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मानव जाति के क्रमिक विकास की एक और गुत्थी सुलझी




  • 38 लाख वर्ष पुरानी खोपड़ी इथोपिया के इलाके में मिली

  • प्राचीन नदी और झील के किनारे हो रही खुदाई

  • कुछ अन्य प्राचीन अवशेष भी मिले जिनकी जांच जारी

  • उस दौर में इंसान दो पैरों पर चलने की प्रवृत्ति सीख चुका था


प्रतिनिधि

नयीदिल्लीः मानव जाति का विकास इस पृथ्वी पर कैसे हुआ है,

यह बड़ा सवाल अब भी पूरी तरह सुलझ नहीं पाया है।

इस दिशा में लगातार शोध और अनुसंधान हो रहे हैं।

एक नये अनुसंधान में अब 38 लाख वर्ष पुरानी इंसानी खोपड़ी मिली है।

इससे कमसे कम यह स्पष्ट हो जाता है कि उस समय भी इंसान दो पैरों पर चलने वाला जीव बन चुका था।

यह खोपड़ी इथोपिया के वोरानसो- मिली इलाके में चल रहे उत्खनन के दौरान मिली है।


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अब प्रारंभिक जांच में इसकी उम्र का पता लगाने के बाद वैज्ञानिक इसी खोपड़ी के जरिए

मानव जाति के अन्य तथ्यों को जानने की कोशिश कर रहे हैं।

वैसे उस खोपड़ी की आयु 38 लाख वर्ष होने की वजह से यह माना जा सकता है कि उस काल में भी इंसानी

लगभग अपने वर्तमान स्वरुप के करीब और दो पैरों पर चलने वाला बन चुका था।


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इथोपिया में एक प्राचीन नदी और झील के किनारे हो रही खुदाई के दौरान वैज्ञानिकों को यह खोपड़ी मिली है।

वहां पर कुछ और प्राचीन अस्थियों के अवशेष भी पाये गये हैं, जिनकी जांच अभी चल रही है।

इस शोध से जुड़े वैज्ञानिक और क्लीवलैंड नेचुरल हिस्ट्री म्युजियम के वैज्ञानिक योहान्नस हेइली सेलासी

कहते हैं कि इससे उस दौर के इंसान के होने और उसके दो पैरों पर चलने भर की पुष्टि हुई है।

शेष तथ्य तो आगे की जांच के निष्कर्षों के बाद ही सामने आयेंगे।

उन्होंने पत्रकारों को इस शोध की उपलब्धियों के बारे में एक प्रेस वार्ता कर जानकारी दी।

मानव जाति के क्रमिक विकास के बारे में नई जानकारी

प्रारंभिक जांच के क्रम में वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि यह जो खोपड़ी मिली है वह किसी पुरुष की है।

उस दौर के इंसान को वर्तमान वैज्ञानिक परिभाषा में ऑस्ट्रालोपिथेकस एनामेनिस कहा जाता है।

इस प्रजाति को अति प्राचीन मानव प्रजाति की श्रेणी में रखा गया है।

दरअसल क्रमिक विकास के क्रम में चार पैरों से दो पैरों पर चलने के दौरान इंसान की कई प्रजातियां बनी हैं

और धीरे धीरे इंसान के वर्तमान स्वरुप का विकास हुआ है।

वैसे कुछ वैज्ञानिक मानते हैं कि इंसानी प्रजाति के क्रमिक विकास का क्रम अब भी जारी है।

इसकी वजह से आने वाले कुछ लाख वर्षों बाद का इंसान शायद दूसरे किस्म का होगा।


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इस प्रजाति का अनुमान तो पहले से ही था क्योंकि पहले भी इस प्रजाति के होने का पता चल गया था।

इस प्रजाति के बारे में यह कल्पना है कि इस काल का इंसान दो पैरों पर चलने वाला था

लेकिन उसके हाथ हमलोगों के हाथों के मुकाबले अधिक लंबे हुआ करते थे।

यानी यह चार पैरों से दो पैरों वाले जीव के बनने की प्रारंभिक अवस्था रही होगी।

इथोपिया के इलाके में इस प्रजाति के पाये जाने से इस बात की भी पुष्टि हुई है कि

आस्ट्रेलिया के इलाके से यह प्रजाति अफ्रीका तक जा पहुंची थी।

कुछ लोग मान रहे हैं कि उस दौर की पृथ्वी की संरचना कुछ और थी।

आस्ट्रेलिया और अफ्रीका एक साथ जुड़े होने की वजह से इस प्रजाति के

वहां पाये जाने पर कोई हैरत नहीं होनी चाहिए।

उस काल के इंसान का ललाट अभी से काफी बड़ा था




इस प्रजाति के इंसानी खोपड़ी के प्रारंभिक अध्ययन का नतीजा है कि

उस दौर के इंसान का ललाट अधिक चौड़ा हुआ करता था।

कई संरचनाओँ की वजह से ऐसा माना जाता है कि उसकी आंखों के मुकाबले ललाट का हिस्सा ज्यादा चौड़ा होता था।

अब खुदाई स्थल से ही एक और हड्डी भी मिली है, जिसके बारे में माना गया है कि

यह खोपड़ी से भी करीब एक लाख वर्ष पुरानी है। इसकी भी जांच अभी चल रही है।

इस शोध के बारे में जानकारी रखने वाले कुछ वैज्ञानिक मानते हैं कि अब इस खोज से ऐसा माना जा सकता है कि

इंसानी संरचना के विकास की प्रक्रिया कमसे कम चालीस लाख वर्ष पूर्व प्रारंभ हो चुकी थी।


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