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आइसलैंड की राजधानी के करीब जीवंत हो उठा ज्वालामुखी

  • बीस किलोमीटर की दूरी से साफ नजर आ रहा था

  • लोगों से कहा गया कि संकेत मिलते ही इलाका छोड़ दें

  • कई सौ गज ऊपर तक उबलकर निकल रहा था उसका लावा

  • छह हजार वर्षों तक शांत रहने के बाद अचानक बढ़ी रही सक्रियता

राष्ट्रीय खबर

रांचीः आइसलैंड की राजधानी के करीब ही एक सोया पड़ा ज्वालामुखी फिर से जागने लगा

है। वैसे इस क्षेत्र में ज्वालामुखी विस्फोट की घटनाएं आठ सौ वर्ष पूर्व भी होने का इतिहास

मौजूद है लेकिन इस बार जो जाग रहा है वह इलाका पिछले छह हजार वर्षों से शांत पड़ा

था। यह अलग बात है कि आइसलैंड के वैज्ञानिको ने इस ज्वालामुखी को सुप्तावस्था में

बताते हुए पहले से ही यह स्पष्ट कर दिया था कि यह कभी भी फिर से जाग सकता है।

वीडियो में देखिये इस जीवंत हो चुके ज्वालामुखी को

अब अचानक से वहां ऐसी सक्रियता बढ़ने की वजह से आइसलैंड की राजधानी को भी

खतरा उत्पन्न हो गया है। आइसलैंड के प्रधानमंत्री कैटरीन जाकोबसोडोट्टिर ने जनता को

सतर्क रहने को कहा है। वैसे स्थानीय मौसम विभाग ने कहा है कि फिलहाल तो कोई बड़ा

खतरा नहीं हैं लेकिन लोगों को अल्प सूचना पर इलाका छोड़ने के लिए तैयार रहना

चाहिए। जिस पहाड़ पर यह ज्वालामुखी विस्फोट प्रारंभ हुआ है, उसका नाम माउंट

पैग्रेडाल्सफिजाल है। यह दक्षिण पश्चिमी आइस लैंड के रेकजेंस पेनिनसूला के पास है।


ज्वालामुखी से संबंधित कुछ और सूचनाएं यहां देखें


खतरे की बात यह भी है कि ज्वालामुखी का यह इलाका वहां के हवाई अड्डे के काफी करीब

है। हाल के दिनों में इस देश को इस किस्म की चुनौतियां का सामना नहीं करना पड़ा था

क्योंकि पिछले आठ सौ वर्षों में यहां कोई ज्वालामुखी विस्फोट नहीं हुआ था। इसके बीच

लगातार देश में आबादी बढ़ने की वजह से नये नये इलाकों में लोग बसते चले गये हैं।

आइसलैंड के इस इलाके में भी अनेक आबादी बस चुकी है

ज्वालामुखी विस्फोट का आकार बढ़ने की स्थिति में आस पास के अनेक क्षेत्रों से लोगों को

तत्काल हटाना पड़ सकता है, यह तय है। सबसे नजदीकी सड़क से यह पर्वत करीब डेढ़

मील की दूरी पर है। इस वजह से अगर वहां से अधिक लावा का प्रवाह प्रारंभ हुआ तब भी

उसे सड़क तक पहुंचने में थोड़ा समय लगेगा। इसके बीच वैज्ञानिक उपकरणों से चौबीस

घंटे वहां के हालात पर निगरानी की जा रही है। आइसलैंड के स्थानीय वैज्ञानिकों के

मुताबिक फिलहाल तो लोगों को हटाने जैसी कोई आपात स्थिति नहीं आयी है। लेकिन

लोगों के इस ज्वालामुखी के इलाके से दूर ही रहने को कहा गया है।

आसमान पर लाल रंग देख लोगों ने समझा कि कहीं आग लगी है

जब अचानक से यह ज्वालामुखी सक्रिय हो उठा तो प्रारंभ में लोगों को इसे समझने में ही

थोड़ा वक्त लगा। इस विस्फोट से किसी को नुकसान होने की कोई सूचना नहीं है। लेकिन

अचानक से आसमान के छोर पर इस किस्म का लाल रंग फैलने से वाहन चालक ठिठक

गये थे। लोगों को कहीं भीषण आग लगने का अंदेशा हुआ था। इस वजह से आस पास के

अनेक इलाकों में यातायात जाम जैसी भी स्थिति उत्पन्न हुई। वहां यह सक्रियता रात के

पौने नौ बजे से प्रारंभ हुई है।


विज्ञान से संबंधित कुछ और रोचक खबरें यहां पढ़ें


विस्फोट प्रारंभ होने की जानकारी दरअसल एक वेबकैम से हुई और तुरंत ही सैटेलाइट

चित्रों से इस बात की पुष्टि भी हो गयी कि आइसलैंड में एक सुप्त पड़ी ज्वालामुखी सक्रिय

हो उठा है।वैज्ञानिकों के मुताबिक माउंट पैग्रेडाल्सफिजाल पर जो ज्वालामुखी फटा है

उसका इलाका करीब 550 गज लंबा है। आकार में अपेक्षाकृत छोटा होने के बाद भी इससे

इतना कार्बन डॉईऑक्साइड निकला है जो आइसलैंड देश के सभी वाहनों को मिलाकर

पचास वर्षों में होने के उत्सर्जन के बराबर है। इसलिए माना जा सकता है कि इस मामूली

से नजर आने वाले विस्फोट ने भी पर्यावरण का बहुत नुकसान किया है। वैज्ञानिकों का यह

भी आकलन है कि वहां से जो गर्मी निकली है, अगर उसका भंडारण हो पाता तो यह पूरे

उत्तरी गोलार्ध के हर घर को अगले एक सौ वर्षों तक गर्मी प्रदान कर सकता था। इस बात

से समझा जा सकता है कि दरअसल छोटा नजर आने वाले इस ज्वालामुखी विस्फोट का

कुल मिलाकर क्या प्रभाव रहा है।

विस्फोट होने के बाद अब चौबीसों घंटे हो रही है निगरानी

उसके विस्फोट की पुष्टि होने के बाद वैज्ञानिक इसपर नजर रखने लगे थे। पहाड़ की चोटी

से हो रहे इन विस्फोटों को बीस मील की दूरी से भी साफ साफ देखा जा रहा था। पहाड़ की

चोटी से कई सौ फीट ऊपर तक उछलते हुए निकलते लावा को अन्य लोगों ने भी अच्छी

तरह देखा है। वैसे वैज्ञानिक इस विस्फोट के बाद इस नतीजा पर भी पहुंचे है कि हाल के

दिनों में वहां जमीन के नीचे जो हलचल दर्ज की जा रही थी, वह इसी ज्वालामुखी के

सक्रिय होने की वजह से थी। इस विस्फोट को इस वजह से भी गंभीरता से लिया जा रहा है

क्योंकि वर्ष 2010 में एक ऐसे ही विस्फोट की वजह से पूरे यूरोप की विमान सेवा कई

सप्ताह तक बंद हो गयी थी।


कुछ अजब गजब किस्म की रिपोर्ट यहां जान लें

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