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मोदी के प्रतिनिधि के तौर पर आईबी के वरीय अधिकारी कर रहे हैं विद्रोहियों से बात चीत




  • एनएससीएन की अलग झंडा और संविधान की मांगी खारिज कर दी सरकार ने

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी : मोदी के प्रतिनिधि के तौर पर इंटेलिजेंस ब्यूरो के निदेशक अरविंद कुमार और

आईबी के विशेष निदेशक अक्षय कुमार मिश्रा को नगा शांति वार्ता को पटरी पर लाने का

काम सौंपा गया था। इंटेलिजेंस ब्यूरो ने नागा समझौता के लिए विभिन्न संगठनों के साथ

अभी बातचीत शुरू कर दिया है। ध्यान दें कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के प्रतिनिधि के तौर

पर सीधे उनके निर्देश में इंटेलिजेंस ब्यूरो के निदेशक अरविंद कुमार ने नागा संगठनों के

साथ बात करना शुरू कर दिया है। उसके बाद नागा अलगाववादी संगठन एनएससीएन

(आइएम) ने नागालैंड के लिए अलग झंडे और संविधान की मांग छोड़ दी है। इसके बजाय

अब वह नागालैंड में विधान परिषद और लोकसभा की एक अतिरिक्त सीट की मांग पर

अड़ गया है। इंटेलिजेंस ब्यूरो के निदेशक अरविंद कुमार ने इस बारे में कहा कि वैसे

एनएससीएन (आइएम) को इसके लिए भी मना कर दिया गया है। उन्हें बता दिया गया है

कि राज्य की कम जनसंख्या और मौजूदा संवैधानिक प्रावधानों के कारण यह संभव नहीं

है। अलगाववादी नागा नेताओं के साथ हो रही बातचीत पर नजर रखने वाले उच्च पदस्थ

सूत्रों के अनुसार लंबे समय से अलग झंडे और संविधान की मांग पर अड़े एनएससीएन

(आइएम) के अलगाववादी नेताओं ने इसे छोड़ने का संकेत दिया है, लेकिन इसकी जगह

अब वे नागालैंड के लिए अलग से विधान परिषद और लोकसभा के लिए एक अतिरिक्त

सीट की मांग कर रहे हैं। नागालैंड में सिर्फ विधानसभा है और लोकसभा की एक ही सीट

है। इंटेलिजेंस ब्यूरो के जानकारों के अनुसार केंद्र सरकार की ओर से एनएससीएन

(आइएम) के साथ बातचीत कर रहे खुफिया ब्यूरो (आइबी) के अधिकारियों ने अतिरिक्त

लोकसभा सीट और विधान परिषद देने में असमर्थता जता दी है।

मोदी के प्रतिनिधि के तौर पर सिर्फ संविधान के दायरे में वार्ता जारी

इंटेलिजेंस ब्यूरो के निदेशक अरविंद कुमार के अनुसार लगभग 20 लाख जनसंख्या वाले

नागालैंड में विधान परिषद नहीं दी जा सकती है। यदि ऐसा किया गया, तो पूर्वोत्तर के

अन्य राज्यों से भी इसी तरह की मांग उठ सकती है। वहीं संसद ने देश की लोकसभा सीट

की संख्या बढ़ाने पर फिलहाल रोक लगा दी है। यदि नागालैंड को अतिरिक्त सीट दी गई

तो देश के दूसरे राज्य जनसंख्या के उसी अनुपात में सीट बढ़ाने की मांग कर सकते हैं।

ऐसे में सरकार के लिए इन दोनों मांगों को मानना संभव नहीं है। विधान परिषद और

अतिरिक्त लोकसभा की सीट मांगने के पीछे की असली मंशा के बारे में पूछे जाने पर उच्च

पदस्थ सूत्र ने बताया कि पिछले कुछ सालों में नागालैंड में एनएससीएन (आइएम) की

लोकप्रियता में काफी गिरावट आई है और वहां के अन्य संगठन उसको मिल रहे विशेष

प्रश्रय के खिलाफ आवाज उठाने लगे हैं। दरअसल 1997 के युद्ध विराम समझौते के बाद से

एनएससीएन (आइएम) के कैडर ने हर जिले में कमांड सेंटर बना लिए थे। ये कमांड सेंटर

जबरन लेवी वसूली करते थे और हर सरकारी ठेके में इसका हिस्सेदारी तय होती है। युद्ध

विराम समझौते और शांति वार्ता को देखते हुए सुरक्षा बल इनके खिलाफ कोई कार्रवाई

नहीं कर रहे थे। इस दौरान,नागालैंड के राज्यपाल और केंद्र की ओर से मुख्य वार्ताकार

आरएन रवि ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जबरन वसूली पर पूरी तरह रोक लगाने और

ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कहा। जाहिर है इसके बाद एनएससीएन (आइएम)

भड़क गया और आरएन रवि को वार्ताकार से हटाने की मांग करते हुए और सीधे केंद्र

सरकार के बातचीत शुरु कर दी है, लेकिन जमीनी स्तर पर पकड़ कमजोर होने के कारण

एनएससीएन (आइएम) में अपनी बात मनवाने की पहले जैसी ताकत नहीं रही।

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