fbpx Press "Enter" to skip to content

इंसान के क्रमिक विकास की जेनेटिक संरचना भी कोरोना रोकने में मददगार

  • एंटीबॉडी वायरस को बढ़ने से रोक देता है

  • अनेक इंसानों के अंदर स्वाभाविक तौर पर है

  • कोलंबिया विश्वविद्यालय के शोध का नतीजा

  • संक्रमण के इलाकों में भी अनेक लोग प्रभावमुक्त

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः  इंसान के क्रमिक विकास का इतिहास काफी लंबा और पेचिदा है। लेकिन अब

वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि इसी क्रमिक विकास के तहत इंसान के शरीर में हुए

जेनेटिक बदलाव भी कोरोना से बचाव के हथियार के तौर पर खड़े हैं। दरअसल कोरोना

प्रभावित इलाकों में रहने के बाद भी अनेक लोगों पर इस वायरस का घातक प्रभाव नहीं

होना ही इस शोध को समझने का कारण बना है। दरअसल इंसान के निरंतर बदलने के

क्रम में हमारी प्रतिरोधक क्षमताओं में भी बदलाव हुए हैं। इसलिए कोरोना प्रभावित

इलाकों में रहने के बाद भी कोरोना के प्रभाव से मुक्त रहने वालों पर हुए शोध से यह पाया

गया है कि प्राकृतिक तौर पर उनके शरीर में मौजूद प्रतिरोधक ही बचाव का सबसे बड़ा

हथियार बना हुआ है। वायरस के संपर्क में आने के बाद भी यही प्राचीन प्रतिरोधक शक्ति

इंसान को वायरस के प्रभाव में आने से रोक देती है। कोलंबिया विश्वविद्यालय ने इस

विषय पर शोध किया है। इसके तहत कोरोना वायरस से पीड़ित रोगियो की आंतरिक और

जेनेटिक संरचना का भी अध्ययन किया गया है। जिनलोगों के पास प्राकृतिक तौर पर यह

जेनेटिक बचाव मौजूद हैं, उनमें कोरोना का हमला होने के बाद भी शरीर के अपने कोष से

समझौता कर वायरस को आगे बढ़ने का मौका नहीं मिल पा रहा है। इस वजह से वायरस

का प्रभाव प्रारंभिक अवस्था में ही अपने आप खत्म हो रहा है। ऐसा सिर्फ जेनेटिक संरचना

की वजह से हो रहा है। यह जेनेटिक संरचना इंसान के अलग अलग तरीके से हुए क्रमिक

विकास के दौर में ही विकसित हुई है।

इंसान के क्रमिक विकास का शोध अनेक लोगों पर

दुनिया पर अचानक कोरोना हमला के कारण  अनेक लोगों पर हुए रिसर्च से पता चला है

कि शरीर में नाक या मुंह के रास्ते वायरस के प्रवेश करने के बाद भी यह वायरस उनके गले

से आगे नहीं बढ़ पाया है। दरअसल यहां से जिस तरीके से वह इंसानी फेफड़े और आंतों में

पहुंचता है, वह जेनेटिक दरवाजा ही वायरस के लिए बंद है। ऐसे में वायरस अपनी वंशवृद्धि

नहीं कर पाया। दूसरी तरफ शरीर में पहले से मौजूद प्रतिरोधक अपनी शक्ति से ही उसे

समाप्त कर रहे हैं। इसके लिए जिस पद्धति को जिम्मेदार माना गया है वह जेनेटिक

विज्ञान में कंप्लिमेंट के तौर पर जाना जाता है। यह इंसानी प्रतिरोधक शक्ति का अन्यतम

प्राचीन गुण है। जिनमें यह जेनेटिक गुण अधिक विद्यमान हैं, उनपर वायरस प्रभाव नहीं

छोड़ पा रहा है। इस जेनेटिक पद्धति की विशेषता यह है कि इसके तहत एक खास किस्म

का अलग प्रोटिन तैयार होता रहता है तो वायरस के आगे बढ़ने का रास्ता रोक देता है।

इसकी वजह से जो वायरस किन्हीं कारणों से शरीर के अंदर प्रवेश कर चुके हैं, वे भी इसके

आगे घुटने टेक देते हैं।

याद रहे कि पहले ही वैज्ञानिकों ने सामुदायिक वायरस प्रतिरोध के बारे में बताया है। इसमें

जब किसी खास इलाके में एक वायरस का संक्रमण अधिकांश लोगों को होता है तो

सामुदायिक तौर पर ही वहां के लोगों में इस वायरस का प्रतिरोधक खुद ब खुद तैयार हो

जाता है। इसके प्रतिरोधक के विकसित होने को वैज्ञानिक परिभाषा में हर्ड इम्युनिटी यानी

सामुदायिक प्रतिरोधक कहा गया है। लेकिन यह बाद में घटित होने वाली घटना है।

जेनेटिक विशेषता की वजह से पहले से ही मजबूत

जिनके पास यह जेनेटिक विशेषता पहले से मौजूद हैं, वे अपनी प्रतिरोधक शक्ति की

बदौलत वायरस को अपने अंदर और अपने से दूसरों तक पहुंचने से भी रोकने में सक्षम हैं।

इस बीच वैज्ञानिकों ने यह भी पाया है कि वायरस को अंदर पहुंचने से रोकने के लिए

कारगर समझे गये एन 95 मास्क का दोबारा इस्तेमाल भी किया जा सकता है। वैज्ञानिकों

ने इसके लिए प्रयोग भी किये हैं। इसी प्रयोग के आधार पर एन 95 मास्क को दोबारा

इस्तेमाल के लायक बनाने की सस्ती विधि भी विकसित की गयी है। इस शोध से जुड़े

कनाडा के वैज्ञानिकों के मुताबिक अगर मास्क को साठ मिनट तक सत्तर डिग्री में गर्म

किया जाए और उनमें आर्द्रता बना रही तो मास्क के वायरस अपने आप ही समाप्त हो

जाते हैं। टोरंटो विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने यह प्रयोग किया है। उनके शोध का

निष्कर्ष है कि एक बार इस प्रक्रिया से गुजारने के बाद मास्क पूरी तरह दोबारा इस्तेमाल

के लायक वायरस मुक्त पाया गाय है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस सस्ती पद्धति से एक

मास्क को कमसे कम दस बार इस्तेमाल में लाया जा सकता है।


 

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from कोरोनाMore posts in कोरोना »
More from जेनेटिक्सMore posts in जेनेटिक्स »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from पर्यावरणMore posts in पर्यावरण »
More from लाइफ स्टाइलMore posts in लाइफ स्टाइल »
More from शिक्षाMore posts in शिक्षा »
More from स्वास्थ्यMore posts in स्वास्थ्य »

2 Comments

Leave a Reply

error: Content is protected !!