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लॉकडाउन में किराये पर कोई नए नियम की उम्मीद, लोग है त्रस्त




  • लॉकडाउन बनी रेंट पेमेंट में रोड़ा
  • कैसे भरे किराये, परेशान रेंटेर्स
  • मकान मालिक भी स्थिति से वाकिफ, पर परेशान

अमित कुमार वर्मा

रांची : लॉकडाउन के कारण देश-विदेश में शांति से अर्थव्यवस्था के साथ-साथ बेरोजगारी

भी दस्तक दे चुकी है। जहां लोगों का जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। देश के

विभिन्न हिस्सों में लोग अपने राज्य, अपने शहर जाने को तरस रहे है और फंस के रह गए

है। शनिवार की रिपोर्ट के अनुसार गुरुग्राम से अपने घरों को लौटने के लिये लोगों की भीड़

जिस तरह से उमड़ी है यह इसलिए नहीं की वे लोग गुरुग्राम से रहने में असमर्थ है, बल्कि

कारोबार धंधा सब अचानक से बंद हो जाने के कारण लोगों के खाने तक के लाले पड़ गए

है। और उसपर से किराये का झंझट जो सुकून से घर में बैठने भी नहीं दे सकता।

लॉकडाउन से परेशान रांची के रेंटेर्स

बता दें कि अन्य शहरों राज्यों सहित झारखंड की राजधानी रांची का भी कुछ ऐसा ही हाल

हुआ पड़ा है जहां कोरोना महामारी के कारण लॉकडाउन की स्थिति से दुकाने बंद पड़ी हुई

है, कार्यस्थल बंद हुआ पड़ा है और लोग घर में कैद होकर रह गए है। चूंकि यह सरकारी

आदेश की बात है इसलिए इन बातों की अवहेलना करना नियम के विरुद्ध है और बढ़ते

कोरोना के प्रकोप के अनुसार गलत भी है। पर दुकाने, घर, छोटे कारोबारी, कपड़े कारोबारी,

सैलून दुकान, विभिन्न कार्यस्थल आदि जो किराये पर चल रहे है उनका रोना भी जाएज है

कि महीने के अंत के बाद किराए की मांग किए जाने पर वे क्या दे पाएंगे, चूंकि व्यापार

वगैरह अगर पूरी तरह से ठप पड़ी है तों बंद संस्थान के किराये भरे भी तों कैसे। इसके

साथ-साथ घर का खर्चा चलाना बिना कमाई के, लोन पर जारी कार्य की पेमेंट, आदि कई

तरह की उलझनों से जनता पूरी तरह से परेशान हो चुकी है। कई लोगो की नौकरी भी छुट

चुकी है और कई लोग नौकरी की तलाश में ही थे जब जनता कर्फियू के तुरंत बाद

लॉकडाउन घोषित हुआ। बता दें कि पूछताछ के दौरान रांची के विभिन्न व्यापार जगत के

साथ-साथ किराये के घर मकानों में रहने वाले अपना दुखड़ा सुना कर चिंता जताई। जहां

रोजाना कार्य कर जीने वाले लोगो के साथ आँय व्यापार कर गुज़र बसर चलाने वाले लोगों

ने बताया कि काम नहीं तो किराये के पैसे कहां से भरे। सभी डर से अपना जीवन यापन

कर रहे है। मकान मालिकों से पुछे जाने पर कई तो सरकार की बनाई नियम, व्यवस्थाओं

के साथ है तो कई ऐसे भी है जिनका कहना है कि उनका भी जीवन यापन रेंट की कमाई से

चल रहा है। अगर रेंट नहीं लेंगे तो घर चलाना मुश्किल हो जाएगा, चूंकि अगर कुछ लोगों

के पास अपना व्यापार भी है तो फिलहाल ठप पड़ा है।

लॉकडाउन के वक़्त तक किराये मामलों पर सरकार से उम्मीदे

जनता जिस स्थिति को परस्पर झेल रही है किसी तरह से चल रहे गुज़ारे पर कोरोना की

मार से परेशान लोगों ने मीडिया जगत व सोश्ल मीडिया के द्वारा सरकार से उम्मीदे

जताई है कि किराए संबंधित मामलों पर सरकार कोई नियम निकाले, जिससे तंग परेशान

लोगों को राहत मिल सकें। बाकी सरकार की लॉकडाउन व्यवस्था कोरोना को हारने की

बहुत सटीक है, लोग हर संभव अमल करने को तैयार भी है और कोशीशे कर भी रहे है।



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