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मेरी कोशिश तो लोगों को एकजुट करने की हैः सैयद शाह अली सज्जाद

  • कांग्रेस को राज्य के दस नेताओं ने बर्बाद कर दिया

  • भागलपुर के बुनकरों के लिए भी यह हवाई सेवा जरूरी

  • अगर हवाई अड्डा बांका में बना तो उसकी लागत कम होगी

दीपक नौरंगी

भागलपुरः मेरी कोशिश तो बस लोगों को एकजुट करने की है। अब यह बात स्वीकार करने

में कोई हिचक भी नहीं हैं कि स्थानीय नेताओं ने भागलपुर की जनता को सिर्फ और सिर्फ

छला है। जिन्हें मदद कर विधायक बनाया, वे भी अपनी आदतों में सुधार नहीं कर सके।

दूसरी तरफ अगर कांग्रेस की बात करें तो राज्य के एक दर्जन नेताओं ने ही पूरे संगठन को

बर्बाद कर रखा है। इसका खामियजा बार बार कांग्रेस भुगत रही है। यह बातें राष्ट्रीय लोक

समता पार्टी के टिकट पर भागलपुर से चुनाव लड़ रहे सैयद शाह अली सज्जाद ने कही।

वीडियो इंटरव्यू में देखिये उन्होंने क्या कहा

यह उल्लेख प्रासंगिक है कि कोरोना संकट के दौर में वह अपने इलाके के हर वर्ग के लोगों

के मददगार के तौर पर लगातार सक्रिय रहे थे। इसी बात पर उन्होंने कहा कि यह भी तो

लोगों को समझने की जरूरत है कि वक्त पर उनके काम कौन आता है। श्री शाह ने कहा

कि ईश्वर ना करे कि फिर से कोरोना संकट जैसा कोई वक्त आये लेकिन इस वक्त से तो

कमसे कम भागलपुर के लोगों को इस बात की पहचान हो गयी होगी कि कौन उनके साथ

खड़ा रहा और कौन नहीं। उन्होंने कहा कि मेरी कोशिश थी कि भागलपुर की सभी सीटों में

से किसी एक पर अल्पसंख्यक को टिकट मिल जाएगा। ऐसा नहीं हो पाया। इसलिए अब

मैं अपने लोगों से अपील कर रहा हूं कि वे एकजुट रहें ताकि एकजुटता का सही प्रदर्शन

हुआ तो सभी राजनीतिक दल खुद चलकर उनके पास आयेंगे।

मेरी कोशिश तो हवाई अड्डा भी बांका में बनाने की होगी

उन्होंने इसी क्रम में भागलपुर हवाई अड्डा के निर्माण पर प्रचलित राजनीतिक लीक से

हटकर बिल्कुल नई बात कही। उन्होंने कहा कि वह खुद मानते हैं कि यह हवाई अड्डा अब

भागलपुर के बदले अगर बांका में बने तो कई तरीके से सुविधा होगी। पहली बात तो यह है

कि वहां जमीन के भाव भागलपुर के मुकाबले बहुत सस्ते हैं। इससे हवाई अड्डा निर्माण

की मूल लागत ही कम होगी। भागलपुर स महज 35 किलोमीटर की दूरी पर होने की वजह

से किसी को परेशानी भी नहीं होगी। साथ ही वहां हवाई अड्डा बना और विमान सेवा चालू

हुई तो बिहार के साथ साथ झारखंड के संथाल परगना के लोगों को भी फायदा होगा। श्री

शाह ने स्पष्ट किया कि भागलपुर के बुनकरों की स्थिति में सुधार के लिए भी हवाई सेवा

का प्रारंभ होना जरूरी है। साथ ही वह मानते हैं कि रोजगार के सवाल पर औद्योगिक

अवसरों का सृजन जरूरी है ताकि स्थानीय युवाओं को रोजगार का बेहतर अवसर मिल

सके।

तीस वर्षों से उनके साथ ही जुड़े हुए हैं झा जी

सैयद साहब के पास ही झा जी से भी मुलाकात हुई। जिनके बारे में जो सूचनाएं सैयद

साहब ने दी, उससे भागलपुर के सांप्रदायिक माहौल को नजदीक से समझने का नया

नजरिया सामने आया। उन्होंने बताया कि उनके पिता भी अंतिम दिनों में अस्वस्थ रहते

थे जो झा जी तब से उनके परिवार से जुड़े। इस घटना को अब तीस साल हो चुके हैं। पिता

जी के गुजर जाने के बाद भी परिवार से यह रिश्ता बना रहा। माता जी अस्वस्थ रहती हैं तो

यह मानिए कि अब झा जी परिवार के ही सदस्य है। भागलपुर में दंगा को लेकर लगातार

होने की चर्चाओं के बीच यह उम्मीद की एक मजबूत रोशनी की तरह है जो सैयद अली

शाह सज्जाद के नाम के साथ फैलती है।


 

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