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विदेश नहीं तो अपने देश से ही हम कुछ सबक लें

विदेश नहीं समझ में आती है तो कमसे कम दिल्ली के हालत से भी हम सभी को सबक तो

सीख लेना चाहिए। इतना कुछ नुकसान उठाने के बाद अगर हम खुद में सुधार करना नहीं

चाहते तो कोई बाहर से आकर हमारा कल्याण नहीं करने जा रहा है। दरअसल यह भारत

के बहुमत की एक मानसिक बीमारी है कि हम खुद को आत्मानुशासित नहीं रख पाते हैं।

आज कमसे कम यह नहीं कहा जा सकता कि दूर दराज के लोगों को कोरोना को लेकर

जागरुकता का कोई अभाव है। बावजूद इसके दिल्ली में बढ़ते कोरोना के मरीजों की संख्या

के बीच हम उन्हीं गलतियों को दोहरा रहे हैं, जो हमें दोबारा से कोरोना संकट और

लॉकडाउन की तरफ धकेल सकते हैं। इस बात का एहसास सभी को है कि आर्थिक

परिस्थितियां अब दोबारा लॉकडाउन के लायक नहीं रही है। बड़ी मुश्किल से अर्थव्यवस्था

की गाड़ी थोड़ी थोड़ी खिसक रही है। उम्मीद है कि खेतों की फसल के अनाज मंडियों तक

पहुंचने के बाद स्थिति में सुधार प्रारंभ होगा और सब कुछ ठीक रहा तो हम अगले मार्च के

बाद यह उम्मीद कर सकते हैं कि देश की अर्थव्यवस्था की गाड़ी उस गति को प्राप्त कर लें

जो कोरोना के पहले की थी। लेकिन अगर अनुशासन के मामले में यही हाल रहा तो हम

फिर से पीछे चले जाएंगे और इस बार के नुकसान की भरपाई करने में हमें वर्षों लग

जाएंगे। लोगों को छूट दो देश की राजधानी यानी दिल्ली में भी दी गयी थी। उसका क्या

नतीजा निकला, यह सभी की आंखों के सामने हैं। नतीजा है कि दिल्ली सरकार फिर से

लॉकडाउन लगाने की तैयारी कर रही है क्योंकि पिछले दो सप्ताह के दौरान कोविड के

रोजाना आने वाले मामले नई ऊंचाई पर पहुंच गए हैं।

विदेश नहीं तो दिल्ली का हालत देख लीजिए

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली सरकार ने कोविड-19 के मामलों में भारी

बढ़ोतरी को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार से राजधानी के कोविड हॉटस्पॉट और

बाजारों में स्थानीय लॉकडाउन लगाने की मंजूरी मांगी है। दिल्ली के मुख्यमंत्री ने

मंगलवार दोपहर एक आपात मीडिया ब्रीफिंग में कहा, हम उन बाजारों में लॉकडाउन

लगाने का अधिकार दिल्ली सरकार को देने के लिए केंद्र सरकार को एक प्रस्ताव भेज रहे

हैं, जो कोविड-19 हॉटस्पॉट के रूप में उभर सकते हैं। इसके अलावा उनकी सरकार ने

दिल्ली के उपराज्यपाल को भी एक प्रस्ताव भेजा है, जिसमें राजधानी में शादियों में

अतिथियों की स्वीकृत संख्या को कम करने का आग्रह किया गया है। उन्होंने कहा, ‘केंद्र के

निर्देशों और नियमों के मुताबिक कोरोना वायरस के मामलों को मद्देनजर रखते हुए शादी

समारोहों में 200 लोगों को बुलाने की मंजूरी दी गई थी। पिछले आदेश को वापस लेने और

शादी समारोहों में अतिथियों की संख्या 200 से घटाकर 50 करने की मंजूरी के लिए

उपराज्यपाल बैजल को एक प्रस्ताव भेजा गया है। केंद्र के दिशानिर्देशों के मुताबिक पिछले

कुछ सप्ताह पहले जब महामारी का प्रसार नियंत्रित नजर आ रहा था, उस समय शादियों

में शामिल होने वाले लोगों की स्वीकृत संख्या बढ़ाकर 200 कर दी गई थी। केंद्रीय

स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण के मुताबिक राजधानी में लॉकडाउन लगाने के प्रस्ताव पर

केंद्र विचार-विमर्श करेगा। उन्होंने कहा, ‘अगर ऐसा कोई प्रतिबंध लगाया जाना है तो

इसकी प्रक्रिया पहले से ही तय है। अगर उपराज्यपाल की अगुआई वाले दिल्ली आपदा

प्रबंधन प्राधिकरण को राज्य सरकार से कोई प्रस्ताव प्राप्त होता है तो वे मामले पर

विचार-विमर्श करेंगे। अगर केंद्र को उपराज्यपाल के जरिये कोई प्रस्ताव प्राप्त होता है तो

वे इस पर विचार करेंगे।’

हमें अपने पास पड़ोस से भी सबक सीखना चाहिए

लेकिन उसके बाद दिल्ली सरकार के रुख में बदलाव बेवजह नहीं है। अक्टूबर के मध्य में

राजधानी में कोविड के दैनिक मामलों की संख्या 3,000 से भी कम थी, जो नवंबर के मध्य

में 8,000 से ऊपर पहुंच गई है। अनुमानों के मुताबिक इस समय दिल्ली में औसत दैनिक

मामले दुनिया की किसी भी राजधानी के मुकाबले सबसे अधिक हैं। पिछले एक सप्ताह के

दौरान दिल्ली में रोजाना औसतन 7,400 मामले आए हैं। इसी तरह दुनिया के कई अन्य

देशों में भी हालात फिर से बिगड़ने की सूचनाएं लगातार आने लगी

हैं। इन देशों और शहरों

में भी एक दूसरे से दूरी के नियमों का उल्लंघन किया गया था। सरकार के रुख में अचानक

बदलाव से कारोबारी समुदाय की चिंता बढ़ गई है। दुकानदार और छोटे कारोबारी अब

कारोबार में और नुकसान को लेकर चिंतित हैं, जिन्हें चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में

लंबे लॉकडाउन से घाटा उठाना पड़ा था। इसलिए विदेश नहीं तो कमसे कम देश की

राजधानी में बदल रहे हालात से भी हमें सबक लेकर खुद को अनुशासित करने पर ध्यान

देना चाहिए

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