Press "Enter" to skip to content

इटावा का ऐतिहासिक पक्का तालाब बदहाली का शिकार







इटावाः इटावा का ऐतिहासिक पक्का तालाब कई इतिहासों को समेटे हुए हैं।

अंग्रेज हुक्मरानो के आन,बान और शान का प्रतीक रहा ऐतिहासिक पक्का तालाब

अफसरशाहों के उदासीन रवैये की भेंट चढ़ कर अपनी चमक खो चुका है।

इतिहासकारों के अनुसार ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया पक्का तालाब में नौका बिहार का आनंद लेती थी।

आजादी के बाद ऐतिहासिक तालाब की देखरेख स्थानीय प्रशासन के जिम्मे रही

जिसने मरम्मत पर होने वाले खर्च के नाम पर लाखों रूपये के वारे न्यारे किये

लेकिन समय के साथ करीब दो सदी पुराने तालाब की रंगत शनै. शनै. फीकी पड़ती गयी

और आज कीचड़ और काई से लबरेज यह धरोहर अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है।

लोगो के लिए आर्कषण का केंद्र रहने वाले तालाब के फुब्बारे बंद हो गए है

वही दूसरी ओर तालाब के चारो ओर लगाई लाइट भी बंद हो गयी है ।

पानी में पसरी गंदगी से जैविक आक्सीजन में कमी के चलते जलीय जीव भी तालाब छोड़ कर जा चुके हैं।

इटावा पक्का तालाब का दुर्दशा के चलते सुबह व शाम के समय

तालाब के आसपास घूमने वाले लोगों की संख्या भी कम हो रही है।

वर्ष 2003 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के बाद

साल 2014 में पूर्व पालिका अध्यक्ष कुलदीप गुप्ता ने पक्का तालाब के सौंदर्यीकरण का जिम्मा उठाया ।

साथ ही पानी व पत्थर के बीच खाली जगह पर पेड़ पौधे भी लगाए गए ।

साथ ही 40 लाख रुपए की लागत से फुब्बारे भी लगाये गये ।

कुछ दिनों बाद ही तालाब के फुव्वारे बंद हो गए और धीरे धीरे यह दुर्दशा की ओर बढ़ने लगा।

आसपास के लोग कूड़े को तालाब में फेंकने लगे जिससे

यहां पानी भी खराब हो गया और यहां रहने वाले बतक व अन्य जलीय जीव गायब हो गए ।

स्थिति यह है कि अब पानी में दुर्गंध आ रही है लेकिन इसके बावजूद इसकी साफ-सफाई पर किसी का ध्यान नहीं है ।

पालिका के संरक्षण में आने के बावजूद तालाब के प्रति उदासीनता से लोग परेशान हैं ।



Spread the love
  • 3
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •   
  •  
  •  
    3
    Shares

Be First to Comment

Leave a Reply

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com