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इंसानी दिमाग के हर प्रोटिन का पता चल गया वैज्ञानिकों को

  • मानव दिमाग ही शरीर की सबसे जटिल वैज्ञानिक गुत्थी

  • मस्तिष्क विकास ठीक करने में बड़ी उपलब्धि हासिल

  • इसके बाद सभी की भूमिका और क्षमता पर शोध

  • 17 साल लगातार शोध के बाद मिला परिणाम

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः इंसानी दिमाग वर्तमान पीढ़ी के वैज्ञानिकों के लिए भी एक अबूझ पहेली रही

है। इसे समझने और उसे सुधारने की दिशा में दुनिया का मेडिकल साइंस बहुत अधिक

तरक्की नहीं कर पाया है। इस क्रम लगातार शोध जारी है। अब इंसानी दिमाग के अंदर

मौजूद हर प्रोटिन का पता लगाया जा चुका है। इससे जाहिर है कि इन प्रोटिनों की इंसानी

दिमाग के अंदर क्या क्या भूमिका है, उसे समझ लेने के बाद वैज्ञानिक मनुष्य के

मस्तिष्क को ज्यादा बेहतर तरीके से समझ पायेंगे।

उम्मीद है कि इस गुत्थी को सुलझा लेने के बाद दिमागी परेशानियों, बीमारियों और चोटों

का ईलाज और बेहतर हो सकेगा। यह प्रमाणित तथ्य है कि इंसान के शरीर में सबसे

अधिक कठिन संरचना हमारे दिमाग की ही होती है। इसके अलग अलग हिस्सों का क्या

काम होता है, वहां तक वैज्ञानिक समझ पहुंच चुकी है। लेकिन उससे आगे का काम बहुत

धीमी गति से चल रहा है। इस शोध की गति धीमी इसलिए भी है कि लाखों न्यूरॉन की

इंसानी दिमाग के अंदर कौन कौन सी भूमिका है, इसे समझना कोई आसान काम नहीं है।

नये ब्रेन एटलस में इंसानी दिमाग के 1900 नमूनों में से 27 वैसे दिमागी क्षेत्रों का पता

लगाया गया है जो इंसानी शरीर के तमाम संरचनाओं को नियंत्रित करते हैं।

इंसानी दिमाग में शक्तिशाली सेल बहुत सुक्ष्म हैं

स्वीडन की एक प्रयोगशाला में इस पर काम काफी आगे बढ़ा है। साइंस फॉर लाइफ लैब में

यह काम होने के साथ साथ इसकी उपलब्धियों की जानकारी दी गयी है। इस संस्थान के

साथ साथ केटीएच रॉयल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और कैरोलिंस्का इंस्टिट्यूट,

स्टॉकहोम तथा उपासाला विश्वविद्यालय के शोधकर्ता भी इस काम में जुड़े हुए हैं। साथ

ही इसी परियोजना के साथ चीन और डेनमार्क के विश्वविद्यायों के वैज्ञानिक भी शामिल

हैं। इन सभी के जिम्मे इस एक परियोजना के अलग अलग भाग पर शोध को आगे बढ़ाना

है। इसी सामूहिक प्रयास का नतीजा है कि इंसानी दिमाग के अंदर मौजूद सभी किस्म की

प्रोटिनों का पता लगाया जा सका है।

शोध से इस बात की पुष्टि हुई है कि इंसानी मस्तिष्क की संरचना शूकर और चूहे के

दिमाग से मिलती होने के बाद भी सभी में काफी अंतर है। इसकी जानाकरी केटीएच रॉयल

इंस्टिट्यूट के प्रोफसर मैथियर उल्हेन ने दी है। वह ह्यूमन प्रोटिन एटलस एफोर्ट

परियोजना के निदेशक भी हैं। इंसानी दिमाग की प्रोटिन की संरचना अलग होने के साथ

साथ एक से अधिक प्रोटिनों के मिश्रण से भी अलग अलग क्रियाएं होती हैं, इसकी पुष्टि हो

चुकी है। इसलिए सतर्कता के साथ हरेक प्रोटिन की क्षमता और भूमिका को अब निर्धारित

करने का काम आगे बढ़ाया जा रहा है। यह स्पष्ट हो गया है कि इनमें से कुछ प्रोटिन

मानसिक अवस्थाओं को भी नियंत्रित करते हैं।

प्रोटिन अकेले और मिलकर अलग अलग काम करते हैं

शोध से जुड़ी दूसरी वैज्ञानिक डॉ एवलिना सजोस्टेट कहती हैं कि यह देख पाना रोचक रहा

है कि अलग अलग किस्म के कोष अलग अलग हिस्सों में अलग अलग तरीके से काम

करते हैं। यह भूमिका आस पास मौजूद अन्य अंगों की वजह से तय होती है। उन्होंने कहा

कि इंसानी दिमाग के अंदर मौजूद प्रोटिन वहां के सेलों से अलग अलग समय पर अलग

अलग काम कराते हैं। इसलिए लिए अलग अलग संकेत के रास्ते भी बने हुए हैं। इनमें से

कई रास्ते दो तरफा संदेशों का आदान प्रदान भी करते हैं। इसलिए हरेक को समझना

इतना आसान काम नहीं होगा। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि एस्ट्रोसाइट्स दिमाग के

अंदर बाहरी गतिविधियों के बारे में संकेत देते हैं लेकिन यही कोष इंसानी लीवर के अंदर

खून को साफ करने में प्रमुख भूमिका निभाता है।

वैज्ञानिकों की खोज का सामूहिक निष्कर्ष यह है कि दरअसल दिमाग के अंदर अति सुक्ष्म

नैनो ट्रांसमीटरों का एक जाल बिछा हुआ है। जो चूहों के दिमाग की संरचना से अलग हैं।

इन नैनो ट्रांसमीटरों की भूमिका भी इंसानी दिमाग में मौजूद प्रोटिन ही तय करते हैं। एक

या उससे अधिक नैनो ट्रांसमीटर मिलकर अनेक काम कर सकते हैं। लिहाजा हरेक की

क्षमता का आकलन करना समय लेने वाला काम है।

काफी लंबे समय के प्रयास के बाद अब पूरा हुआ काम

वैज्ञानिकों ने इस प्रोजेक्ट पर वर्ष 2003 से काम करना प्रारंभ किया था। शोध के प्रारंभ में

ही यह तय हो गया था कि इस योजना का मकसद इंसानी दिमाग के अंदर मौजूद प्रोटिन

सेलों को तय करना है। इतने दिनों के निरंतर शोध के बाद यह काम पूरा किया जा सका है।

अब प्रोटिनों के तय होने के बाद उनकी भूमिका पर शोध से मानव मस्तिष्क को समझने

में और मदद मिलने वाली है। लेकिन यह कोई तुरंत होने वाला काम नहीं होगा।


 

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