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हमलोग तो राज्य की समस्याओं पर बात करेंगेः हेमंत सोरेन







  • चुनाव की घोषणा पर पूर्व सीएम ने की राय जाहिर
  • पांच चरणों में चुनाव ही भाजपा की विफलता
  • बार बार राष्ट्रीयता की आड़ में छिपना नहीं चलेगा
  • खुले मन से सभी नेता सीटों की बात तय कर लेंगे
संवाददाता

रांचीः हमलोग तो झारखंड राज्य की समस्याओं पर ही अपना ध्यान

लगायेंगे। सरकार में होने अथवा नहीं होने दोनों ही परिस्थिति में झारखंड

मुक्ति मोर्चा की सोच में राज्य की सबसे पहले होता है। यह बातें पूर्व

मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन

ने कही। उन्होंने कहा कि इस राज्य की अपनी कई किस्म की समस्याएं

हैं। इसलिए उनपर सबसे पहले हमलोग मिलकर चर्चा करेंगे। बार बार

राष्ट्रीयता के बहाने असली समस्याओं के मुंह चुराने से समस्याए तो हल

नहीं होती।

वह पांच चरणों में चुनाव की घोषणा होने के बाद यह राय जाहिर कर रहे थे।

महागठबंधन के बारे में उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि समान विचारधारा

वाली पार्टियों को यानी हमलोगों को एकमंच पर आने से कोई रोक नहीं

सकता। उल्लेखनीय है कि हेमंत सोरेन ने कल ही रिम्स में भर्ती लालू प्रसाद

यादव से भेंट भी की है। श्री सोरेन ने कहा कि इस मुद्दे पर सभी दलों के बड़े

नेता आपसी संवाद कर रहे हैं। उम्मीद है कि आगामी 6 अथवा सात नवंबर

तक जनता को इस प्रस्तावित गठबंधन के स्वरुप की जानकारी मिल जाएगी।

श्री सोरेन ने कहा कि जहां तक राष्ट्रीयता का सवाल है तो लोकसभा चुनाव में

जनता ने इसी मुद्दे पर भाजपा को प्रचंड जनादेश प्रदान किया है। यह जनादेश

इसलिए दिया गया है कि वह ऐसी चुनौतियों का मुकाबला कर सके।

इसलिए अब बार बार राज्य के चुनाव में भी राष्ट्रीयता की आड़ लेना

उचित नहीं है।

हमलोग हर स्थिति में सिर्फ लोगों की बात ही करेंगे

इस बार के विधानसभा चुनाव में तो भाजपा को राज्य के मुद्दे पर अपनी

उपलब्धि बतानी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने नक्सलवाद

खत्म करने का बड़ी जोर शोर से दावा किया था। अगर यह दावा सही था

तो आसन्न चुनाव में यह मुद्दा इतनी प्रमुखता से क्यों उछला जिसमें चुनाव

आयोग को भी पांच चरणों मं चुनाव कराना पड़ रहा है। दरअसल भाजपा इस

नक्सलवाद का सिर्फ एक हौब्वा खड़ी कर अपना हित साधना चाहती है।

वह दरअसल में इस समस्या का समाधान तो कतई नहीं चाहते।

प्रस्तावित महागठबंधन में सीटों के बंटवारे पर पूर्व मुख्यमंत्री ने साफ कर

दिया कि इस प्रक्रिया से जुड़े सभी नेता खुले दिमाग और मन से काम कर

रहे हैं। सभी का मानना है कि भाजपा के भ्रष्टाचार और भय के शासन से

जनता को राहत दिलाने के लिए मिलकर लड़ने की जरूरत है। इसलिए

आपसी बात-चीत से सभी मुद्दों को हल कर लिया जाएगा। वैसे मुख्यमंत्री पद

के बारे में उनकी राय है कि यह तो सभी घटक दलों की बैठक में तय होने

वाला विषय है। वह अकेले इस पर कोई निर्णय नहीं ले सकते। अलबत्ता

इतना तो तय है कि हरेक हवाई जहाज में एक पाइलट तो होता ही है।



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