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कोरोना का प्रसार को समझना सबसे कठिन चुनौती




  • कई देशों में दूसरी लहर पहले से तेज

  • बिना घर से निकले भी लोग हुए पीड़ित

  • नौ करोड़ से अधिक मोबाइल आंकड़ों की जांच

  • अनेक इलाकों में फिर से पैर पसार रहा है वायरस

राष्ट्रीय खबर

रांचीः कोरोना का प्रसार की जांच पहले हो रही थी। किसी एक मरीज को कोरोना पॉजिटिव

पाये जाने के बाद उसके संपर्क में आने वालों की भी पहचान और जांच की जाती थी। जैसे

जैसे यह बीमारी फैलती चली गयी, यह जांच का सिलसिला उसी अनुपात में कम होता

चला गया। अपने देश की बात करें तो दिल्ली में कॉंटेक्ट ट्रेसिंग का यह सिलसिला जारी

रहने के दौरान ही अनेक ऐसे रोगी पाये गये थे, जो किसी कोरोना पॉजिटिव के संपर्क में भी

नहीं आये थे। इसी तरह अमेरिका में भी एक मरीज ऐसा पाया गया था जो न तो खुद

विदेश गया था और ना ही वह कोरोना पीड़ित किसी व्यक्ति से मिला था। इसलिए कोरोना

के प्रसार को समझ पाना अब कठिन चुनौती नजर आने के साथ साथ एक महत्वपूर्ण काम

बनता जा रहा है। इसे समझे बिना कोरोना के प्रसार को कारणों को दूर किये बिना यह क्रम

तो अनवरत जारी रहने वाला है। अब तो इस बात के भी प्रमाण मिल चुके हैं कि दरअसल

चीन के वुहान शहर में कोविड 19 का आधिकारिक तौर पर पता चलने के पहले ही दुनिया

के कई देशों तक यह पहुंच चुका था। अब तो कोरोना के दोबारा लौटने और पहले के

मुकाबले अधिक तेजी से फैलने की वजह से कोरोना के प्रसार के तौर तरीकों को समझना

वैज्ञानिकों के लिए ज्यादा बड़ा काम हो गया है। कई ऐसे देश और शहर भी हैं, जहां कोरोन

से बचाव के प्रावधानों का काफी सावधानी के साथ पालन किया गया था। इसके बाद भी

वहां दोबारा से कोरोना के प्रसार की सूचनाएं आ रही हैं।

कोरोना का प्रसार कैसे यह दस महीने में भी साफ नहीं

यानी पिछले दस महीनों का निरंतर शोध भी यह नहीं बता पाया है कि दरअसल यह

कोरोना वायरस फैल किस माध्यम से रहा है। इस महामारी की चपेट में मुक्त हो चुके लोग

भी दोबारा से बीमार पड़ रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि ईलाज के दौरान उनके अंदर जो

प्रतिरोधक शक्तियां विकसित हुई थीं, वे बहुत जल्दी ही समाप्त हो गयी हैं। अपने घरों में

रहने के बाद भी कोरोना की चपेट में आने वाले इस बात को प्रमाणित करते हैं कि कोरोना

के प्रसार के वैसे अदृश्य तरीके भी हैं, जो अब तक वैज्ञानिकों की आंखों से छिपे हुए हैं।

कोरोना के प्रसार के वर्तमान गतिविधियों के आधार पर वैज्ञानिक यह पहले ही बता चुके हैं

कि संक्रमित होने के बाद भी रोग के लक्षण को स्पष्ट होने में काफी समय लगता है। इस

बीच जाने अनजाने में भी वह मरीज अन्य लोगों के संपर्क में आता रहता है। इस लिहाज से

यह माना जा सकता है कि एक मरीज के संपर्क में आने की वजह से दूसरे इस संक्रमण की

चपेट में आ जाते हैं। लेकिन जो अपने घरों से ही नहीं निकलते, उन्हें कोरोना निश्चित तौर

पर बाजार से अथवा बाहर से आने वाले सामग्रियों की वजह से अपनी चपेट में लेता है।

इसकी वजह से कोरोना के प्रसार के तौर तरीकों को अब तक सही और पूरी तरह नहीं

समझा जा सका है। चिकित्सा विज्ञानी सिर्फ दो गजर की दूरी और मास्क है जरूरी का

नारा दे रहे हैं। लेकिन इसका पालन करने के बाद भी लोग पीड़ित हो रहे हैं। पहले संक्रमण

के केंद्र के तौर पर जिन इलाकों को समझा गया था, वे सभी अब व्यापारिक मजबूरियों की

वजह से खोले गये हैं।

भीड़ वाले इलाकों से दूर भी पहुंच चुका है संक्रमण पर कैसे

यानी मॉल, रेस्टोरेंट अथवा भीड़ भाड़ वाले इलाकों में अब तो भीड़ भी हो रही है। ऐसे में

कोरोना का प्रसार का तौर तरीका समझे बिना उसे रोक पाना टेढ़ी खीर है। दूसरी तरफ पूरी

दुनिया की आर्थिक हालत कुछ ऐसी हो चुकी है कि व्यापारिक गतिविधियों को दोबारा बंद

करने का फैसला भीषण आर्थिक तबाही ला सकता है।

स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय और नार्थ वेस्टर्न विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओँ ने इसके लिए

मोबाइल फोन के आंकड़ों का अध्ययन किया है। करीब नौ करोड़ 80 लाख ऐसे आंकड़ों का

विश्लेषण किया गया है। यह सभी मोबाइल धारक अमेरिका के हैं और कोरोना फैलने के

पहले दौर में उसकी चपेट में आये थे। लेकिन हर आंकड़े का विश्लेषण करने तथा मोबाइल

धारकों के आने जाने का रिकार्ड जांच लेने के बाद भी कोरोना के प्रसार के तौर तरीकों के

बारे में शोधकर्ता पक्के तौर पर कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं हैं।


 



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