोटे बड़े कण पानी में गिरकर जलज

प्राणियों के गलफड़ों में फंस गये। इससे अधिकांश प्रजातियां दम घुटने से समाप्त हो गयी

थी।


 

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