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हिलसा मछली की ही बाढ़ आयी है इस बार बांग्लादेश की नदियों में

  • अनेक दिनों के बाद मछुआरों को मिल रही मछली

  • अधिक आमद होने की वजह सरकारी नियंत्रण भी

  • कारोबारी अब निर्यात की अनुमति मांग रहे हैं

सुभाष दास

अगरतलाः हिलसा मछली का ऐसा कारोबार पिछले अनेक वर्षों में नहीं हुआ था। इस

कारण बांग्लादेश में इस बार मछली कारोबारी खुश हैं। उनकी प्रसन्नता का असली कारण

इस बार हिलसा मछली का कारोबार अचानक से उफान पर आना है। समंदर और नदी के

मुहानों पर मछली की यह प्रजाति पायी जाती है।

वीडियो में देखिये बांग्लादेश में हिलसा का कारोबार

इस प्रजाति को बचाने और संरक्षण देने के लिए बांग्लादेश सरकार पिछले कुछ वर्षों से कई

कदम उठा रही है। शायद इस बार नदियों में पर्याप्त पानी और मौसम के असर में हिलसा

की पैदावार जबर्दस्त हुई है। इसका नतीजा है कि बांग्लादेश के बाजार में यह हिलसा

मछली भरी पड़ी है। मछली बार में इस मछली के आने और अधिक माल आमद की वजह

से कीमत कम होने की वजह से ग्राहकों का सारा ध्यान इसी पर है। वैसे भी मछली के

शौकीन लोगों के लिए यह सबसे स्वादिष्ट मछली मानी जाती है। जिसमें बहुत अधिक

कांटे होते हैं। इस वजह से आम आदमी इस मछली को नहीं खा सकता। लेकिन इस बार

हिलसा सस्ती होने की वजह से आर्थिक संकट के दौर में भी लोग इसे काफी खरीद रहे हैं।

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मिली जानकारी के मुताबिक सरकारी तौर पर प्रतिबंध होने के बाद भी बांग्लादेश के लोग

अपने परिचितों को भारत में यह मछली चोर दरवाजे से पहुंचा रहे हैं। इस वजह से त्रिपुरा

और पश्चिम बंगाल के कई मछली मंडियों में भी इसकी आमद और बिक्री बढ़ी है।

हिलसा मछली के निर्यात की अनुमति चाहते हैं कारोबारी

इस मछली की आमद बहुत अधिक होने की वजह से मछली कारोबारी इसके निर्यात की

अनुमति मांग रहे हैं। उनकी मांग है कि विदेशों में इसका अधिक मांग होने की वजह से

मछली के निर्यात से मछुआरों और मछली कारोबारियों, दोनों को निर्यात की छूट से

आर्थिक लाभ होगा। आम तौर पर पानी के जहाज के एक कंटेनर में दस से बीस टन

हिलसा मछली भेजी जा रही है। इसकी शर्त दूसरी मछलियो के साथ इतनी ही मात्रा में

भेजना है। लेकिन इस बार मछली की खेती की इस फसल की सफलता की हकदार

बांग्लादेश की सरकार भी है, जिसनें पिछले जून महीने से ही इसके शिकार पर रोक लगा

दी थी। समंदर और नदी के मुहानों पर कड़ी निगरानी की वजह से इस प्रजाति की

मछलियो को वंश वृद्धि करने और आकार में बढ़ने का पूरा मौका मिला है। अब इस मौसम

में उन्हें पकड़ने के बाद तुरंत ही बर्फ में ढककर अन्यत्र भेजा जा रहा है।


 

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