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हब्बल टेलीस्कोप की गड़बड़ी के ठीक पहले आयी थी अति सुंदर तस्वीरें

  • इस गैलेक्सी में अधिकांश तारे नीले रंग के हैं

  • बंद होने के ठीक पहले दूरबीन ने भेजे थे चित्र

  • विश्लेषण करने के बाद नासा ने जारी किये फोटो

  • नीले रंग के तारे दरअसल नये तैयार हुए तारे ही हैं

राष्ट्रीय खबर

रांचीः हब्बल टेलीस्कोप काफी समय से हमें सुदूर अंतरिक्ष की रोचक जानकारियां और

अति सुंदर तस्वीरें भेजता आ रहा है। कुछ दिनों पूर्व इस टेलीस्कोप में अचानक से कुछ

गड़बड़ी आ गयी थी। अभी यह गड़बड़ी दूर हो चुकी है। समझा जा रहा है कि साफ्टवेयर की

किसी गड़बड़ी की वजह से उस यंत्र ने काम करना बंद कर दिया था। लेकिन अस्थायी तौर

पर बंद होने के ठीक पहले इस हब्बल टेलीस्कोप ने कुछ रोचक तस्वीरें भेजी थी।

सुदूर अंतरिक्ष के इस सौरमंडल के अधिकांश तारे नीले

अब उनके विश्लेषण के बाद यह पाया गया है कि उसकी नजर वहां जा पहुंची है, जहां एक

गैलेक्सी में अधिकांश तारे नीले रंगके हैं। इन तस्वीरों का विश्लेषण कर लेने के बाद नासा

ने इस खलोगीय क्षेत्र को एनजीसी 2336 बताया है। नासा की तरफ से इस इलाके की

तस्वीरों को अब जाकर सार्वजनिक किया गया है। गहराई से इस क्षेत्र का अध्ययन करने

के बाद ही यह पाया गया है कि अंतरिक्ष के इस क्षेत्र में मौजूद अधिकांश तारे नीले रंग के

नजर आ रहे हैं। इसी वजह से यह इलाका काफी सुंदर दिख रहा है। वैज्ञानिक अनुमान के

मुताबिक अंतरिक्ष का यह इलाका हमारी धरती से करीब एक सौ प्रकाश वर्ष की दूरी पर है।

आकाश गंगा की तरफयह कॉंस्टेलेशन ऑफ कैमलोपार्डिस के पास मौजूद है। गत पांच

मार्च को हब्बल टेलीस्कोप की नजर इसकी तरफ गयी थी। उसके दो दिन बाद ही इस

टेलीस्कोप ने अचानक काम करना बंद कर दिया था। अब यह हब्बल टेलीस्कोप फिर से

सही ढंग से काम कर रहा है। वैसे बताते चलें कि इस टेलीस्कोप के बदले नये टेलीस्कोप

जेम्स बेव टेलीस्कोप को अंतरिक्ष में भेजने की तैयारियां चल रही हैं।

हब्बल टेलीस्कोप के बदले जेम्स वेब को भेजने की तैयारी जारी

यह नया टेलीस्कोप हब्बल के बदले काम करेगा और उसके जरिए अंतरिक्ष को और बेहतर

तरीके से देख पाने की सुविधा हासिल होगी क्योंकि यह हब्बल के मुकाबले अधिक

शक्तिशाली और आधुनिक तकनीक से युक्त है। वैसे मिली तस्वीरों का प्रारंभिक

विश्लेषण कर लेने के बाद नासा की तरफ से जारी विज्ञप्ति में यह बताया गया है कि यह

एक विशाल गैलेक्सी है, जो करीब दो लाख प्रकाश वर्ष की दूरी तक फैला हुआ है। इस खास

सौर मंडल के बीच में एक विशाल तारा है, जो किसी बार के आकार का है और दोनों तरफ

इसकी बाहें दूर तक फैली हुई है। इसी इलाके में अधिकांश तारे नीले रंग के नजर आते हैं।

वैसे यह बात भी महत्वपूर्ण है कि महाकाश में पाये गये ऐसे गैलेक्सी में यह सबसे बड़ा नहीं

है। अब तक जिन इलाकों का पता चला है उनमें आईसी 1101 सबसे बड़ी गैलेक्सी है, उसे

भी हब्बल टेलीस्कोप ने ही खोजा है। वह करीब साढ़े पांच मिलियन प्रकाश वर्ष की दूरी पर

है। और वह हमारी मिल्की वे यानी आकाश गंगा से करीब पचास गुणा अधिक बड़ा है।

हब्बल टेलीस्कोप द्वारा तलाशे गये इस खगोलीय क्षेत्र के नीले तारों के बारे में अनुमान है

कि वे नये तारे हैं। इसी वजह से उनसे तेज नीले रंग की रोशनी निकल रही है। वैसे इस क्षेत्र

का केंद्र अपेक्षाकृत कम रोशनी वाला और लाल रंग का है। इसका अर्थ है कि यहां के केंद्र के

आस पास जो तारे हैं, वे काफी पुराने हैं।

इस सौरमंडल के बीच पुराने तारे लाल रंग के

जर्मनी के खगोल वैज्ञानिक विलहैम टेंपेल ने वर्ष 1876 में इस इलाके का उल्लेख किया

था। उनके पास उस दौर का टेलीस्कोप था, जो निश्चित तौर पर आज के हब्बल टेलीस्कोप

के जितना आधुनिक और सुविधायुक्त भी नहीं था। वैसे हब्बल ने इसी बीच एक अन्य

गैलेक्सी एनजीसी 7678 की भी तलाश की है। जिसे बड़ी बांह वाला सौर मंडल कहा जा

सकता है। दरअसल पृथ्वी से करीब 164 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित यह तारा समूह एक

तरफ बहुत अधिक फैला हुआ है। टेलीस्कोप से यह एक बड़ी बांह का इलाका नजर आता

है। वैसे हब्बल टेलीस्कोप से मिली सूचनाओं और तस्वीरों के मुताबिक यह सौरमंडल भी

शायद हमारे सौर मंडल के जितनी ही फैला हुआ है। हब्बल टेलीस्कोप की मदद से

वैज्ञानिकों ने अब तक तलाशे गये सौर मंडलों का आंकड़ा 338 पर पहुंचा दिया है।

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