fbpx Press "Enter" to skip to content

हिन्दी फिल्मों की मशहूर अदाकारा निम्मी का निधन

मुम्बईः हिन्दी फिल्मों की मशहूर अदाकारा निम्मी का यहां निधन हो गया। वह 88 वर्ष

की थीं। निम्मी की भतीजी ने गुरुवार को बताया कि बुधवार की शाम यहां निम्मी का

निधन हो गया। वह सांस की बीमारी से पीड़ित थीं तथा जुहू में घर के पास एक

अस्पताल में उन्हें भर्ती कराया गया था। उनका अंतिम संस्कार आज दोपहर बाद किया

गया। फिल्मी पर्दे पर 50 और 60 के दशक में अपना जलवा दिखाने वाली कलाकार

निम्मी का जन्म के समय नाम नवाब बानो था। और अपने जमाने के निर्माता निर्देशक

और अभिनेता राजपूर ने स्क्रीन पर उन्हें निम्मी नाम दिया था। निम्मी ने अपने

फिल्मी करियर की शुरुआत फिल्म ‘बरसात’ में वर्ष 1949 में की थी। निम्मी ने कई

वर्षो तक राजकपूर, देवानंद और दिलीप कुमार के साथ काम किया। वर्ष 1952 में बड़े

बजट की फिल्म ‘आन’ में उन्होंने खास भूमिका निभायी। इस फिल्म में दिलीप कुमार,

प्रेम नाथ और नादिरा ने भी ने उनके साथ काम किया। निम्मी की शादी लेखक अली

राजा के साथ हुई। उनका वर्ष 2007 में निधन हो गया था। पूरी फिल्म जगत में निम्मी

के निधन की खबर फैलते ही शोक की लहर दौड़ गयी। प्रसिद्ध फिल्म निर्माता महेश भट्ट

ने ट्वीट कर उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

हिन्दी फिल्मों  में निम्मी को एक ऐसी अभिनेत्री के तौर पर शुमार किया जाता है

जिन्होंने पचास और साठ के दशक में महज शोपीस के तौर पर अभिनेत्रियों को

इस्तेमाल किये जाने जाने की विचार धारा को बदल दिया और अपने दमदार अभिनय

से दर्शकों के बीच खास पहचान बनायी। निम्मी का जन्म 18 फरवरी 1933 को आगरा

में हुआ था। उनका मूल नाम नवाब बानू था।

हिन्दी फिल्मों में आने से पहले उनका नाम नवाब बानू था

उनकी मां वहीदन मशहूर गायिका होने के साथ फिल्म अभिनेत्री भी थीं और उन्होंने

मशहूर निर्माता-निर्देशक महबूब खान के साथ कुछ फिल्मों काम किया था। निम्मी के

पिता मिलिट्री में कान्ट्रेक्टर के रूप में काम करते थे। निम्मी जब महज नौ वर्ष की थी

तब उनकी मां का देहांत हो गया। इसके बाद वह अपनी दादी के साथ रहने लगी। भारत

विभाजन के पश्चात निम्मी मुंबई आ गयी। इसी दौरान उनकी मुलाकात निर्माता-

निर्देशक महबूब खान से हुयी। महबूब खान इसके पहले उनकी मां को लेकर कुछ

फिल्मों का निर्माण कर चुके थे। वह उन दिनो अपनी नई फिल्म ‘अंदाज’ का निर्माण

कर रहे थे। उन्होंने निम्मी को फिल्म स्टूडियों मे बुलाया। फिल्म ‘अंदाज’ के सेट पर

निम्मी की मुलाकात अभिनेता राजकपूर से हुयी जो उन दिनों अपनी नई फिल्म

‘बरसात’ के लिये नये चेहरों की तलाश कर रहे थे और मुख्य अभिनेत्री के लिये नरगिस

का चयन कर चुके थे। राजकपूर ने निम्मी की सुंदरता से प्रभावित होकर उनके सामने

इस फिल्म में सहायक अभिनेत्री के रूप में काम करने का प्रस्ताव रखा जिसे उन्होंने

स्वीकार कर लिया।

बरसात की सफलता से वह फिल्म जगत में प्रसिद्ध हो गयी

वर्ष 1949 में प्रदर्शित फिल्म ‘बरसात’ की सफलता के बाद अभिनेत्री निम्मी फिल्म

इंडस्ट्री में रातो-रात अपनी पहचान बनाने में सफल हो गयी। वर्ष 1952 में प्रदर्शित

फिल्म ‘आन’ निम्मी के सिने करियर की एक और महत्वपूर्ण फिल्म साबित हुयी।

महबूब खान निर्मित इस फिल्म की खास बात यह थी कि यह हिंदुस्तान में बनी पहली

टेक्नीकलर फिल्म थी और इसे काफी खर्च के साथ वृहत पैमाने पर बनाया गया था।

दिलीप कुमार, प्रेमनाथ और नादिरा की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म में निम्मी ने

अतिथि भूमिका निभाई थी। फिल्म आन से जुड़ा एक रोचक तथ्य यह भी है कि भारत

में बनी यह पहली फिल्म थी जो पूरे विश्व में एक साथ प्रदर्शित की गयी। पचास के

दशक में निम्मी की लोकप्रियता का अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि उन

दिनों जब फिल्म की पहली झलक वितरक को दिखाई गयी तो उन्होंने फिल्म निर्माता

से निम्मी के रोल को बढ़ाने की मांग की और उनके जोर देने पर निम्मी पर एक

ड्रीमसाँग फिल्माया गया जो श्रोताओं के बीच काफी लोकप्रिय हुआ। फिल्म ‘आन’ की

सफलता के बाद निम्मी को एक बार फिर से महबूब खान की ही फिल्म ‘अमर’ में काम

करने का अवसर मिला। बलात्कार जैसे संवेदनशील विषय बनी इस फिल्म में निम्मी

के अलावा दिलीप कुमार और मधुबाला की मुख्य निभाई थी।

हालांकि फिल्म व्यवसायिक तौर पर सफल नहीं हुयी लेकिन निम्मी के दमदार

अभिनय को आज भी सिने दर्शक नही भूल पाये है। महबूब खान भी इसे अपने सिने

करियर की महत्वपूर्ण फिल्म मानते हैं।

हिन्दी फिल्मों के निर्माण में भी निम्मी ने हाथ आजमाये

वर्ष 1954 में निम्मी ने निर्माण के क्षेत्र में भी कदम रख दिया और फिल्म डंका का

निर्माण किया। वर्ष 1955 में उन्हें महान निर्माता निर्देशक सोहराब मोदी की फिल्म

‘कुंदन’ में काम करने का मौका मिला जिसमें उन्होंने मां और बेटी की दोहरी भूमिका

निभाकर दर्शकों को रोमांचित कर दिया। निम्मी ने अपने सिने करियर में उस दौर के

सभी दिग्गज अभिनेता के साथ अभिनय किया। राजकपूर के साथ भोला -भाला प्यार

हो या फिर अशोक कुमार और दिलीप कुमार के साथ संजीदा अभिनय या देवानंद के

साथ छैल-छबीला रोमांस निम्मी हर अभिनेता के साथ उसी के रंग में रंग जाती थीं। वर्ष

1957 में प्रदर्शित फिल्म ‘भाई -भाई’ निम्मी के सिने करियर की महत्वपूर्ण फिल्मों मे

एक है। इस फिल्म में अपने दमदार अभिनय के से उन्होंने दर्शको के साथ ही समीक्षको

का भी दिल जीत लिया और उन्हे क्रिटिक्स अवार्ड से भी सम्मानित किया गया। पचास

के दशक के अंतिम वर्षो में निम्मी को चेतन आंनद की अंजली और विजय भटृ की

बंसत बहार जैसी फिल्मों मे काम करने का अवसर मिला। इसी दौरान निम्मी को

ख्वाजा अहमद अब्बास की विवादास्पद फिल्म ‘चार दिल चार राहे’ में भी काम करने

का अवसर मिला जिसमें उनके अभिनय को जबरदस्त सराहना मिली।

बाद में काफी सोच समझकर फिल्में लेने लगी थीं वह

इसके बाद निम्मी हिन्दी फिल्मों के मामले में बहुत चूजी हो गयी और कम फिल्मों मे

अभिनय करने लगी। उन्होंने बी.आर.चोपड़ा की फिल्म ‘साधना’ और ‘वो कौन थी’ में

काम करने से मना कर दिया। यह अलग बात है कि बाद में दोनो फिल्में टिकट खिड़की

पर सफल हुयीं। वर्ष 1963 में प्रदर्शित फिल्म ‘मेरे महबूब’ निम्मी के सिने कैरियर की

सुपरहिट फिल्मों में शुमार की जाती है। अशोक कुमार, राजेन्द्र कुमार और अमीता की

मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म में निम्मी ने अपने दमदार अभिनय से दर्शकों का दिल

जीत लिया और इसके साथ ही उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्म फेयर पुरस्कार के

लिये नामांकित भी किया गया । वर्ष 1965 में प्रदर्शित फिल्म आकाश दीप निम्मी के

सिने करियर की अंतिम फिल्म साबित हुयी। इसके बाद उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री से

किनारा कर लिया। निम्मी ने अपने चार दशक लंबे कैरियर में लगभग 50 फिल्मों में

अभिनय किया।


 

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from फ़िल्मMore posts in फ़िल्म »

Be First to Comment

Leave a Reply

error: Content is protected !!
Open chat