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इंसानी दिमाग को भी चाहिए बेहतर और पौष्टिक भोजन







  • दिमाग पर दुनिया भर में जारी वैज्ञानिक शोध का नया निष्कर्ष

  • अधिकांश लोग अपनी दिमागी भूख को समझ नहीं पाते

  • दिमाग सुस्त पड़ने पर शरीर पर भी पड़ता है असर

  • संतुलित भोजन प्राकृतिक तौर पर उपलब्ध

  • दिमाग से शरीर को भी ताकत मिलती


प्रतिनिधि

नयीदिल्लीः इंसानी दिमाग को भी भूख लगती है।

हम अपने पेट की भूख की वजह से अधिकांश अवसरों पर इस दिमागी भूख को पहचान तक नहीं पाते।

दरअसल यह भूख दिमाग की सक्रियता की वजह से होती है।

जब दिमाग को अच्छा भोजन प्राप्त नहीं हो पाता तो वह मजबूरी में सुस्त पड़ जाता है।


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अब इसी क्रम में इंसानी दिमाग को लगने वाली भूख और उसके लिए बेहतर भोजन का भी पता चला है।

आम तौर पर वर्तमान दौर में लोग अपनी सेहत को ठीक रखने पर ज्यादा ध्यान देते हैं।

विकसित देशों में लोग और बच्चे मोटापा से परेशान है।

इसके लिए भी अलग अलग किस्म की भोजन पद्धति आजमाने पर जोर है।

यहां तक कि अब मोटापा से बचने के लिए खास किस्म के भोजन की श्रृंखला भी बतायी जा रही है।

अनुमान के मुताबिक मोटापा कम करने का कारोबार भी अरबों रुपया का है जो पूरी दुनिया में फैला हुआ है।

लेकिन वैज्ञानिक शोध यही बताता है कि शरीर के साथ साथ इंसानी दिमाग का भी

पूरी तरह स्वस्थ और सक्रिय होना जरूरी है।

इस दिमागी सेहत के ठीक नहीं होने की वजह से शरीर तंदरुस्त होने के बाद भी

अनेक किस्म की परेशानियां खड़ी हो सकती है।

वैसे दिमाग को भी भोजन भी अंततः पेट के रास्ते से ही पहुंचता है।

दरअसल पेट के अंदर गये भोजन के विखंडन की वजह से जो ऊर्जा पैदा होती है,

उसका एक परिष्कृत स्वरुप दिमाग के भोजन के तौर पर पहुंचता है।

यह शारीरिक ऊर्जा का शुद्धतम स्वरुप होता है।

इंसानी दिमाग को ठीक तरीके से काम करने के लिए ऊर्जा चाहिए




शोधकर्ता वैज्ञानिकों ने इसके लिए दिमाग के लिए खास तौर पर फायदेमंद भोजन की सूची भी तैयार कर दी है।

इसके तहत सामान्य सब्जियों के अलावा फल और बादाम श्रेणी के भोजन के साथ साथ

मांसाहार में मछली और अंडा भी शामिल किया है।

इसी कड़ी में दही और कॉफी को भी दिमाग के लिए अच्छी खुराक की श्रेणी में रखा गया है।

इस बारे में शोध करने वालों के मुताबिक गोटा अनाज भी इस लिहाज से दिमाग को अधिक ऊर्जा प्रदान करता है।

इनमें से अधिकांश ऐसे हैं तो शरीर के लिए भी फायदेमंद हैं और

शरीर को अंदर से आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करते हैं।

कुछ ऐसे भोजन भी हैं जो शरीर और दिमाग दोनों के ही कोशिकाओं को एक समान ऊर्जा प्रदान करने में सहायक हैं।

इस शोध की बेहतर जानकारी रखने वाले क्लीवलैंड क्लीनिक्स वेलनेस इंस्टिट्यूटॉ के

क्रिस्टीन किर्क पैट्रिक कहते हैं कि दरअसल यह सिर्फ इन तमाम श्रेणी के भोजन के अंदर

मिलने वाले पोषक तत्वों से होने वाले फायदे की ही गणना है।

प्रकृति ने भी इनमें मौजूद तत्वो के आधार पर ही इन्हे प्राकृतिक तौर पर रंग भी प्रदान किया है।

इस बारे में डॉ मिशेल ग्रेगर कहते हैं कि फलों के रंग से भी

उनमें मौजूद उन प्राकृतिक तत्वों की प्राकृतिक पहचान होती है, जो शरीर के अंदर प्रतिक्रिया करते हैं।

इसलिए बेहतर भोजन की श्रृंखला में वैज्ञानिकों ने लगभग पृथ्वी पर मौजूद

सभी प्रजाति के भोजनों को शामिल किया है, जिनमें सामान्य तौर पर रंगों की विविधता भी है।

हर भोजन का अपना अलग अलग महत्व है

इन सभी किस्म के भोजनों की अपनी अपनी भूमिका है।

दिमाग को भी अपनी ऊर्जा यानी भोजन के लिए अलग अलग तत्वों की आवश्यकता पड़ती है।

इसी वजह से भोजन की यह कड़ी तैयार की गयी है।

आम तौर पर इस प्रजाति में अनेक ऐसे फल और सब्जी मौजूद हैं तो प्राकृतिक तौर पर लोगों को उपलब्ध होते हैं।

इसका एक निष्कर्ष यह भी है कि सामान्य किस्म के भोजनों में

सिर्फ उनके गुणों की पहचान से भी इंसान कम खर्च में बेहतर भोजन कर सकता है।

इस किस्म के संतुलित भोजन से उनके दिमाग को भी बराबर ऊर्जा मिलती रहती है।

इससे उसका दिमाग सजीव और सतर्क बना रहता है।

दिमाग के सुस्त पड़ जाने की स्थिति में इंसान को इसका एहसास नहीं होने के बाद भी

वह सही तरीक से फैसले नहीं ले पाता और कई बार इसकी अधिक कमी होने की वजह से

वह शारीरिक तौर पर भी काम नहीं कर पाता।


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