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सीमा पर तनाव के बीच पंजाबी गीत बजाने का राज खुला

  • सिख रेजीमेंट ने बीजिंग पर हमला कर युद्ध जीता था

  • बॉक्सर विद्रोह के खिलाफ आठ देशों की मित्र सेना गयी

  • आस्ट्रेलियाई लेखक के मुताबिक 62 का युद्ध भी इसी कारण

विशेष प्रतिनिधि

नईदिल्लीः सीमा पर तनाव के बीच खास इलाकों में चीन की सेना द्वारा पंजाबी गीत

बजाने को लेकर भारतीय सैनिक हैरान थे। इस बात की सूचना दिल्ली तक पहुंचायी गयी

थी। अब जाकर यह नतीजा निकला है कि सौ वर्ष से भी पहले सिख रेजीमेंट द्वारा चीन की

राजधानी बीजिंग पर किये गये हमले का कष्ट अब तक चीनी सेना भूल नहीं पायी है।

सिख रेजीमेंट ने तब भी वहां के बॉक्सर विद्रोह को कुचल दिया था। तब से चीन के अंदर

इस सिख रेजीमेंट को लेकर एक नाराजगी बनी हुई है। गलवान और बाद में प्योगोंग की 

घटना के बाद अपनी खीझ उतारने के लिए चीन के सैनिक अपनी तरफ से पंजाबी गीत

बजाकर भारतीय सेना को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। वे सिख रेजीमेंट पर अपनी सौ

वर्ष से भी अधिक समय की पुरानी नाराजगी को किसी न किसी बहाने निकालते रहते हैं

क्योंकि इस सिख रेजीमेंट ने चीन की राजधानी में विद्रोह कुचलते वक्त चीन के बागी

सैनिकों के दांत खट्टे कर दिये थे। बीजिंग तक सिख रेजीमेंट के धमकने का इतिहास अब

नये सिरे से याद दिलाया गया है। इसी क्रम में यह बात भी सामने आयी है कि उस युद्ध के

दौरान जीत हासिल करने के बाद ब्रिटिश सरकार के अधीन काम करने वाली सिख रेजीमेंट

वहां के कुछ सामान ले आयी थी। उनमें से एक लॉफिंग बुद्धा अब भी चुशुल ब्रिगेड के

मुख्यालय में रखा हुआ है। वैसे ब्रिटिश जनरल द्वारा वहां से लूटे गये अन्य सामान जब

भारत को लौटाये गये तो चीन की अन्य संपत्ति को भी भारतीय सेना ने चीन को वापस

कर दिया था।

सीमा पर तनाव के बीच पंजाबी गीत से सेना भी चौंक गयी थी

जिस कारण से चीन के सैनिक सौ साल बाद भी सिख रेजीमेंट से नाराज हैं, उस बात को

भी फिर से याद दिलाने का यह अवसर है। उस वक्त चीन के बॉक्सर विद्रोह को समाप्त

करने के लिए आठ देशों की सेना का संयुक्त अभियान चलाया गया था। इसमें ब्रिटिश

सेना की तरफ से मुख्य तौर पर सिख रेजीमेंट ही सबसे आगे थे। आठ देशों की मित्र सेना

जब आगे बढ़ी तो बीजिंग के पास भीषण युद्ध हुआ था। वहां चार सौ विदेशियों को बंधक

बनाये बैठी बॉक्सर विद्रोहियों को कुचलने में सबसे आगे सीख रेजीमेंट के सैनिक ही थे।

दोनों पक्षों की घेराबंदी करीब 55 दिनों तक जारी थी। उसके बाद मित्र सेना के बीस हजार

सैनिक अंदर घुस पाये थे और यह विद्रोह कुचल दिया गया था। जो बीस हजार की सेना

विद्रोहियों को कुचलकर विदेशी बंधकों को मुक्त कराने बीजिंग के अंदर गयी थी, उसमें

अग्रिम पंक्ति में आठ हजार सिख सैनिक थे।

बीजिंग का युद्ध जीतने वाले आठ हजार सिख सैनिक थे

चीन की तरफ से यह आरोप भी लगाया जाता है कि विदेशी सैनिकों ने वहां नागरिकों को

मारा था और महिलाओं के साथ बलात्कार भी किया था। लेकिन युद्ध की भीषण स्थिति के

बीच सिख सैनिकों को चीन अब भी याद रखे हुए हैं। इसी वजह से अब तनाव वाले इलाकों

में चीन की सेना पंजाबी लोक गीत बजाकर भारतीय सेना को उकसाने की कोशिश कर रही

है। अचानक वहां से माइक पर पंजाबी लोकगीत बजना प्रारंभ हुआ था तो भारतीय सेना भी

अचरज में पड़ गयी थी। दिल्ली तक इसकी जानकारी पहुंचने के बाद इतिहास के पन्नों में

दर्ज इस बॉक्सर विद्रोह में सिख रेजीमेंट की भूमिको याद कर अब सीमा पर पंजाबी लोक

गीतो के प्रसारण का असली राज सामने आ गया है। इस पूरे प्रकरण में पुस्तक लिखने

वाले एक आस्ट्रेलियाई इतिहासकार का मानना है कि शायद 1962 का युद्ध भी इसी

नाराजगी का परिणाम था क्योंकि चीन अपनी इस शर्मनाक पराजय को भूल नहीं पाया है।


 

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