सृजन घोटाला : प्रिया और अमित के बारे में सूचना देने पर मिलेगा इनाम

विपिन शर्मा पी के घोष किशोर दा और राजू के बारे में मैं भी सूचना दे सकते हैं

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दीपक नौरंगी
भागलपुर  : सृजन घोटाले के अभियुक्तों की तलाश में ईनाम की घोषणा की गयी है.

आईजी सुशील खोपड़े ने यह जानकारी दी है।

उन्कहोंने कहा कि प्रिया और अमित के बारे में कोई भी व्यक्ति सूचना देगा तो उसे इनाम दिया जाएगा.

जानकारी देने वाले व्यक्ति का नाम गुप्त रखा जाएगा.

वह जानकारी मेरे मोबाइल नंबर पर या हैं व्हाटसएप के माध्यम से दे सकते हैं.

भागलपुर एसपी को भी इसकी सूचना दी जा सकती है.

भागलपुर आईजी ने कहा कि सूचना देने वाले व्यक्ति को इनाम दिया जाएगा.

सूचना सही होनी चाहिए प्रिया और अमित के अलावा विपिन शर्मा पी के घोष किशोर दा और राजू के बारे में मैं भी सूचना दे सकते हैं.

सूचना देने वाले का नाम गुप्त रखा जाएगा आईजी ने कहा कि इस मामले में पुलिस को जल्द ही बड़ी सफलता मिलेगी.

सृजन घोटाला के मास्टर माइंड नाजिर महेश मंडल की मौत हो गयी है.

महेश की मौत से बिहार की राजनीतिक तापमान बढ़ गया है.

राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने ट्वीट कर इस मामले पर सरकार पर हमला किया है.

इधर, पुलिस को सृजन घोटाले के मुख्य आरोपी के साथ रसूकदारों के फोटो भी मिले हैं.

पुलिस इसकी जांच कर रही है.

बिहार में हुआ सृजन घोटाला देश में सरकारी कर्मचारियों के भ्रष्टाचार का अनूठा सृजन है.

अपने आप में बिल्कुल नया. चौंका देने वाला.

इसमें सरकारी खाजाने से पैसा निकालकर बाजार में ब्याज पर चलाया गया.

सरकारी कर्मचारियों ने सृजन नाम की सहकारी संस्था के जरिए इस काम को अंजाम दिया.

ट्रेजरी से योजनाओं के पैसे निकाले और इन्हें सृजन के खाते में ट्रांसफर कराए.

फिर पैसे को बाजार में सूद पर लगा दिया.

यही नहीं किसी ने इन पैसों ने निजी लोगों को लोन दिया तो किसी ने सामान खरीदा.

इस मामले में अब तक सात लोग पकड़े गए हैं. घोटाले की रोज नई परतें खुल रही हैं.

लाभान्वित होने वालों में सरकारी अफसर ही नहीं, कारोबारी, रीयल एस्टेट के मालिक, बैंक कर्मी और राजनेता तक शामिल हैं.

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भागलपुर की सृजन महिला सहयोग समिति लिमिटेड से मिलकर इन लोगों ने 560 करोड़ रुपए का घोटाला किया है.

यह शुरूआती फिगर है. जिस तरह दायरा बढ़ रहा है संकेत हैं कि घोटाले की रकम 1000 करोड़ को पार कर जाएगी.

1996 में प्रकाश में आये चारा घोटाले की 960 करोड़ के गबन को यह घोटाला पीछे छोड़ देगा.

स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप

सृजन मामले को लेकर शनिवार को सिविल सर्जन कार्यालय में हड़कंप मचा हुआ है.

वहां मामले की जांच के लिए ईओयू और एसएसपी की टीम पहुंची थी.

यह है कि सबकी जुबान पर एक ही बात की चर्चा है कि पता नहीं अब क्या होगा.

कौन पकड़ा जाए, कहना मुश्किल हो गया है.

सदर अस्पताल में जननी एवं बाल सुरक्षा योजना के तहत लाभुकों को दी जाने वाली राशि को लेकर भी कर्मचारी डरे हुए थे.

उन्हें चेक देने में भी डर लग रहा है कि पता नहीं आगे क्या हो जाए.

प्रखंड अधिकारियों से साठगांठ कर खुलवाए थे खाते

शेयर घोटाले में जिस तरह से हर्षद मेहता ने सरकारी खजाने को लूटा.

ठीक इसी तरह सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड ने सरकारी खजाने का उपयोग किया.

अधिकारियों से सृजन की ऐसी साठगांठ थी कि नियम के विरुद्ध प्रखंडों के सरकारी खाते में यहां खुलने लगे.

कई प्रखंडों के सरकारी खाते सृजन में ही खुले थे.

2006 में डीएम सभी प्रखंडों के अधिकारियों को सृजन का खाता बंद करने का निर्देश दिया था.

डीएम के निर्देश के बाद भी सबौर के बीडीओ-सीओ ने खाता बंद नहीं किया था.

बाद में दोनों अफसरों को डीएम ने सख्त चेतावनी दी, तब जाकर खाता बंद किया गया.

वर्षों से यहां यहीं खेल चलता आ रहा था.

 डर से खाता किया था बंद

जानकारी यह भी है कि इसी जिला के एक प्रखंड में नजारत का पूरा पैसा सृजन के खाते में जमा होता था. एक कर्मचारी ने इसका विरोध कर दिया था. तर्क दिया गया कि सरकारी पैसे को निजी संस्था में कैसे जमा कर सकते हैं. यह तो गबन का मामला बन जाएगा. इसके बाद एसबीआई के मेन ब्रांच में नजारत का खाता खुलवाया गया था.

आईएएस का था खाता

जानकार सूत्रों के अनुसार एक आईएएस ऑफिसर का भी पूर्व में खाता खुला था.

बाद के दिनों में उसे बंद कर दिया गया था.

उस अफसर से सृजन की सचिव मनोरमा देवी की बहुत घनिष्टता थी.

संस्था के हर बड़े आयोजनों में वह अधिकारी वहां भाग लेता था.

सीए से तैयार करवाया गया था घोटाले का पूरा प्लान

कैसे होता था अपनी तिजोरी भरने का काम होता था.

सबसे पहले तो संस्था ने एक विश्वासी सीए से बात कर पूरा प्लान तैयार किया.

मकसद था कि गड़बड़ी होने पर कागजी तौर पर बचा जा सके.

इसके तहत एनजीओ को ननबैंकिंग बनाया गया.

नियम बना कि संस्था के जो सदस्यों को जरूरत के अनुसार लोन से दिया जाएगा.

सीतामढ़ी में 168 करोड़ रुपए फ्रीज

जांच में भागलपुर के बाद सीतामढ़ी में भी 168 करोड़ की गड़बड़ी सामने आई है.

मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह ने शनिवार को कहा कि सीतामढ़ी मामले में पैसा बैंक ही पड़ा हुआ है.

इसे निकाला नहीं जा सका है. इस रकम को फ्रीज कर दिया गया है.

वहीं भागलपुर में अब तक 418 करोड़ की गड़बड़ी सामने आई है.

मुख्य सचिव ने कहा कि दो जिलों के अलावा कहीं से गड़बड़ी सामने नहीं आई है.

भागलपुर में यह देखा जा रहा है कि पैसा सरकारी खाते से निकाल कर कहां भेजा गया है.

इसको ट्रैक कर पूरे नेटवर्क का सफाया किया जाएगा.

इस मामले में गिरफ्तार किये गये अधिकारियों और कर्मचारी को पुलिस ने सोमवार की देर शाम तक जेल भेजा है.

इनमें पंकज झा हरिशंकर उपाध्याय सुधांशु कुमार दास विजय कुमार गुप्ता अशोक कुमार अशोक एक महिला सुनीता चौधरी हैं.

इन सभी को पुलिस ने 48 करोड़ की हेराफेरी में जो कोऑपरेटिव बैंक मैं इनके द्वारा घोटाला किया गया था.

इस मामले में पुलिस ने कुछ लोगों से पूछताछ कर रही है

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