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होमी जहांगीर भाभा के विमान में रत्न लेकर भी जा रहा था कोई




पर्वतारोही को इन रत्नों का हिस्सा दिया गया है
भारत सरकार एक बैग लेकर चली आयी थी
वर्ष 2013 में मिला था विमान का मलवा
वहां पर भारत के दो विमान गिर गये थे

पेरिसः होमी जहांगीर भाभा की मौत प्रारंभ से ही संदेह के घेरे में थी। जब अचानक उन्हें लेकर जा रहा विमान लापता हो गया था तो काफी दिनों तक उसका कुछ अता पता नहीं चल पाया था। चूंकि वह भारतीय परमाणु कार्यक्रमों के अगुवा थे, इसलिए उनकी मौत पर कई किस्म के सवाल उठे थे।




यूं तो आज भी उन प्रश्नों का उत्तर नहीं मिल पाया है। लेकिन पहली बार यह पता चला है कि उन्हें लेकर जाने वाले विमान का मलवा वर्ष 2013 में ही मिल गया था। एक पर्वतारोही ने इस विमान का मलवा खोजा था। वहां के घने बर्फ के ग्लेशियरों के सरक जाने की वजह से यह विमान उस पर्वतारोही को नजर आया था।

मलवे की छानबीन में हवाई जहाज के अंदर किसी के पास बेशकीमती रत्न होने की भी जानकारी उस पर्वतारोही ने स्थानीय प्रशासन को दी थी। इब इतने दिनों बाद उस पर्वतारोही को विमान से मिले बेशकीमती रत्नों का एक हिस्सा उसकी खोज के पुरस्कार स्वरुप प्रदान किया गया है।

इसी घटना ने होमी जहांगीर भाभा के दुर्घटनाग्रस्त विमान से जुड़े कुछ अन्य तथ्यों को सार्वजनिक कर दिया है। यह पहली बार बताया गया है कि भारत सरकार को इस विमान का मलवा मिलने की सूचना दी गयी थी।

उसके बाद भारतीय अधिकारी वहां गये थे। विमान में मिले एक कूटनीतिक बैग (डिप्लोमैटिक बैग) को भारतीय अधिकारी अपने साथ ले आये थे। वैसे इस बैग में क्या था, इस बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है।




मोंट ब्लैंक के इलाके में भारत के दो विमान दुर्घटनाग्रस्त हुए थे। पहला विमान वर्ष 1950 में गिरा था और दूसरा विमान वर्ष 1966 में लापता हो गया था।

होमी जहांगीर भाभा के लापता होने पर कई चर्चाएं हुई थी

इन दोनों के मलवे नजर आये तो पर्वतारोही पुलिस को इसके बारे में सूचना दी थी। अब सरकारी तौर पर बताया गया है कि विमान के मलवे में मिले बेशकीमती रत्नों का दो बराबर हिस्सा किया गया था।

दोनों की कीमत का अनुमान करीब एक लाख 69 हजार डॉलर का है। इसका एक हिस्सा उस पर्वतारोही को दिया गया है, जिसने ईमानदारी से पुलिस को सारी बातों की जानकारी दी थी।

लेकिन भारत की तरफ से यह नहीं बताया गया है कि उसके अधिकारियों ने वहां जाकर एक डिप्लोमैटिक बैग को हासिल किया था। वैसे भी इस किस्म के बैगों में क्या कुछ होता है, उसकी सार्वजनिक चर्चा नहीं की जाती है क्योंकि उसमें अति गोपनीय दस्तावेज ही होते हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेशी नीति से जुड़े होते हैं।



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