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गंगा में देखते ही देखते समा गयी इलाके की ढेर सारी जमीन

  • रात के अंधेरे में ग्रामीणों ने सुना था शोर
  • प्रशासनिक स्तर पर माइक से चेतावनी जारी
  • गांव के घर तक आ पहुंचा है भूस्खलन का प्रकोप
  • जलस्तर घटा तो गंगा में समा गयी 80 बीघा जमीन
प्रतिनिधि

शमशेरगंजः गंगा में अचानक भूस्खलन जैसी स्थिति से इलाके में दहशत का माहौल है।

नदी में अब पानी का स्तर नीचे उतरते ही यह हादसा अचानक हुआ है।

करीब 80 बीघा जमीन गंगा में समा जाने की इस घटना के बाद इलाके में सतर्कता के आदेश जारी किये गये हैं।

वैसे प्रशासनिक स्तर पर इसके बारे में लोगों को पहले ही आगाह कर दिया गया था, ऐसा बताया गया है।

बारिश का मौसम होने के दौरान गंगा उफान पर थी।

अब बारिश लगभग समाप्त होने के बाद नदी में जलस्तर तेजी से नीचे जा रहा है।

इसी दौरान पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के इलाके में शमशेरगंज, चाचंड, तिमतिता और प्रतापगंज के

इलाके में जमीन का टूटकर नदी में जाने का यह सिलसिला प्रारभ हो गया है।

मिली जानकारी के मुताबिक जमीन का टूटकर नदी के अंदर जाने का यह क्रम कल देर रात ही प्रारंभ हो गया था।

जमीन के टूटकर नदी में चले जाने का शोर भी गांव वालों ने सुन लिया था।

पानी काफी अधिक होने की वजह से सभी लोग नदी से काफी दूरी पर पहले से ही चले गये थे।

इसलिए मिट्टी टूटकर नदी में गिरने के शोर से ही लोग सावधान हो गये थे।

आज सुबह होने के बाद लोगों ने नजदीक जाकर इस हालत का जायजा लिया।

शमशेरगंज के बीडीओ जयदीप चक्रवर्ती ने कहा कि पूरी स्थिति पर प्रशासनिक निगरानी की जा रही है।

दूसरी तरफ फिर से भूस्खलन की इस घटना के पहले से ही कई हजार लोग बाढ़ के दौरान

अपना घर और खेत गवां चुके हैं। उनके राहत और पुनर्वास का काम भी चल रहा है।

गंगा में जमीन धंसने के बाद प्रशासन की तरफ से माइक से चेतावनी

आज शाम होते तक प्रशासन की तरफ से पूरे इलाके में माइक से सतर्कता के आदेश जारी किये गये हैं ।

नदी में अब अधिक पानी नहीं होन के बाद भी जमीन का तेजी से टूटना एक नये किस्म के खतरे का आगाज है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पता नहीं रात होते ही जमीन का इस तरीके से टूटकर गंगा में चले जाने का यह

सिलसिला कब बंद होगा।

हर सुबह लोग यह देखकर और भी परेशान हो रहे हैं कि हर रात कुछ न कुछ जमीन गंगा में चली जा रही है।

कुछ इलाकों में इस बात को लेकर भी भय का माहौल है कि जिस तेजी से जमीन टूट रही है,

उससे तो गांव के घर भी जल्द ही नदी के अंदर समा जाएंगे।

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