समुद्र की गर्म पानी से गायब हो जाएंगे 90 फीसद जीव जंतु

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  • मौसम के बिगड़ते तेवर से पहले भी पृथ्वी पर आ चुकी है तबाही

  • पृथ्वी पर पहले भी हो चुकी है ऐसी घटना

  • कार्बन डाइऑक्साइड घुल जाता है हवा में

  • अन्य प्राकृतिक आपदाएं भी आ जाती हैं

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः समुद्र का पानी अगर गर्म हुआ तो पृथ्वी पर एक बार फिर से तबाही आयेगी।

यह तबाही पहले भी आ चुकी है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक करीब ढाई सौ मिलियन वर्ष पहले भी समुद्र का पानी गर्म हो गया था।

तब भी इस धरती पर मौजूद जीव जंतु के 90 प्रतिशत मारे गये थे।

वैज्ञानिकों की चिंता इस बात से बढ़ी हुई है कि निरंतर विकास के चक्कर में इंसानी प्रजाति भी दुनिया को इसी ओर धकेल रही है।

इसमें एक बार समुद्र के गर्म होने की प्रक्रिया प्रारंभ हो गयी तो उसे रोक पाना इंसानों के वश में नहीं होगा।

पिछली बार जब तबाही आयी थी तो उसका कारण एक साथ कई बड़े बड़े ज्वालामुखियों का विस्फोट था।

धरती की सतह के अंदर कई टेक्नोनिक प्लेटों के टकराव की वजह से कई स्थानों पर ज्वालामुखी विस्फोट प्रारंभ हो गया था।

इससे समुद्र का पानी एक साथ कई स्थानों पर गर्म होना प्रारंभ हो गया।

इसके सिर्फ पानी के अंदर ही नहीं बल्कि जमीन पर रहने वाले प्राणी भी तबाह हो गये।

अनुमान के मुताबिक अचानक समुद्र के बहुत बड़े हिस्से का पानी गर्म होने की वजह से

समुद्र में जो असंतुलन पैदा हुआ, उससे गर्मी पानी की सूनामी ने भी

पृथ्वी के बहुत बड़े हिस्से के अपनी चपेट में ले लिया था।

एक साथ कई ज्वालामुखियों का विस्फोट हुआ था

टेक्नोनिक प्लेटों का टकराव जारी रहने की वजह से जब समुद्र का गर्म पानी जमीन पर आया

तो वहां भी इसके परिणामस्वरुप धरती फटने लगी और गर्मी औऱ बाहर आती गयी।

जिसका नतीजा हुआ कि उस वक्त धरती पर मौजूद जीव जंतुओं की 90 प्रतिशत आबादी

इस गर्मी की चपेट में आकर समाप्त हो गयी।

एक वैज्ञानिक शोध में बताया गया है कि ज्वालामुखी विस्फोट के बाद

समुद्र के गर्म में भी कुछ ऐसी ही हलचल हुई थी।

इससे समुद्र के पानी का तापमान करीब 20 डिग्री बढ़ गया था।

इस गर्मी से समुद्र के पानी में मौजूद सारी ऑक्सीजन बाहर निकल गया।

इससे समुद्र के अंदर के जीव और पौधे मारे गये।

समुद्र का सारा पानी उड़ गया और रह गयी नमकीन बंजर जमीन

समुद्र की गर्म पानी से गायब हो जाएंगे 90 फीसद जीव जंतु

कई इलाकों में जहां पानी कम था, वहां का पानी भाप बनकर उड़ गया

और पृथ्वी के समुद्र का बहुत बड़ा इलाका फिर से नमकीन बंजर जमीन का ढेर बन गया।

इसकी चपेट में जमीन पर रहने वाले प्राणी आ गये।

मीठे पानी के अभाव और अचानक मौसम के बदलाव की वजह से उस काल के प्राणी खुद को नहीं बचा पाये।

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि उस वक्त की गतिविधियों की वजह से

पृथ्वी के गर्म से वर्तमान की तुलना में करीब 12 गुणा अधिक कार्बन डाइ ऑक्साइड हवा में घुल गया था।

इसकी वजह से भी सांस लेने में परेशानियों की वजह से कई प्रजाति के प्राणी मारे गये।

वैज्ञानिकों ने इस रहस्य को समझने के लिए प्राणियों के क्रमिक विकास के क्रम को भी गहराई से देखा है।

जिसके आधार पर वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे है कि अभी जो स्थिति है,

उसमें सुधार नहीं होने पर वर्ष 2300 तक पृथ्वी में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा

वर्तमान से करीब पचास प्रतिशत बढ़ चुकी होगी।

उस स्थिति में पृथ्वी पर फिर से तबाही का क्रम अपने आप ही प्रारंभ हो जाएगा।

लेकिन वैज्ञानिक इस बात को लेकर भी आश्वान्वित है कि पृथ्वी की प्रकृति में

अपने आप को ठीक करने लेने का भी एक गुण है।

इसलिए जब कभी स्थिति बिगड़ती है तो वह एक हद तक खुद को अपने आप ही सुधार लेती है।

इसके लिए अचानक मौसम में बदलाव भी हो जाया करते हैं।

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