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हेमंत सोरेन की सरकार बिल्कुल सही रास्ते पर

हेमंत सोरेन की सरकार ने अब तक सारे सही फैसले लिये हैं। विरोधियों द्वार सरकार के इंतजामों की आलोचना

किये जाने के बाद भी इसे अस्वीकार नहीं किया जा सकता है कोरोना की भीषणता को हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री

नरेंद्र मोदी के पहले ही समझ लिया था। इसी वजह से झारखंड में राष्ट्रीय स्तर पर लॉक डाउन की

घोषणा होने के पहले ही फैसला ले लिया गया था। लोगों के आवागमन पर समय से पहले

लगायी गयी रोक का ही परिणाम है कि अब तक देश में कोरोना का विस्फोट नहीं हो पाया है।

यह तय है कि देश में तेजी से कोरोना के रोगी बढ़ रहे हैं लेकिन लोगों को एक खास स्थान

तक सीमित रखने के फैसले की वजह से देश के कई अन्य भाग अथवा राज्य के जिले

इसके प्रभाव से पूरी तरह मुक्त है। झारखंड के संदर्भ में चर्चा करें तो चार जिलों के छोड़ दें

तो शेष सभी में कोरोना का संक्रमण शून्य है। हो सकता है कि बोकारो के जिस मरीज की मौत हुई है,

उसकी वजह से गिरिडीह का एक खास इलाका इसकी चपेट में आया हो।

फिर भी यह तय है कि हेमंत सोरेन की सरकार इस कोरोना के विस्तार को रोकने

की पहल कर बेहतर फैसला लेने में सफल साबित हुई है। लगातार काम को विस्तार देते हुए अब हेमंत सोरेन ने

कोरोना संबंधी जिम्मेदारियों का भी विकेंद्रीकरण कर दिया है। इस संकट के दौर में राज्य के कई मंत्री अत्यंत

सक्रिय भूमिका निभाने में आगे नजर आ रहे हैं। अब जबकि खुद नरेंद्र मोदी ने देश के नाम अपने संबोधन में लॉक

डाउन की अवधि बढ़ाने का एलान किया है तो झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने तुरंत ही उसका समर्थन भी

किया है।

हेमंत सरकार ने लॉक डाउन का फैसला सबसे पहले लिया

इसके पहले भी हेमंत सोरेन सहित कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने खतरे को देखते हुए लॉत डाउन की अवधि बढ़ाने

पर ही बल दिया था। झारखंड में लॉकडाउन मामले पर फैसला लेने के लिये ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की कमेटी बना दी

गयी है। यह कमेटी लॉकडाउन की स्थिति पर अध्ययन के बाद फैसला लेगी। इस समिति में वित्त मंत्री रामेश्वर

उरांव, श्रम मंत्री सत्यानंद भोक्ता, अनुसूचित जाति व कल्याण मंत्री चंपाई सोरेन शामिल हैं। स्वास्थ्य मंत्री बन्ना

गुप्ता को समन्वयक बनाया गया है। उक्त मंत्रिमंडलीय उप समिति कोविड-19 से निपटने के लिये अपनी अनुशंसा

राज्य सरकार को देगी। साथ ही, लॉकडाउन से संबंधित निर्देशों का प्रभावी तरीके से अनुपालन सुनिश्चित

करायेगी। कैबिनेट ने कोविड-19 संक्रमण एवं संभावित महामारी को देखते हुये राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम से

अनाच्छादित परिवारों को माह अप्रैल एवं मई 2020 के लिए प्रति परिवार दस किलोग्राम चावल प्रतिमाह के लिए

उपलब्ध कराने के लिये 36.11 करोड़ रुपए की स्वीकृति प्रदान की गयी है। साथ ही, कोविड-19 से उत्पन्न संकट को

देखते हुए सभी पूर्वविक्ता प्राप्त गृहस्थ एवं अंत्योदय परिवारों को माह अप्रैल एवं मई के लिए एक रुपए प्रति

किलोग्राम की दर से फ्री फ्लो रिफाइंड आयोडीनयुक्त नमक के एक किलोग्राम के एक-एक अतिरिक्त पैकेट

उपलब्ध कराने के लिए वित्तीय वर्ष 2020-21 में अतिरिक्त राशि दस करोड़ रुपए अनुपूरक आगणन के माध्यम से

उपबंध एवं व्यय की घटनोत्तर स्वीकृति दी गई। इसके अलावा विधायक योजना अंतर्गत कोविड-19 के दौरान

आर्थिक समस्याओं का सामना करने वाले परिवारों को आर्थिक सहायता के लिए प्रावधान को स्वीकृति दी गई है।

गरीबों को राहत पहुंचाने के लिए कई कार्यक्रम घोषित

इसके अंतर्गत राज्य के विभिन्न जिलों, प्रखंडों, पंचायतों के ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना वायरस से प्रभावित वैसे

परिवार जिनके पास वर्तमान में उत्पन्न इस आपात स्थिति में दैनिक आवश्यकता की वस्तुओं जैसे- खाद्य

सामग्री, दवाइयां इत्यादि क्रय करने की आर्थिक क्षमता नही है उन्हें लॉकडाउन अवधि में एक बार एक हजार रुपये

देने का प्रावधान किया गया है। दूसरे राज्यों में फंसे प्रवासी को पूरे लॉकडाउन अवधि में एक बार दो हजार रुपए

संबंधित विधानसभा क्षेत्र के विधायक की अनुशंसा पर डीबीटी के माध्यम से दी जायेगी। कैबिनेट ने किसानों को

हुई क्षति की भरपायी के लिये राहत पैकेज की घोषणा की है। इसके तहत राज्य के सात जिलों के 55 प्रखंडों को

सूखाग्रस्त घोषित करने की स्वीकृति दी गई है। इन तमाम फैसलों से यह साफ है कि हेमंत सोरेन की सरकार कमसे

कम कोरोना के मोर्चे पर सभी पहलुओं पर एक साथ ध्यान तो दे रही है। दूसरों से पहले बचाव की तैयारी करना तथा

इस परिस्थिति में गरीबों के लिए दो वक्त के भोजन का इंतजाम करना इस सरकार की सोच को दर्शाता है। सरकार

को आगे भी इन तमाम फैसलों के साथ साथ संक्रमण मुक्त जिलों में संक्रमण से बचाव के माध्यम से आर्थिक

गतिविधियों को तेज करने के फैसलों पर अमल करना चाहिए। देश की अर्थव्यवस्था जितनी तेजी से बिगड़ती जा

रही है, उसमें यह जरूरी है। यह इसलिए भी जरूरी है क्योंकि लाखों लोग दूसरे राज्यों से भागकर यहां अपने घर आये

हैं। ऐसे लोगों के लिए भी रोजगार का सृजन होना चाहिए।


 

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