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जानवरों से इंसान तक कोरोना के पहुंचने का राज खुला

  • टेक्सास विश्वविद्यालय ने विश्लेषण किया

  • चमगादड़ से सबसे अधिक समानता का पता चला

  • जेनेटिक बदलाव कैसे हुआ यही सबसे अभी बड़ा सवाल

  • स्पाइक प्रोटिन के मारक असर नहीं छोड़ सकता कोविड 19

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः जानवरों में कोरोना वायरस पहले से था, ऐसा अब बताया जा रहा है। लेकिन

इसके इंसान तक पहुंचने और वैश्विक महामारी बनने के बाद लगातार यह बहस जारी है

कि यह क्या वाकई जानवरों से आने वाला वायरस है अथवा यह किसी प्रयोगशाला में

तैयार किया गया जैविक हथियार है। इस कड़ी में इसे जानवरों का वायरस मानने वाले

वैज्ञानिकों ने आगे की कड़ियों को जोडने का काम किया है। टेक्सास विश्वविद्यालय के

शोध वैज्ञानिकों ने यह कहा है कि इसकी कड़ियों को एक एक कर जोड़ा गया है। एल पासो

स्थित इस शोध केंद्र के वैज्ञानिकों ने वायरस की जेनेटिक कड़ियों और उसमें समानता

और विविधता के सारे नमूनों का अलग अलग विश्लेषण किया है। अनेक पशुओं में

प्राकृतिक तौर पर मौजूद इस वायरस से मिलते जुलते स्वरुपों की भी जांच की गयी है। इस

जांच के बाद वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि इंसानों के लिए जानलेवा वायरस का

सबसे नजदीकी संबंध चमगादड़ों में पाया जाने वाला वायरस ही है।

वुहान के बाजार से वायरस फैलने की जानकारी दी थीगुजरात के बॉयोटेक्नोलॉजी केंद्र ने सार्स कोव 2 के 131 जिनोम खोज निकाले

दरअसल इस पूरे प्रकरण पर बार बार चीन के वैज्ञानिकों द्वारा अलग अलग बयान देने से

पूरी स्थिति ही संदेहास्पद बनी हुई है। वुहान में जब यह बीमारी फैली तो प्रारंभिक अवस्था

में यह दावा किया गया कि यह वुहान के उस समुद्री प्राणियों के बाजार से फैला है, जहां

जंगली जानवर भी बेचे जाते हैं। तब प्रारंभिक रिपोर्ट यह दी गयी थी कि वुहान में पैंगोलीन

से यह वायरस इंसानों तक फैला है। इस बाजार में पैंगोलीन भी बेचे जाते थे और वहां लोग

इसे खाया भी करते थे। लेकिन उसके तुरंत बाद ही दुनिया के अन्य वैज्ञानिक शोध केंद्रों ने

इस पैंगोलीन के दावे को खारिज कर दिया था। उसके बाद से वैज्ञानिकों का एक वर्ग

लगातार यह आरोप लगा रहा है कि दरअसल यह एक जैविक हथियार है, जो वुहान के

प्रयोगशाला से निकला है। हाल ही में चमगादड़ों से वायरस फैलने की चर्चा भी आम हुई है।

दूसरी तरफ प्रारंभ से ही वैट लेडी यानी चमगादड़ महिला भी सामने आयी थी। इसी महिला

के बारे में दुनिया के अन्य वैज्ञानिक आरोप लगाते आ रहे हैं कि इसी महिला के अधीन

चमगादड़ों पर वायरस का अनुसंधान चल रहा था। उस महिला ने हाल ही में कहा है कि

कोरोना का जो संकट अभी चल रहा है वह महज एक बानगी है। अभी इसके कई झटके

पृथ्वी को झेलने होंगे। उन्होंने एक चीनी सैटेलाइट चैनल से हुई बात चीत में यह बात कही

है। इस वजह से भी चीन की दलीलों पर दूसरे यकीन नहीं कर पा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति

डोनाल्ड ट्रंप सहित कई अन्य नेता भी इस पूरे मामले की जांच की मांग कर चुके हैं। खुद

विश्व स्वास्थ्य संगठन भी एक सर्वसम्मत प्रस्ताव की वजह से इस मामले की जांच

कराने पर सहमति दे चुका है।

जानवरों में कड़ी में बदलाव क्यों, जांच जारी

अब टेक्सास विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने कहा है कि चमगादड़ और इंसानों में पाये

गये वायरस में काफी समानता है। अगर वाकई यह चमगादड़ से इंसानों तक आया है तो

शरीर की संरचना बदलने की वजह से इस वायरस के जेनेटिक कोड में भी थोड़ा बदलाव

हुआ है। यह जीन जंगली जानवर पैंगोलीन में मौजूद होता है। वैज्ञानिक मान रहे हैं कि एक

प्रजाति के जानवर के शरीर से दूसरी प्रजाति के जानवरों तक जाने में यह वायरस अपने

आप में भी बदलाव लाता है। यह परिवर्तन जेनेटिक तौर पर होता है। इसी बदलाव की

वजह से एक प्राणी के शरीर में निष्क्रिय रहने वाला वायरस दूसरे प्राणी के शरीर में जाते ही

मारक प्रभाव धारण कर लेता है।

शोध में यह पाया गया है कि यह परिवर्तन करने वाला कोई और नहीं बल्कि वायरस के

ऊपर मौजूद स्पाइक प्रोटिन ही है। इसी स्पाइक प्रोटिन की वजह से यह इंसानों के शरीर में

न सिर्फ चिपकता है बल्कि इंसानी शरीर के कोषों को तेज से अपने प्रभाव में लेता चला

जाता है। वैज्ञानिक इस रहस्यमय कुंजी की तलाश में चमगादड़ से ऊंच, पैंगोलीन और अब

इंसानों तक इसकी पहुंच को समझ चुके है।

इसी वजह से यह बताया गया है कि अगर वायरस के कवच पर यह स्पाइक प्रोटिन नहीं हो

तो यह इंसानी शरीर को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचायेगा। लेकिन यह वायरस सिर्फ

चमगादड़ से आया है इस पर शोधकर्ताओं को संदेह है। उनके मुताबिक ऐसा भी हो सकता

है कि प्रयोगशाला में तैयार चमगादड़ अथवा पैंगोलीन में यह स्पाइक प्रोटिन डाले गये हैं।

अथवा क्रमिक बदलाव की प्रक्रिया में यह प्राकृतिक तौर पर भी हो सकता है। इस वायरस

की संरचना एमिनो एसिड के जैसी है। लेकिन यह वायरस के जेनेटिक बदलाव की वजह से

ही हो पाया है, इस बारे में वैज्ञानिक सुनिश्चित हैं।

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